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दुनिया

क्यों सेल्फी से डर रहे हैं पाकिस्तानी बच्चे

क्या इंटरनेट में अपनी तस्वीर डालना गलत है? क्या ऐसा करने पर किसी पर तोहमत लग सकती है? पाकिस्तान में स्कूली बच्चों को सेल्फी पोस्ट करने से डर लगता है. जानिए क्यों.

एक तरफ परंपराएं, तो दूसरी तरफ दुनिया को तेजी से बदलता इंटरनेट. भारत और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए इंटरनेट और स्मार्टफोन बहुत से सवाल साथ ले कर आए हैं. हाल ही में गुजरात के कुछ गावों में कु्ंवारी लड़कियों को फोन ना देने की बात कही गयी. इससे पहले हरियाणा में भी पंचायत इस तरह की बात कह चुकी है. टीवी पर युवा अपने चहेते कलकारों को नए जमाने के कपड़े पहने, नए जमाने की तकनीक इस्तेमाल करते देखते हैं, तो खुद भी वैसा ही बनना चाहते हैं. लेकिन सभी के लिए यह आसान नहीं. पाकिस्तान में कई स्कूली बच्चे सोशल मीडिया को लेकर उलझन में हैं.

कैसी हो प्रोफाइल पिक्चर?

समाचार एजेंसी एएफपी ने पाकिस्तान में स्कूली बच्चों से बात कर जानना चाहा कि उन्हें किस तरह की परेशानियां होती हैं. अधिकतर लड़कियों ने फेसबुक पर तस्वीरें पोस्ट करने के अपने अनुभव बताए. अपनी पहचान ना बताने की शर्त पर एक बच्ची ने कहा, "मैं अब अपनी तस्वीरों में पाउट नहीं बनाती क्योंकि लोग मेरे बारे में गलत सोचने लगते हैं." पाउट करना यानि मुस्कुराते हुए होंठों को कुछ ऐसे गोल घुमाना जैसे आप हवा में किसी को चूम रहे हों. सोशल मीडिया में लड़कियों और महिलाओं की सेल्फी में अधिकतर पाउट देखने को मिलता है. लेकिन इस बच्ची का कहना है कि यदि वह ऐसा करे, तो उसकी तुलना "स्लट" यानि वेश्या से की जाती है, "लोग मुझसे पूछते हैं कि तुम मुस्कुरा क्यों रही थी. मैं अपने दोस्तों के साथ भी तस्वीरें पोस्ट नहीं कर सकती क्योंकि तब रिश्तेदार, टीचर और दूसरे दोस्त सवाल उठाने लगते हैं. इसलिए अब मैं अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदलती ही नहीं हूं."

यह बातचीत एएफपी ने इस्लामाबाद के एक माध्यम वर्गीय प्राइवेट स्कूल में की. 14 साल के एक छात्र का कहना था, "घूम फिर कर बात धर्म पर आ जाती है. हम एक इस्लामी देश में रहते हैं. लोग आपको यह कह कर आंकने लगते हैं कि इस्लाम लड़कियों को टांगे और बाजू दिखाने की इजाजत नहीं देता, या फिर लड़के लड़कियों को एक दूसरे से घुलने मिलने की भी इजाजत नहीं देता." इस छात्र ने बताया कि जब उसने अपनी क्लास की एक लड़की के साथ तस्वीर पोस्ट की, तो उसे रिश्तेदारों की खूब डांट सुननी पड़ी.

फेक प्रोफाइल का चक्कर

हालांकि बच्चे यह बात भी मानते हैं कि इंटरनेट में अपनी तस्वीरें डालना खतरनाक भी हो सकता है. 15 साल की एक छात्रा ने कहा, "अगर मैं अपनी तस्वीर डालती हूं, तो कुछ लोग इंटरनेट में ही मेरा पीछा करने लगते हैं, वे मुझे बुरी बुरी तस्वीरें भेजते हैं और मैं बहुत परेशान हो जाती हूं." अन्य छात्रों ने भी माना कि अगर सेल्फी पोस्ट की जाए, तो पीछा करने वालों की संख्या बढ़ जाती है.

इससे बचने के लिए कई बच्चों ने झूठे नाम और झूठी तस्वीरों के साथ अपने प्रोफाइल बनाए हैं क्योंकि अधिकतर का मानना है कि सोशल मीडिया में मौजूदगी उनमें आत्मिश्वास पैदा करती है. एक छात्र ने कहा, "स्कूल में आप हमेशा अपने मन की बात नहीं कह सकते. लेकिन सोशल मीडिया पर आप खुल कर लिख सकते हैं कि आपको क्या अच्छा लगता है." जहां बच्चों ने फेक अकाउंट बनाने का यह फायदा बताया, तो साथ ही वे इसके नुकसान से भी वाकिफ दिखे. एक छात्रा ने कहा, "एक मुस्लिम देश में लड़कियों का लड़कों से खुले आम बात करना अच्छा नहीं माना जाता, इसलिए कई लड़कियां ऑनलाइन बात करती हैं. लेकिन अगर प्रोफाइल फेक हो, तो यह बेहद जोखिम भरा हो सकता है."

ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान के लोग सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं हैं. भारत की राखी सावंत और अमेरिका की किम कारडेशियन की तरह पाकिस्तान में कंदील बलोच इंटरनेट में खासा लोकप्रिय नाम हैं. और स्कूल की इन बच्चियों की दुविधा भी यही है कि अच्छी घर की बेटियों की तुलना बलोच जैसों से नहीं की जाती.

आईबी/एसएफ (एएफपी)

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