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मनोरंजन

खुशहाली की हैट ट्रिक

खेलों में तो हैट ट्रिक बहुत लगे, ऑस्ट्रेलिया ने खुशहाली में हैट ट्रिक लगाई है. लगातार तीसरे साल यह दुनिया का सबसे ज्यादा खुश रहने वाला देश बन गया है.

मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया के लोगों को पता चला कि लगातार तीसरे साल उन्हें यह खिताब मिला है. स्वीडन को दूसरा और कनाडा को तीसरा स्थान मिला है. फ्रांस की आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ओईसीडी ने 36 देशों की रैंकिंग घोषित की है. इसमें शिक्षा, रोजगार, सेहत और जीवन स्तर से जुड़े दूसरे मानकों के आधार पर अंक दिए गए हैं.

माथियास बाहनर 29 साल के जर्मन मूल के युवक हैं और 2008 में वह जैसे ही सिडनी पहुंचे, उन्हें वहां नौकरी मिल गई. भले ही यह कूरियर सर्विस ही क्यों न थी. वह ऑस्ट्रेलिया की समृद्धि की एक मिसाल हैं. देश की अर्थव्यवस्था लगातार 21वें साल भी विकास कर रही है.

बाहनर का कहना है, "बर्लिन में मैं बेरोजगार बैठा था, लेकिन यहां काम मिलना आसान था." सिडनी में ऑफिस का किराया न्यूयॉर्क से भी महंगा है और बाहनर मानते हैं कि ऐसी हालत में घर का सपना सिर्फ सपना ही है.

आलीशान घरों का देश

ऑस्ट्रेलिया में सबसे बड़े घर बनते हैं - ब्रिटेन के औसत घर से तीनगुना बड़े. यहां प्रति व्यक्ति 2.3 कमरे हैं. देश की अर्थव्यवस्था 2008 के मुकाबले 13 गुनी बढ़ी है. हालांकि यह दौर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक मंदी का रहा और दुनिया के ज्यादातर देशों को नीचे की ओर जाना पड़ा.

हालांकि कुछ कंपनियों का कहना है कि उन्हें यहां कारोबार में दिक्कतें आ रही हैं. अमेरिका की फोर्ड कंपनी ने एलान किया है कि 90 साल तक कार बनाने के बाद यह ऑस्ट्रेलिया में उत्पादन बंद करने वाला है. फोर्ड ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख बॉब ग्राजियानो ने बताया कि 1200 लोगों की नौकरी जाएगी क्योंकि "यहां यूरोप के मुकाबले दोगुना और एशिया के मुकाबले चारगुना खर्च हो रहा है."

किसी तरह पहुंच जाएं

अच्छे जीवन स्तर की वजह से गैरकानूनी तरीके से ऑस्ट्रेलिया आने वालों की भी कमी नहीं है. सिर्फ इसी महीने इंडोनेशिया की 38 नावें करीब 2755 लोगों के साथ यहां पहुंची हैं, जो वहां शरण लेना चाहते हैं. आंकड़ों के मुताबिक 2007 के बाद से करीब 35,000 लोग हिन्द महासागर को पार कर यहां किसी तरह पहुंचे हैं. इस दौरान करीब 1000 लोगों की डूबने से मौत भी हो गई और कई लोगों ने तस्करों को पैसे भी दिए हैं.

ऑस्ट्रेलिया एक विशाल भूभाग वाला देश है और यहां की जनसंख्या बहुत कम है. नई प्रवासी नीति के बाद यहां की जनसंख्या चीन से भी तेजी से बढ़ने की संभावना है. करीब 2.3 करोड़ की आबादी वाले ऑस्ट्रेलिया में मौजूदा नीति के मुताबिक जनसंख्या बढ़ कर 2050 में 3.7 करोड़ हो जाएगी.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यूरोप से आए लोग उनके रोजगार पर सेंध लगा रहे हैं. समझा जाता है कि आयरलैंड से करीब 27,000 लोग यहां अस्थायी वीजा पर रह रहे हैं और वे स्थायी वीजा हासिल करने की कोशिशों में लगे हैं.

आराम कम, काम ज्यादा

हालांकि ऑस्ट्रेलिया के लोग लंबे वक्त तक काम करते हैं. वे जापान के लोगों से भी ज्यादा लंबा काम करते हैं. इस मामले में 36 देशों की सूची में उसका स्थान 30वां है.

ऑस्ट्रेलिया के करीब 20 फीसदी लोग हफ्ते में 50 घंटे से ज्यादा काम करते हैं. यह जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और इटली जैसे देशों के मुकाबले लगभग दोगुना है. सिर्फ 40 फीसदी लोग अपनी पूरी सालाना छुट्टियां ले पाते हैं. एक तिहाई लोग तो ऐसे हैं, जो कोई भी छुट्टी नहीं लेते.

हाल में 12,000 कॉलेज छात्रों के सर्वे में पता लगा कि औसत तौर पर छात्र अपनी पढ़ाई के साथ हफ्ते में 16 घंटे काम भी कर रहे हैं.

आराम करने के मामले में ऑस्ट्रेलिया का नंबर 25वां है. समझा जाता है कि वे अपने काम को लेकर इतने संजीदा हैं कि छुट्टियों का वक्त कम ही निकाल पाते हैं. रोजगार सुरक्षा के मामले में ऑस्ट्रेलिया नीचे से सातवें नंबर पर है.

वोटिंग और जुर्माना

हालांकि वोट देने वालों की संख्या में ऑस्ट्रेलिया सबसे आगे है. 14 सितंबर को आम चुनाव के लिए मतदान में करीब 93 फीसदी लोगों के वोट देने की उम्मीद है. बाकी के सात फीसदी को जुर्माना देना पड़ सकता है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया उन गिने चुने देशों में है, जहां वोट न देने पर जुर्माना देना पड़ता है.

एजेए/एमजी (डीपीए)

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