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विज्ञान

खतरनाक नदी में 1200 किलोमीटर तैरने की कोशिश

एक 56 वर्षीय चीनी का सपना, चीन की नदी यांगत्से में तैरकर 1200 किलोमीटर दूर शंघाई तक पहुंचना. अब उन्होंने शंघाई में हो रही विश्व प्रदर्शनी एक्सपो तक पहुंचने का प्रयास शुरू किया है.

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चाइना टेलिकॉम के कर्मचारी बाओ झेंगबिंग का बचपन का सपना था कि एक बार वह मध्य चीन में स्थित अपने गृहनगर वुहान से शंघाई तक तैर कर पहुंचे. अब 56 वर्षीय बाओ झेंगबिंग ने अपने सपने को पूरा करने की शुरुआत की है.

यात्रा की शुरुआत से पहले बाओ झेंगबिंग ने शंघाई दैनिक से कहा, "अब अंततः मैं शंघाई तक तैर कर जाऊंगा ताकि मैं अपना सपना पूरा कर सकूं और वहां विश्व प्रदर्शनी एक्सपो देख सकूं." बाओ ने पत्रकारों से बताया, "जब मैं 12 साल का था तो जहाज़ से शंघाई गया था. रास्ते में मनोरम और सुंदर वादियों ने मुझे इतना प्रभावित किया कि मेरा मन हुआ कि कभी इस रास्ते पर तैरूं और जहां मन हो वहां रुक सकूं."

Chima Umweltaktivist Wu Lihong

यांगत्से नदी में प्रदूषण के खइलाफ आवाज़ उठाने वाले वू लिहोंग

44 साल बाद बाओ के लिए इस सपने को पूरा करना आसान नहीं होगा. सुंदर वादियां तो हैं लेकिन यांग्त्से नदी वह नहीं रही जो उनके बचपन में हुआ करती थी. सरकारी मीडिया के अनुसार पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नदी को कैंसर पैदा करने वाला समझा जाता है और औद्योगिक प्रदूषण उसकी हत्या कर रहा है.

बाओ ने स्वीकार किया है कि उनका अभियान जोखिम भरा है. उन्होंने एक बयान पर हस्ताक्षर किया है जिसमें तैर कर शंघाई पहुंचने के रास्ते में जो कुछ भी होगा उसके लिए पूरी व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी ली है. बाओ की यात्रा में 35 दिन लगेंगे और उन्होंने हर दिन 40 किलोमीटर तैरने की योजना बनाई है. इस दौरान उनके दोस्त नाव और गाड़ी में उनके साथ चलेंगे.

2008 में पेइचिंग में आयोजित ओलंपिक खेलों ने चीनियों को इतना प्रभावित किया था कि बहुत से लोगों ने इस तरह के कारनामे किए. उनमें एक 97 वर्षीया दादी भी थीं जिन्होंने चीन की बैडमिंटन टीम को देखने के लिए रिक्शे पर 2400 किलोमीटर की यात्रा की.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: आभा एम