खबर लहरिया बॉब्स में जूरी विजेता | ब्लॉग | DW | 07.05.2014
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ब्लॉग

खबर लहरिया बॉब्स में जूरी विजेता

इस साल भारत से महिला पत्रकारिता का परचम लहराने वाले अखबार 'खबर लहरिया' को बॉब्स की जूरी ने ग्लोबल मीडिया फोरम पुरस्कार से नवाजा है.

बॉब्स के विजेता तय करने के लिए इस साल भी बर्लिन में अंतरराष्ट्रीय जूरी सदस्यों की बैठक हुई और ऑनलाइन अभियानों में से विजेता को चुना गया. ऑनलाइन मुहिम पर चर्चा करने वाले जूरी सदस्य ट्विटर पर #thebobs14 पर भी बहस कर रहे थे. डॉयचे वेले बर्लिन में हो रही बॉब्स बैठक में उन्हें कुछ अहम फैसले लेने थे. दुनिया भर से 15 इंटरनेट एक्सपर्टों ने 3000 वेबसाइट्स में से विजेता चुने.

इसके अलावा जनता की पसंद हिन्दी की श्रेणी में यूजरों को विजेता चुनना था. इसमें इस साल हर्षवर्धन त्रिपाठी के ब्लॉग बतंगड़ को पाठकों ने अपना पसंदीदा ब्लॉग चुना है.

बेहतरीन ब्लॉग

काहिरा के फोटोब्लॉगर मोसाब अल शामी के ब्लॉग को बेहतरीन ब्लॉग चुना गया. तस्वीरों के जरिए अपनी कहानी कहने वाले अल शामी काहिरा में घटनाओं के बारे में बताते हैं. इनमें राजनीति ही नहीं, बल्कि काहिरा में आम लोगों की जिंदगी को दर्शाने की कोशिश की गई है. 2013 में अमेरिकी पत्रिका टाइम ने अल शामी की एक तस्वीर को साल के दस बेहतरीन चित्रों में शामिल किया था. अल शामी के बारे में बॉब्स जजों का कहना है, "अल शामी ने एक बहुत ही रचनात्मक तरीके से मिस्र के समाज में असमानता को पेश किया है. इन असमानताओं को दर्शाकर मोसाब अल शामी ने औरों का ध्यान मिस्र में परेशानियों की ओर खींचा है."

बेहतरीन सामाजिक मुहिम
अंग्रेजी वेबसाइट विजुअलाइजिंग पेलेस्टाइन को बेहतरीन सामाजिक मुहिम के तौर पर चुना गया है. इसके संपादक फलिस्तीन में स्थिति को ग्राफिक्स के जरिए दिखाते हैं. यहां केवल इस्राएल के साथ संघर्ष नहीं बल्कि पर्यावरण, चिकित्सा और शिक्षा के बारे में भी बताया जाता है. अंग्रेजी के लिए जज जॉर्जिया पॉपलवेल का कहना है कि यह वेबसाइट इस्राएल और फलिस्तीन के बीच फर्क को भावुक होने से बचाता है और उसे एक निष्पक्ष तरीके से पेश करता है.

सबसे रचनात्मक
चीन के भाषा कलाकार को इस पुरस्कार के लिए चुना गया है. यह कलाकार अपना असली नाम नहीं बताना चाहते. माइक्रोब्लॉगिंग साइट वेइबो में वेइकोम्बो हालात पर टिप्पणी करते हैं चीनी भाषा के एक अक्षर के जरिए. इस अक्षर को वह हलका सा बदल देते हैं औऱ उससे व्यंग्य करते हैं. इसे पढने वाले लोगों के लिए यह पहेली जैसा है. उन्हें बताना होता है कि इस अक्षर का क्या मतलब है. चीनी भाषा के लिए जज तियेंची मार्टिन लियाओ कहती हैं कि चीन में शब्दों और अक्षरों की पहेली की खास संस्कृति है, "वेइकोम्बो ने एक बहुत ही रचनात्मक और चतुर तरीके से चीन में सेंसर को मात दिलाने का तरीका निकाला है. उनके शब्द राजनीतिक तो हैं हीं, मजेदार भी हैं और इसलिए उनके पाठक उन्हें पसंद करते हैं."

ग्लोबल मीडिया फोरम पुरस्कार
सूचना से भागीदारी तक- इस साल ग्लोबल मीडिया फोरम का विषय यही है. हर साल इस श्रेणी में एक प्रोजेक्ट को इनाम दिया जाता है. जूरी सदस्यों ने इस साल भारत से खबर लहरिया को चुना है. यह ग्रामीण महिलाओं द्वारा लिखा जाने वाला एक अखबार है जो हिन्दी की छह बोलियों में छापा जाता है. 12 साल से महिलाओं का एक संघ इस पर काम कर रहा है. हिन्दी भाषा की जूरी रोहिणी लक्षणे का कहना है कि यह अखबार दिखाता है कि लोकतंत्र सबकी हिस्सेदारी के आधार पर ही सफल हो सकता है.

बेहतरीन इनोवेशन
बांग्लाब्रेल स्कूल की किताबों के डिजिटल संस्करण बनाता है और इसके जरिए नेत्रहीन बच्चों की मदद करता है. स्कूल की किताबों के ऑडियो संस्करण भी इसमें डाले जाते हैं. बांग्लादेश में 10 लाख से ज्यादा लोग देख नहीं सकते. 50,000 से ज्यादा नेत्रहीन बच्चों के पास पढ़ने का जरिया नहीं है. बांग्लाब्रेल ने स्वयंसेवियों का एक नेटवर्क बनाया है जो किताबों को नेत्रहीनों के लिए डिजिटलाइज करता है. दक्षिण एशिया के कई देशों की तरह बांग्लादेश में भी विकलांगों की हालत को सरकार अनदेखा कर देती है. बांग्ला भाषा के लिए जज शाहिदुल आलम कहते हैं कि बांग्लाब्रेल के जरिए बांग्लादेश में कई बच्चों की जिंदगी बेहतर हुई है.

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स पुरस्कार

इस साल यह पुरस्कार यूक्रेनी वेबसाइट यानुकोविच लीक्स को दिया जा रहा है. इस वेबसाइट पर यूक्रेनी और पश्चिम यूरोपीय पत्रकार मिलकर उन दस्तावेजों की जांच करते हैं जिन्हें पूर्व यूक्रेनी राष्ट्रपति यानुकोविच के समर्थकों ने खत्म करने की कोशिश की थी. यूक्रेन में राजनीतिक हालात को देखते हुए इस वेबसाइट को यह इनाम दिया जा रहा है. रिपोर्टर्स विदाउ बॉर्डर्स के जर्मनी में प्रमुख क्रिस्टियान मीर ने कहा, "संकट के समय में जरूरी है कि स्थिति की आलोचना करने वाले पत्रकारों का सहयोग किया जाए. हमें चाहिए कि हम उन्हें प्रेरणा दें ताकि वह खतरों के बावजूद अपनी राह पर बने रहें."

बॉब्स यानी बेस्ट ऑफ ब्लॉग्स पुरस्कारों की शुरुआथ 2004 में हुई. इन पुरस्कारों का मकसद है इंटरनेट पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देना.

रिपोर्टः मानसी गोपालकृष्णन, बर्लिन

संपादनः आभा मोंढे