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मंथन

खतरों के खिलाड़ी

तूफान आए और कोई उसकी तरफ बढ़ने लगे तो उसे आप क्या मानेंगे.. अनाड़ी या खिलाड़ी. और क्या कहेंगे आप ऐसी तकनीक के बारे में जिससे 24 घंटे में एक घर बन सकता हो.

जून के महीने में भारत के उत्तराखंड में इतनी भारी वर्षा हुई कि इससे केदारनाथ, गौरीकुंड जैसे बेहद अहम धार्मिक स्थलों में तबाही का मंजर छा गया. वहीं महातूफान पाइलिन के बिना ज्यादा नुकसान पहुंचाए गुजर जाने के बाद ओडीशा और आंध्रप्रदेश ने जरूर राहत की सांस ली थी. देखा जाए तो बीते पूरे ही साल दुनिया के किसी न किसी हिस्से में लोग मौसम की मार झेलते रहे. जलवायु परिवर्तन के कारण पैदा होने वाले खतरों में भारी बारिश और लगातार खतरनाक होते जाने वाले चक्रवाती तूफान शामिल हैं.

खतरों के खिलाड़ी

तूफान या बवंडर का नाम सुनते ही जो ख्याल मन में आता है, वह है उससे दूर भागके अपनी जान बचाने का. लेकिन मंथन में इस बार आप कुछ ऐसे खतरों के खिलाड़ियों से मिलेंगे, जो तूफान से दूर नहीं, बल्कि उसकी ओर भागते हैं. 'स्टॉर्म हंटर' कहलाने वाले ये जांबाज अपने कैमरों से बवंडर के पल पल की तस्वीरें उतारते हैं. अमेरिका में हर साल करीब 1,000 बवंडर आते हैं. इनकी रफ्तार कई सौ किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है. लेकिन अमेरिका से हजारों मील दूर जर्मनी में भी कुछ ऐसे लोग हैं, जो कई दशकों से तूफानों का पीछा कर रहे हैं और उसके आंकड़े जमा कर रहे हैं. यह काम सिर्फ एक जोखिम भरा शौक ही नहीं है, बल्कि कई मौकों पर पहले ही ऐसी चेतावनी दे देते हैं कि खतरा कहां से आ सकता है.

एक दिन में बनेगा घर

मंथन में इस बार बात होगी एक ऐसी तकनीक की, जिससे 24 घंटे में घर बन सकता है. करना सिर्फ यह है कि 3डी प्रिंटर से एक प्रिंट निकाल दें. यही नहीं वैज्ञानिक इस तकनीक का इस्तेमाल कर चांद पर बस्ती बनाने की योजना बना रहे हैं. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की योजना है कि बड़े बड़े रोबोटों को चांद पर भेजकर वहीं की मिट्टी से घरों का निर्माण किया जाए. किसी कल्पना लोक जैसी कहानी हो सकता है कि आने वाले कुछ सालों में सच्चाई बन जाए और चांद पर 3डी बस्ती बन जाए. जर्मनी की राजधानी बर्लिन में ऐसी कई कंपनियां हैं, जो लोगों के 3डी प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल कर 3डी पुतले तैयार करती हैं. आपको मिलवाएंगे ऐसी ही एक कंपनी ट्विनकिंड चलाने वाले टीमो शेडेल से जो सिर्फ पांच घंटे में बारीक हूबहू पुतला तैयार कर सकते हैं.

गोशाला से मोबाइल तक

गोशाला में लगाए जाने वाले ऐसे सॉफ्टवेयर के बारे में बताएंगे जो आपके पशुओं के संदेश आप तक एसएमएस के रूप में पहुंचाएंगे. जर्मन प्रांत लोवर सेक्सनी में गोशाला चलाने वाले वेस्ट्रुप से मंथन में होगी आपकी मुलाकात. वेस्ट्रुप ने अपनी गायों को सेंसर पहना रखा है, जो उनकी असामान्य हलचल को नोट करता है और इसके संकेत एक मोबाइल के जरिए उन तक पहुंच जाते हैं. कई बार बछड़े के जन्म के समय खास मदद की जरूरत होती है और सही समय पर सहायता न मिलने से बछड़ों की मोत भी हो जाती है. ऐसे में आप इस तकनीक के इस्तेमाल से बछड़े की पैदाइश का वक्त भी जान सकेगें जब आपको मोबाइल पर एसएमएस मिलेगा.

इन सभी नयी तकनीकों पर जानकारी के साथ साथ मिलवाएंगे आपको बर्लिन के एक आर्टिस्ट से जिसके लिए गत्ते कबाड़ नहीं, बल्कि कला का जरिया हैं. इस रोमांचक कलाकार से मिलने के लिए जरूर देखें मंथन शनिवार सुबह 10.30 बजे डीडी नेशनल पर.

आरआर/आईबी

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