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विज्ञान

खुशियां छीनता फास्ट फूड

बहुत ज्यादा फास्ट फूड खाने वाले सरल और छोटी छोटी चीजों का आनंद लेने से महरूम रह जाते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक फास्ट फूड प्रेमी दूसरों के मुकाबले जल्दी बोर भी होते हैं, उनमें धीरज भी कम होता है.

टोरंटो यूनिवर्सिटी के रोटमैन कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट ने अमेरिका में हजारों लोगों की खाने की आदतों और उनके मनोविज्ञान पर शोध किया. रिसर्च के दौरान यह पता करने की कोशिश की गई कि लोग अंजानी जगहों पर प्राकृतिक चीजें खोजने में कितनी दिलचस्पी लेते हैं या एक फूल देखकर उन्हें कैसा अहसास होता है. पिन कोड के सहारे रिसर्चरों ने हर इलाके में फास्ट फूड रेस्तरांओं की संख्या दर्ज की. फिर उन इलाकों में जाकर लोगों से पूछा गया कि वो हफ्ते या दिन भर में कितनी बार फास्ट फूड खाते हैं.

रिसचर्रों का दावा है कि जो लोग बहुत फास्ट फूड खाते हैं, उनके स्वभाव में बाकियों के मुकाबले ज्यादा बेचैनी होती है. ये लोग छोटी छोटी बातों का आनंद नहीं उठा पाते. यूनिवर्सिटी में मानव व्यवहार और संसाधन के एसोसिएट प्रोफेसर स्टैनफोर्ड डेवो कहते हैं, "अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे कम अधीर हों, वो गुलाब की खुशबू सूंघें, उनमें संतुष्टि का अहसास हो तो आपको ऐसा पड़ोस चुनना चाहिए जहां बहुत कम फास्ट फूड रेस्तरां हों."

रिसर्च में पता चला कि खूब फास्ट फूड खाने वाले छुट्टियों में जंगल या वादियों में घूमना कम पसंद करते हैं. वो ऐसी जगहें ढूंढते हैं जहां उनके शरीर को कम से कम कष्ट उठाना पड़े. प्रकृति की सुदंर तस्वीरें देखते हुए भी उन्हें आनंद का अहसास नहीं होता है. शोध के दौरान ऐसे लोगों को जब उनके पसंदीदा फास्ट फूड की तस्वीरें दिखाई गई तो उनके चेहरे खिलने लगे.

रिसर्चरों को लगता है कि भागदौड़ भरी जिंदगी में घर, दफ्तर और रेस्तरां तक अगर जिंदगी सिमट जाए तो इंसान पर इसका मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है. प्रोफेसर डेवो कहते हैं, "हमें लगता है कि फास्ट फूड हमारा समय बचा रहा है और हमें झंझट से मुक्ति दिला रहा है, फटाफट खाने से हम बाकी चीजों के लिए समय निकाल सकते हैं. लेकिन असल में इसके पीछे अधीरता का अहसास छुपा हुआ है, ये ऐसी गतिविधियों का समूह है जो हमें आनंद उठाने से रोकने लगता है."

ओएसजे/एमजे(रॉयटर्स)