1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

खतरे में है जर्मनी की समझौते वाली नीति

जर्मनी के ट्रेन ड्राइवरों की चार दिनों की हड़ताल ने देश को ठप्प करने का खतरा पैदा कर दिया है. गुरुवार को लाखों लोग समय पर काम पर नहीं पहुंच पाए. ग्रैहम लूकस कहते हैं इसने दुनिया भर में लोगों को आश्चर्य में डाल दिया है.

दुनिया भर में जर्मनी की छवि बहुत अच्छी है. इसे अच्छी तरह संगठित, शांतिप्रिय लोकतांत्रिक समाज समझा जाता है. सबसे बढ़कर इसे उसकी कुशलता और मेड इन जर्मनी की क्वालिटी के लिए जाना जाता है. दुनिया भर के लोग मानते हैं कि जर्मन टाइम के पक्के होते हैं और रेलगाड़ियां हमेशा समय से चलती हैं. कुशलता की यह छवि दशकों के तकनीकी आविष्कारों और कड़ी मेहनत से हालिस की गई है. चोटी का निर्यातक होने के कारण ही जर्मनी उच्च जीवन परिस्थितियां पा सका है और परिवहन का ऐसा ढांचा बना पाया है जिसकी दुनिया भर में सराहना होती है. जर्मनी के पास खनिज नहीं हैं, समृद्धि की वजह उसके उत्पाद हैं. बिक्री बढ़ने से आय बढ़ती है और सब लोग खुशहाल रहते हैं. यह सब उद्यमों और ट्रेड यूनियनों के बीच समझौतावादी रिश्तों से संभव होता रहा है.

इसलिए जब अचानक परिवहन के क्षेत्र में प्रबंधकों और ट्रेड यूनियन के बीच गंभीर समस्या होती है, तो हर कोई पूछता है कि आखिर मामला क्या है? यूरोप में जब भी हड़तालें होती हैं तो लोग ग्रीस, फ्रांस या स्पेन के बारे में सोचते हैं, जर्मनी के बारे में नहीं. इस समय जर्मनी में कुशल कर्मचारियों के दो समूहों को लेकर समस्या है, सिर्फ एक को लेकर नहीं, जो स्थिति को और असामान्य बनाता है. और ये दोनों ही समस्याएं ट्रांसपोर्ट सेक्टर की हैं.

गुरुवार सुबह लाखों कर्मचारी जब दफ्तर जाने के लिए निकले तो उन्होंने पाया कि देश का रेल नेटवर्क काम नहीं कर रहा है. बसों और ट्रामों में भारी भीड़ थी, सड़कों पर कई किलोमीटर का जैम था. बहुत से लोग देर से दफ्तर पहुंचे जिसकी वजह से अर्थव्यवस्था को करोड़ों का नुकसान हुआ है. उद्यमों मे जस्ट इन टाइम सिस्टम से कच्चा माल पहुंचता है, यदि हड़ताल जारी रहती है तो कच्चा माल न होने के कारण उत्पादन रुकने लगेगा. कुल मिलाकर एक संगठित देश में स्थिति बहुत ही अस्तव्यस्त है.

जर्मनी ट्रेन ड्राइवर अब तक की सबसे लंबी हड़ताल पर हैं. वे सिर्फ ज्यादा वेतन ही नहीं चाहते, 34,000 सदस्यों वाली उनकी ट्रेड यूनियन हड़ताल के अधिकार और ट्रेन पर काम करने वाले दूसरे कर्मचारियों की जिम्मेदारी लेने के लिए लड़ रही है.जैसे इतना ही काफी न हो, जर्मन विमान सेवा लुफ्थांसा के पायलट भी हड़ताल कर रहे हैं. वे 55 की उम्र में स्वस्थ न होने पर उदार पे पैकेज वाले अर्ली रिटायरमेंट के अपने अधिकार को खोना नहीं चाहते. हालांकि विमानन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा काफी गहन है और कंपनी के भविष्य के लिए कटौतियां जरूरी होती जा रही हैं. इस समय रेल ड्राइवरों और पायलटों के टॉ्रेड यूनियन परंपरागत समझौते की रुधान नहीं दिखा रहे हैं.

बाहर से देखने पर लगता है कि ट्रेन ड्राइवरों और पायलटों की मांगें क्या सचमुच उचित हैं. ये सच है कि दोनों नौकरियों के लिए उत्तस्तरीय कुशलता की जरूरत है और विमानों तथा रेलगाड़ी में सफर करने वाले बहुत से लोगों की जिंदगियां उनके पेशेवर काम पर निर्भर करती हैं. इसमें कोई विवाद नहीं है. लेकिन मेड इन जर्मनी का ब्रांड समझौते पर टिका है जिसमें हर कोई अपनी भूमिका निभाता है. यह हमेशा टीम का प्रयास होता है. लेकिन इस भावना से बचा नहीं जा सकता कि जर्मनी के ट्रेन ड्राइवरों और पायलटों ने इसे भुला दिया है कि वे भी मेड इन जर्मनी की सफलता पर ही निर्भर हैं. उन्हें भी लाखों जर्मनों के साथ एकजुटता दिखानी होगी जो उनसे कम अच्छी स्थिति में हैं.

DW.COM

संबंधित सामग्री