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विज्ञान

खतरे में है क्रिसमस के प्रतीक रेनडियर की सेहत

क्रिसमस के एक महत्वपूर्ण प्रतीक रेनडियर भी जलवायु परिवर्तन का खामियाजा भुगतने को मजबूर हैं. रिसर्चरों ने पाया कि आर्कटिक के निवासी रेनडियर लगातार दुबले होते जा रहे हैं और उनकी जान को खतरा है.

मान्यता है कि क्रिसमस सीजन में जब सैंटा क्लॉज को सबके लिए उपहार उठा कर लाने में मदद की जरूरत होती है, तो वे रेनडियर की सवारी साथ ले लेते हैं. लेकिन सच्चाई ये है कि आर्कटिक जैसे ठंडे प्रदेश में पाए जाने वाले रेनडियर की सेहत दिन प्रति दिन गिरती जा रही है. ऐसे में वे क्या सैंटा की मदद करेंगे बल्कि उन पर ही ध्यान दिए जाने की जरूरत है.

पिछले 16 सालों के दौरान एक वयस्क रेनडियर के शरीर का भार लगातार घटता गया है. रिसर्चरों ने इस पर नजर रखने के लिए नॉर्वेजियन आर्कटिक के स्वालबार्ड इलाके के रेनडियर का अध्ययन किया. वयस्क के भार में करीब 12 फीसदी की कमी दर्ज की गई. विशेषज्ञ इसका कारण ग्लोबल वॉर्मिंग को मानते हैं.

लिवरपूल में ब्रिटिश इकोलॉजिकल सोसायटी के समक्ष पेश की गई स्टडी के नतीजों में बताया गया कि 2010 में पैदा हुए रेनडियर वयस्क होने पर 48 किलो के आसपास के थे. वहीं जिनका जन्म 1994 में हुआ था वे इसी उम्र तक करीब 55 किलोग्राम भार के होते थे. स्टडी की अगुवाई करने वाले स्टीव अल्बॉन ने बताया, "बारह फीसदी की कमी भले ही सुनने में बहुत ज्यादा ना लगती हो, लेकिन शरीर के भार का प्रजनन और जीवन से गहरा संबंध होने के कारण, यह बेहद अहम है." अल्बॉन स्कॉटलैंड के जेम्स हटन इंस्टीट्यूट में शोध कर रहे हैं.

इसके पहले भी ऐसे कई रिसर्च हुई हैं जिनमें पाया गया है कि जब भी वयस्क का भार 50 किलो से कम हुआ है तो पूरी आबादी में कमी देखने को मिली है. अल्बॉन और उनके साथी रिसर्चर रेनडियर के वजन में आ रही इस कमी के लिए जलवायु परिवर्तन को जिम्मेदार मानते हैं. पिछले दो दशकों में रेनडियर की तादाद में बढ़ोत्तरी देखी गई थी. इसके कारण खाने और पोषण को लेकर आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ी और ये भी उनके छोटे आकार का कारण बना.

वैज्ञानिक बताते हैं कि पिछले साल आर्कटिक में दर्ज हुआ धरती का तापमान एक सदी पहले के तापमान से करीब 2.8 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था. ज्यादा गर्म सर्दियों का मतलब है कि वहां ज्यादा बारिश होगी और फिर वह बर्फ पर गिर कर जमेगी. "बर्फ पर बारिश" की इस घटना के कारण लाइकेन बर्फ के नीचे जम जाती है और रेनडियर उन तक नहीं पहुंच पाते. लाइकेन ही जाड़ों में रेनडियर का मुख्य आहार होता है. लाइकेन ऐसे जटिल जीव होते हैं, जिनमें फंगस किसी एल्गी या बैक्टीरिया के साथ सहजीवी संबंध में रहता है. रिसर्चर बताते हैं, "जब रेनडियर भूखे रह जाते हैं, तो वे अपने छोटे बच्चों को छोड़ देते हैं या बहुत ही दुबले बच्चों को जन्म देते हैं."

रिसर्चरों का अनुमान है कि आने वाले दशकों में आर्कटिक के रेनडियर संख्या में अधिक लेकिन आकार और भार में छोटे होते जाएंगे. अगर जलवायु परिवर्तन का यह सिलसिला नहीं थमा तो तो रेनडियर भोजन के बिना ही मारे जाएंगे. इस टीम ने आर्कटिक रेनडियरों पर 1994 से नजर रखी हुई है. वे 10 महीने के बच्चों को जाड़े के मौसम में नापते हैं और अगले साल गर्मियों में लौट कर फिर उनका भार और आकार दर्ज करते आए हैं.

इसी साल सामने आई एक दूसरे अध्ययन में बताया गया कि 2013-14 के जाड़ों में साइबेरिया के यामाल पेनिंसुला में करीब 61,000 रेनडियर्स की भूखों मरने की नौबत आ गई थी. इसका कारण भी "बर्फ पर बारिश" के जमने की घटना को ही बताया गया, जिसके कारण रेनडियर अपने भोजन लाइकेन तक नहीं पहुंच पा रहे थे. 

आरपी/ओएसजे (एपी)

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