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दुनिया

खुर्शीद से खुश श्रीलंका

प्रधानमंत्री के इनकार बाद श्रीलंका भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद की मौजूदगी से ही खुश है. तमिलों और मानवाधिकार के मुद्दे पर भारतीय प्रधानमंत्री ने राष्ट्रमंडल शिखर बैठक में नहीं जाने का फैसला किया.

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिन्दा राजपक्षे से जब पूछा गया कि क्या वे इस बात से संतुष्ट हैं कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल में सिर्फ विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ही आए हैं, तो राजपक्षे ने कहा, "मैं संतुष्ट हूं." जब एक भारतीय रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि तमिलों की भावना को देखते हुए भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यहां नहीं आने का फैसला किया, तो उन्होंने कहा, "उन्होंने मुझसे ऐसा नहीं कहा." राजपक्षे की दलील है कि सिंह ने दो साल पहले पर्थ वाली शिखर बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया था.

हालांकि भारत में दक्षिण की तमिल पार्टियों ने केंद्र सरकार से इस बैठक का पूरी तरह बहिष्कार करने की मांग की थी. लेकिन विदेश मंत्री खुर्शीद इसके बावजूद कोलंबो में हो रहे राष्ट्रमंडल बैठक में शिरकत करने पहुंचे. उनका कहना है कि श्रीलंका में तमिलों के मुद्दे पर भारत अपने रोल को नजरअंदाज नहीं कर सकता है. उनका कहना है कि श्रीलंका में रह रहे तमिलों के प्रति भारत की जवाबदेही है और वह इस काम में लगा रहेगा.

Unabhängigkeitsfeier Sri Lanka

राष्ट्रपति महिन्दा राजपक्षे

उनका कहना है कि हालांकि वह बहुदेशीय सम्मेलन में भाग लेने श्रीलंका आए हैं लेकिन इस मौके का इस्तेमाल करते हुए वह श्रीलंका सरकार से भी बातचीत करेंगे. प्रधानमंत्री सिंह ने इस तीन दिनों की बैठक में हिस्सा लेने का कार्यक्रम बनाया था लेकिन घरेलू राजनीति की वजह से आखिरी मौके पर उन्हें फैसला पलटना पड़ा. भारत में अगले साल आम चुनाव है और दक्षिण में तमिलों की पार्टी इस मामले को लेकर बेहद संजीदा है.

श्रीलंकाई तमिलों का मुद्दा

दशकों तक चले जातीय संघर्ष में आरोप है कि श्रीलंका की सेना ने तमिलों के साथ मानवाधिकार अपराध किए हैं. तमिल विद्रोही संगठन लिट्टे के प्रमुख वी प्रभाकरन की मौत के साथ 2009 में यह युद्ध खत्म हुआ. अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस दौरान श्रीलंका की ज्यादती के मामले में अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग करता है, जिससे श्रीलंका बार बार इनकार करता आया है.

श्रीलंका के राष्ट्रपति से जब युद्ध अपराध के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने लगभग गुस्से में कहा कि ऐसा कुछ नहीं है, जिसे छिपाया जा रहा है, "हम खुले हुए हैं. हमारे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है." उन्होंने कहा कि वह ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के साथ मिल कर चर्चा करने को तैयार हैं. श्रीलंका पर आरोप है कि उसके सैनिकों ने युद्ध के आखिरी चरण में 40,000 तमिलों की हत्या की थी. राजपक्षे ने कहा, "मैं उनसे मिलूंगा और देखूंगा कि क्या होता है. मेरे पास भी कुछ सवाल हैं." उनका कहना है कि देश में एक कानून व्यवस्था है और एक मानवाधिकार आयोग भी है.

हमने रोका खूनखराबा

उनका कहना है, "यहां 30 साल तक लोग मारे जाते रहे. कम से कम 2009 में हमने इस पर रोक तो लगाई. आज श्रीलंका में कोई हत्या नहीं हो रही है." तमिल और सिंहली बहुल श्रीलंकाई सेना के बीच हुए संघर्ष में एक लाख से ज्यादा लोगों की जान गई.

राष्ट्रमंडल के महासचिव कमलेश शर्मा इन बातों से इनकार करते हैं कि संस्था मानवाधिकारों के खिलाफ हुई गतिविधियों पर कदम उठाने में कतराता आया है. उनका मानना है कि श्रीलंका को पूरी प्रक्रिया में शामिल करना बड़ी सफलता है. जब उनसे पूछा गया कि क्या श्रीलंका मानवाधिकार की धज्जियां उड़ा रहा है, तो उन्होंने कहा, "ऐसा नहीं है. यह दिखा रहा है कि कॉमनवेल्थ काम कर रहा है."

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स एशिया के प्रमुख ब्रैड एडम्स का कहना है, "अगर राष्ट्रमंडल सार्वजनिक तौर पर श्रीलंका को मानवाधिकार के मामले में नहीं लाएगा, तो अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर इसकी साख दांव पर लगी है." श्रीलंका में करीब 12 फीसदी तमिल हैं और राजपक्षे का कहना है, "मेरी नीति है कि मैं आतंकवादियों पर भी जीत हासिल करूं. मैं उनसे बातचीत को तैयार हूं लेकिन मैं किसी को इस बात की इजाजत नहीं दे सकता कि वह इस देश को बांट दे."

एजेए/एमजी (पीटीआई, एएफपी)

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