क्यों हो रही है गोलों की बरसात | खेल | DW | 24.06.2014
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खेल

क्यों हो रही है गोलों की बरसात

हाल के सालों में फुटबॉल वर्ल्ड कप में गोलों का औसत लगातार गिर रहा था, लेकिन ब्राजील में हो रहे मैचों में नित नए रिकॉर्ड बन रहे हैं. फुटबॉल के मैचों में गोलों की झड़ी लग गई है. आखिर क्यों हो रहा है ऐसा?

वर्ल्ड कप शुरू हुए दस दिन बीत गए और इस बीच हुए मैचों में 2.9 गोल के औसत से गोल हुए हैं. इसके साथ ही ब्राजील का टूर्नामेंट 1958 में स्वीडन में हुए टूर्नामेंट के बाद सबसे ज्यादा औसत गोलों वाला टूर्नामेंट बन गया है. स्वीडन में हर मैच में औसत 3.6 गोल हुए थे. अचानक गोलों की बरसात के पीछे कुछ दिलचस्प वजहें दिखती हैं.

जोखिम ले रहे हैं खिलाड़ी

स्पेन को हराकर चिली ने भले ही फिर से विश्व चैंपियन बनने का उसका सपना चकनाचूर कर दिया हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मंच पर मौजूदा विश्व चैंपियन के छह साल के एकछत्र राज्य का टीमों के खेल पर भारी असर हुआ है. स्पेन ने टिकीटाका पास शैली की शुरुआत की थी और उसकी दुनिया भर में कॉपी की गई थी. शावी और आंद्रेस इनिएस्ता जैसे खिलाड़ियों के कायम मिसाल का मतलब यह हुआ कि खिलाड़ी अब गेंद रखते हुए ज्यादा जोखिम लेने लगे हैं और उसका नतीजा अधिक गोलों के रूप में सामने आ रहा है.

मौसम का असर

गोलों की बरसात की एक वजह ब्राजील का मौसम भी है. 2010 में विश्व कप दक्षिण अफ्रीका में हुआ था जहां गर्म मौसम वाले ब्राजील के मुकाबले सर्दियां थीं. गर्मी और उमस का मतलब यह होता है कि खिलाड़ी जल्दी थकते हैं और जब वे थकते हैं तो ज्यादा गलतियां करते हैं. ऑस्ट्रेलिया के कोच एंज पोस्टकोग्लू का कहना है कि मौसम एक भूमिका निभा रहा है जो खेलों को खोलने में मदद दे रहा है.

शुरुआती गोल का असर

ब्राजील के टूर्नामेंट में जल्दी जल्दी गोल हो रहे हैं. उद्घाटन मैच में ब्राजील के डिफेंडर मार्चेलो को अपने ही नेट में गोल दागने में सिर्फ 11 मिनट लगे. हालांकि ब्राजील ने क्रोएशिया 3-1 से हरा दिया लेकिन शुरुआती गोल अब टूर्नामेंट में आम हो गए हैं. टूर्नामेंट के पहले 20 मैचों में 25 गोल पहले हाफ के दौरान किए गए. खेल को खोलने के लिए शुरुआती गोल से बेहतर कुछ नहीं होता. कोई शक नहीं कि सात टीमें पिछड़ने के बावजूद मैच जीतने में कामयाब रही हैं. 2010 के टूर्नामेंट में सिर्फ 4 टीमें ऐसा कर पाई थी.

नई तकनीक का इस्तेमाल

इसके अलावा इस टूर्मानेंट में भाग ले रही टीमें नई नई तकनीक का इस्तेमाल कर रही है. पिछले वर्ल्ड कप में 4-2-3-1 पद्धति का बोलबाला था , लेकिन ब्राजील में अजीब अजीब रणनीति अपनाने वाली टीमों को कामयाबी मिल रही है. नीदरलैंड ने 5-3-2 की मदद से स्पेन को पछाड़ा. आर्येन रॉबेन ने अपनी टीम की रणनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा, "यह तथ्य कि हमारे डिफेंडर बहुत दूर तक खेलते हैं, इससे फॉरवर्ड रॉबिन और मेरे लिए काफी जगह बन जाती है."

बुरी गोलकीपिंग

मौजूदा वर्ल्ड कप में गोलकीपिंग का स्तर अपेक्षा से कम रहा है. फुटबॉल प्रेमियों को फान पैर्सी या टिम कैहिई जैसे खिलाड़ियों के कुछ बेहतरीन गोल देखने को मिले हैं, लेकिन स्पेन के इकर कासियास या रूस के इगोर अकिनफीव और ऑस्ट्रेलिया के मैथ्यू रायन में भारी गलतियां की हैं. ब्राजील के जूलियो सेजार और अर्जेंटीना के सैर्जियो रोमेरो को मैच की प्रैक्टिस नहीं है. इसके अलावा शुरुआती गोलों ने ऐसा माहौल बनाया है जिसमें दर्शक आक्रामक खेल को पसंद कर रहे हैं और सुरक्षात्मक खेल को नकार रहे हैं. जो फुटबॉलप्रेमी किसी खास टीम के साथ नहीं जुड़े हैं उनके लिए यह वर्ल्ड कप बेहतरीन टूर्नामेंट के रूप में सामने आ रहा है.

एमजे/आईबी (एएफपी)

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