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दुनिया

क्रीमियाः गले पड़ा रूस का तोहफा

हफ्ते भर से लापता यूक्रेन के पूर्व राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच शुक्रवार को अचानक रूस में नजर आए. उन्होंने क्रीमिया का मुद्दा भी उठाया और कहा कि यह हमेशा यूक्रेन का हिस्सा रहेगा. पर क्रीमिया का विवाद क्या है.

काले सागर में एक छोटा सा पठारी इलाका है क्रीमिया. यह हमेशा से यूक्रेन का हिस्सा नहीं रहा है, बल्कि कभी एक सोवियत नेता ने तोहफे के तौर पर इसे यूक्रेन को सौंपा था. यह छुट्टियां मनाने की जगह है और इसी के पास रूसी सेनाओं का बेड़ा भी जमा होता है. यहां पारंपरिक तौर पर रूढ़ीवादी रूसी रहते हैं, जो यूक्रेन के यूरोपीय संघ के पक्षधर हो जाने के बाद बहुत खुश नहीं हैं.

यूक्रेन की राजधानी कीव स करीब 650 किलोमीटर दूर इस इलाके को लेकर रूस जरूर दोबारा विचार कर रहा होगा. कभी जिस इलाके को उसने यूक्रेन को तोहफे में दिया, आज वही गले की हड्डी बन रहा है. विक्टर यानुकोविच के सत्ता के हटने के बाद से यहां तनाव बढ़ गया है. कई लोग इस स्वायत्त इलाके को यूक्रेन से बाहर करने की अपील कर रहे हैं.

गुरुवार को तो ऐसी स्थिति थी कि कुछ हथियारबंद लोगों ने क्षेत्र की संसद पर कब्जा कर लिया और वहां रूसी झंडा फहरा दिया.

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यूक्रेन छोड़ कर गए पूर्व राष्ट्रपति यानुकोविच

कितना बड़ा क्रीमिया

यह इलाका बेल्जियम के आकार का है और पहले भी हमलों का शिकार रहा है. चाहे वे हून हों, यूनानी या उस्मानिया साम्राज्य के तुर्क. 18वीं सदी में मॉस्को ने इस पर कब्जा किया और बाद में काले सागर में 1783 में अपनी सेनाएं तैनात कर दीं. आज यह शहर सेवास्तोपोल के नाम से जाना जाता है. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने इस पर कब्जा किया लेकिन इसके अलावा यह पूरी तरह सोवियत संघ के नियंत्रण में रहा.

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दूसरा विश्व युद्ध खत्म होते होते 1944 में सोवियत नेता जोजेफ स्टालिन ने क्रीमिया की पूरी मुस्लिम आबादी को मध्य एशिया भेज दिया. रास्ते में ही आधे लोगों की बीमारियों से मौत हो गई. दूसरे विश्व युद्ध के बाद की एक मुलाकात बहुत मशहूर है, जिसमें विजेता दल के अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट, ब्रिटेन के विंस्टन चर्चिल और सोवियत संघ के स्टालिन एक साथ नजर आते हैं. यह तस्वीर क्रीमिया में ही 1945 में खींची गई थी. बैठक में तय हुआ कि यूरोप को किधर जाना है.

तोहफे में पठार

स्टालिन की मौत के बात सोवियत संघ की कमान संभालने वाले निकिता ख्रुश्चेव ने क्रीमिया यूक्रेन को "तोहफे" के तौर पर दे दिया. 1954 में किए गए इस फैसले को बड़े ताज्जुब से देखा गया. उस वक्त इस फैसले पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया क्योंकि रूस और यूक्रेन दोनों ही सोवियत संघ का हिस्सा थे.

लेकिन जब यूक्रेन 1991 में आजाद हुआ, तो यह एक बड़ा फैसला साबित हुआ. इतने दिन गुजर जाने के बाद भी क्रीमिया में 59 प्रतिशत लोग रूसी मूल के हैं, जबकि 24 फीसदी यूक्रेनी मूल के.

सेवास्तोपोल शहर में रूसी सेना के बेड़े को लेकर यूक्रेन और रूस में हमेशा तनाव रहा है. साल 2010 में यूक्रेन ने रूस के साथ समझौता किया, जिसके तहत मॉस्को को 25 साल तक सेवास्तोपोल में रहने की इजाजत दी गई. इसके बदले रूस ने गैस की कीमतें 30 फीसदी कम कर दीं.

अंगूर की खेती के लिए मशहूर इलाके में तंबाकू का उत्पादन भी खूब होता है. क्रीमिया सैलानियों की भी पसंदीदा जगह है.

एजेए/एएम (एएफपी)

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