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विज्ञान

क्लाइमेट चेंज दिखाएगा हिमखंड

अंतरिक्ष रिसर्च एजेंसी नासा के वैज्ञानिक आजकल एक बड़े हिमखंड पर नजर बनाए हुए हैं. अंटार्कटिका के ग्लेशियरों से टूट कर अलग हुआ यह हिमखंड बहते हुए अब खुले समुद्र की ओर बढ़ रहा है जिससे अचानक समुद्र तल उपर भी उठ सकता है.

दुनिया के इस सबसे बड़े हिमखंड का आकार अमेरिका के मैनहैट्टन शहर का करीब छह गुना है. नासा के वैज्ञानिकों की इस पर तीन साल से नजर बनी हुई है. नासा की वैज्ञानिक केली ब्रंट ने बताया कि यह हिमखंड करीब 660 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी मोटाई करीब 500 मीटर है. वैज्ञानिकों ने इस हिमखंड को बी31 नाम दिया है. यह पिछले नवंबर में अंटार्कटिका के पाइन आइलैंड ग्लेशियर से टूट कर अलग हुआ था. समाचार एजेंसी रॉयटर्स से टेलिफोन पर बातचीत में ब्रंट ने कहा, "यह (हिमखंड) इतना बड़ा तो है ही कि इसकी निगरानी की जाए." उन्होंने बताया कि अमेरिका के नेशनल आइस सेंटर के अलावा कई दूसरे सरकारी संगठन भी शोध के लिए हमेशा दर्जनों हिमखंडों पर नजर बनाए रखते हैं.

पाइन आइलैंड ग्लेशियर से टूट कर बना यह हिमखंड अब बहते हुए खुले समुद्र की ओर बढ़ रहा है. फिलहाल यह जहां तक पहुंचा है वहां समुद्री जहाजों का ज्यादा आना जाना नहीं होता. ब्रेंट बताती हैं, "वहां ज्यादा जहाजों की आवाजाही नहीं होती इसलिए उनकी हमें चिंता नहीं है. हमें पता है कि बड़े जहाज कहां हैं." अपने बड़े आकार के अलावा, अपनी उत्पत्ति की बेहद अप्रत्याशित जगह के कारण भी यह हिमखंड खास माना जा रहा है. नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के अलावा मैरीलैंड के मॉर्गन स्टेट यूनिवर्सिटी में भी शोध कर रही ब्रेंट ने कहा, "यह एक बड़े केक की चादर जैसा है जो दक्षिणी महासागर में तैर रहा है."

वैज्ञानिकों को 2011 में ही ग्लेशियर में आई उस दरार का पता चल गया था जिससे यह हिमखंड बना है. पाइन आइलैंड ग्लेशियर पर पिछले दो दशकों से शोध किया जा रहा है. इसका कारण यह है कि यह ग्लेशियर काफी तेजी से पिघल कर पतला हो रहा है. वैज्ञानिकों को लगता है कि समुद्र स्तर बढ़ना इसके पिघलने का कारण हो सकता है. संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन के लिए बने अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) में कहा गया है कि इस सदी के अंत तक वैश्विक तापमान में 0.3 से 4.8 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी होगी. इसके अलावा यह भी बताया गया है कि साल 2100 तक समुद्र का स्तर 26-82 सेंटीमीटर बढ़ जाएगा. आंकड़े बताते हैं कि पिछली एक सदी में विश्व का तापमान 0.75 डिग्री बढ़ा.

इसकी निगरानी और शोध में लगे रिसर्चर बताते हैं कि यह हिमखंड पाइन आइलैंड की खाड़ी से बहता हुआ जल्दी ही दक्षिणी महासागर में आकर मिल सकता है. इंग्लैंड की शेफील्ड यूनिवर्सिटी में ग्लेशियरों पर शोध करने वाले ग्रांट बिग ने नासा अर्थ ऑब्जरवेटरी की ओर से जारी एक वक्तव्य में कहा है, "हम स्थानीय महासागरीय करंट पर शोध कर रहे हैं जिससे उनकी (हिमखंड की) गति को सही तरीके से समझा जा सके. हम यह देखकर काफी हैरान हैं कि किस तरह कई बार काफी लंबे समय तक कोई हरकत नहीं दिखती और फिर अचानक ही बहुत तेज बहाव आ जाता है." इस तरह यह ग्लेशियर और हिमखंड ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन को समझने में काफी महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं.

आरआर/एएम (रॉयटर्स)

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