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विज्ञान

खत्म होती प्रजातियों की रक्षा के लिए सम्मेलन

जापानी शहर नागोया में संयुक्त राष्ट्र प्रजाति संरक्षण सम्मेलन शुरू हुआ है. 190 से अधिक देशों के प्रतिनिधि दुनिया भर में तेजी से समाप्त हो रही प्रजातियों को बचाने के कदमों पर विचार कर रहे हैं.

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12 दिनों तक चलने वाले सम्मेलन में 2020 तक जीव-जंतुओं और पेड़ पौधों की प्रजातियों की सुरक्षा के लिए लक्ष्य तय किए जाएंगे जो अन्य मुश्किलों के अलावा आबादी के तेज विकास के कारण विलुप्त होने का खतरा झेल रहे हैं.

इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में वर्षावन जैसे प्राकृतिक संसाधनों से होने वाले लाभ और उनकी रक्षा पर होने वाले खर्च के उचित बंटवारे पर भी चर्चा होगी.

विश्व भर के प्रतिनिधि एबीएस प्रोटोकॉल तय करेंगे जिसका लक्ष्य उद्यमों द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले किसी खास इलाके के प्राकृतिक उत्पादों से होने वाला लाभ उस इलाके के लोगों को वापस देना है.

सम्मेलन के आरंभ में 193 सदस्यों वाले जैवविविधता सम्मेलन की अध्यक्षता जर्मनी ने जापान को सौंप दी. संयुक्त राष्ट्र ने 2010 तक प्रजातियों के मरने को रोकने को सहस्राब्दी लक्ष्य घोषित किया है और 2010 को जैवविविधता वर्ष के रूप में मना रहा है.

लेकिन संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय लक्ष्य पूरे नहीं हुए हैं और प्रजातियों का विलुप्त होना जारी है. अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण यूनियन के अनुसार एक चौथाई स्तनपायी जानवर, एक तिहाई एम्फिबियन और हर आठवां पक्षी समाप्त होने के खतरे में है. पौधों की हर पांचवीं प्रजाति भी विलोफ के कगार पर है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: आभा एम

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