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खुले में शौच तो नौकरी से धोएंगे हाथ

पंचायती चुनाव में बीजेपी की ओर से अपना नामांकन पत्र भरने वाले एक व्यक्ति की उम्मीदवारी खारिज होने का कारण उसके घर पर टॉयलेट ना होना बताया गया. स्वच्छ भारत बनाने के लिए हो रहे हैं कई अनोखे उपाय.

पूरे विश्व में 19 नवंबर को टॉयलेट दिवस के रूप में मनाया जाता है. संयुक्त राष्ट्र की ओर से हर साल एक नए बिंदु पर जोर दिया जाता है जिससे दुनिया भर की सरकारें उस ओर ध्यान दें. यूएन के अनुसार आज भी करीब 4 अरब लोगों को टॉयलेट मुहय्या नहीं है. इनमें से एक अरब ऐसे लोग हैं जो खुले में शौच के लिए जाते हैं और कई तरह की संक्रामक बीमारियों के अलावा और खतरों की चपेट में भी आते हैं.

भारत को स्वच्छ बनाने की कोशिश में 2 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की गई. इसके अंतर्गत सार्वजनिक जगहों की सफाई के अलावा देश भर में टॉयलेट बनाने का भी लक्ष्य था. देश की कुछ राज्य सरकारें इस कोशिश को नए स्तर पर ले जा रही हैं. गुजरात के सुरेन्द्रनगर की एक तालुका पंचायत के लिए चुनाव में खड़े एक उम्मीदवार का नामांकन इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि उसके घर पर शौचालय नहीं है.

पश्चिम बंगाल का नादिया जिला खुले में शौच के प्रचलन को खत्म करने की दिशा में एक मिसाल बन गया है. खुले में शौच करना भारत के कई इलाकों में एक आम बात है. कई घरों में शौचालय होने के बावजूद लोग बाहर खुले में जाना पसंद करते हैं.

नादिया जिला आधिकारिक रूप से देश का पहला खुला शौच मुक्त जिला बन गया है. इसका अर्थ है कि यहां के हर घर में शौचालय है और लोग उसका इस्तेमाल भी करते हैं. इसके लिए काफी लंबे समय से यहां लोगों को घर का शौचालय इस्तेमाल करने के लिए जागरुक किया गया.

भारत में खुले में शौच जाने वालों की तादात अब भी 60 करोड़ के आसपास है. इससे होने वाले नुकसान के बारे में अभी भी पर्याप्त जागरुकता नहीं है. इससे कुपोषण, डायरिया, कोलेरा और बच्चों का अवरोधित विकास होता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता में आते ही अगले पांच सालों हर घर के अंदर एक शौचालय बनवाने का अभियान शुरु किया था.

कई सरकारें शौचालय बनवाने के काम में जोर शोर से लग गईं लेकिन इस धारणा को बदलने पर ज्यादा काम नहीं हुआ कि शौच के लिए घर से दूर जाना ही बेहतर है. यहां तक कि भारत से गरीब होने के बावजूद पड़ोसी देश बांग्लादेश में केवल 3 प्रतिशत लोग ही खुले में शौच करते हैं. हरियाणा सरकार ने हाल ही में निर्णय लिया है कि कुछ सरकारी नौकरियों में यह भी शर्त होगी कि अभ्यर्थी खुले में शौच ना जाता हो. कुरुक्षेत्र के इस विज्ञापन पर नजर डालिए.

इस बात को अभ्यर्थियों से लिखित में लिया जाएगा कि वे शौचालय का इस्तेमाल करते हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक हरियाणा में करीब 69 प्रतिशत घरों में टॉयलेट बने हैं और 30 प्रतिशत लोग शौच के लिए बाहर जाते हैं. वहीं सार्वजनिक शौचालयों का इस्तेमाल केवल 1 प्रतिशत लोग ही करते हैं. इसके पहले भी हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा पंचायती राज एक्ट में बदलाव लाकर पंचायती चुनावों के उम्मीदवारों के लिए घर में टॉयलेट होना अनिवार्य करने की मांग की है, जो कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. मुख्यमंत्री का मानना है कि पंचायत के प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों को ग्रामीण जनता के लिए आदर्श बनना चाहिए.

ऋतिका राय

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