क्रीमिया पर जनमत संग्रह स्थगित करे रूस-जी7 | दुनिया | DW | 12.03.2014
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दुनिया

क्रीमिया पर जनमत संग्रह स्थगित करे रूस-जी7

औद्योगिक देशों के समूह जी7 ने रूस से क्रीमिया में रविवार को प्रस्तावित जनमत संग्रह को स्थगित करने को कहा है. जी7 ने कहा है कि अगर रूस इस मुद्दे पर कदम बढ़ाता है तो वह "आगे की कार्रवाई" करेगा.

दुनिया की 7 बड़े औद्योगिक देशों के समूह जी7 के नेताओं ने रूस को चेतावनी देते हुए कहा, "क्रीमिया का दर्जा बदलने के सभी प्रयासों को स्थगित कर दें," या फिर "व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से आगे की कार्रवाई" का सामना करने के लिए तैयार रहें. क्रीमिया की संसद ने रूस में शामिल होने और यूक्रेन से अलग होने को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया जिसके तहत इस रविवार को क्रीमिया में जनमत संग्रह कराया जाएगा.

क्रीमिया में जनमत संग्रह को लेकर तैयारियां चल रही हैं. क्रीमिया की संसद द्वारा उठाए गए कदम के बाद व्हाइट हाउस ने यह बयान जारी किया है. जी7 देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल है. 1998 में यूरोपीय कमीशन और रूस को इसमें शामिल कर जी8 का गठन किया था. जी7 देशों के नेताओं ने कहा है कि जनमत संग्रह के नतीजों को वे मान्यता नहीं देंगे. उनके मुताबिक उसका "कोई कानूनी असर नहीं होगा."

आर्थिक समूह ने रविवार को प्रस्तावित जनमत संग्रह को "अत्यंत त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया जिसका कोई नैतिक बल नहीं है" करार दिया है. क्योंकि समूह के मुताबिक काले सागर पर स्थित क्रीमिया में रूसी फौज मौजूद है. जी7 के नेताओं ने क्रीमिया से रूसी सेना की वापसी, यूक्रेन से बातचीत और क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को जाने की इजाजत देने की मांग की है. जी7 के मुताबिक यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता को प्रभावित करने के अलावा क्रीमिया को रूस में शामिल करने का सभी देशों की एकता और संप्रभुता की रक्षा के कानूनी पालन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.

जी7 के मुताबिक इस तरह का कदम पांच विभिन्न द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन होगा. जी7 ने आगे कहा, "हम...रूस से आग्रह करेंगे कि वह हमारे साथ मिलकर कूटनीतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से मौजूदा संकट को सुलझाने के लिए काम करे." बुधवार को यूक्रेन के प्रधानमंत्री आर्सेनी यात्सेन्युक व्हाइट हाउस में बराक ओबामा से मिल रहे हैं. रूस के सांस्कृतिक मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि रूस के 100 प्रमुख कलाकारों ने खुला खत पर हस्ताक्षर कर यूक्रेन और क्रीमिया पर राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन की नीति का समर्थन किया है.

एए/एमजे (डीपीए, रॉयटर्स, एएफपी)

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