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विज्ञान

क्यों बार बार आते हैं भूकंप?

हर भूकंप के बाद वैज्ञानिक और झटकों की चेतावनी जारी कर देते हैं. लेकिन एक बार भूकंप आ जाने के बाद धरती क्यों बार बार थर्राती है और क्या हमेशा ही ऐसा होता है?

मंगलवार को आए ताजा भूकंप में नेपाल में 65 और लोगों की जान गयी हैं. वहीं भारत में भी 17 लोगों के मारे जाने की खबर है. इसके अलावा तिब्बत में भी एक व्यक्ति की जान गयी है. नेपाल में करीब 2,000 लोग घायल हुए हैं जिन्हें अस्पतालों में चिकित्सीय मदद दी जा रही है. बार बार आ रहे ये भूकंप कुछ सवाल खड़े करते हैं.

क्या भूकंप और उसके बाद आने वाले झटकों में कोई फर्क होता है?

मूल रूप से ये झटके भी भूकंप ही हैं. वैज्ञानिक धरती के नीचे होने वाली हलचल को तीन हिस्सों में बांटते हैं. भूकंप से पहले के झटके, मुख्य भूकंप और तीसरा भूकंप के बाद के झटके. हलचल का यह तीसरा चरण भूकंप के कुछ दिन बाद महसूस किया जा सकता है. लेकिन कई मामलों में बहुत महीने गुजर जाने के बाद ये झटके महसूस होते हैं.

बार बार झटके आखिर आते ही क्यों हैं?

जिन इलाकों में भूकंप का खतरा अधिक होता है, वहां सैकड़ों सालों में धरती की निचली सतहों में तनाव बढ़ने लगता है. ऐसा टेक्टॉनिक प्लेटों के अपनी जगह से हिलने के कारण होता है. लेकिन तनाव का असर अचानक ही नहीं, बल्कि धीरे धीरे होता है. पहले लंबे समय तक धरती शांत रहती है, फिर कुछ समय के लिए परतें हिलने लगती हैं. और यही प्रक्रिया बार बार दोहराई जाती है. नेपाल उस जगह स्थित है, जहां धरती की परतों की गतिविधि सबसे ज्यादा है. यहां हर साल इंडियन प्लेट करीब चार सेंटीमीटर तक यूरेशियन प्लेट के नीचे खिसक जाती है. किसी भी महाद्वीप की प्लेट के लिए यह एक बहुत ही तेज गति है. हिमालय की बढ़ती ऊंचाई का भी यही कारण है.

भूकंप के बाद के झटके कितने खतरनाक हो सकते हैं?

मूल रूप से भूकंप से पहले के झटके इतने हल्के होते हैं कि अधिकतर वे महसूस ही नहीं होते. इसके विपरीत भूकंप के बाद के झटके लगभग भूकंप जितने ही तीव्र हो सकते हैं. नेपाल में 25 अप्रैल के भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.8 आंकी गयी थी. मंगलवार के भूकंप की तीव्रता 7.3 थी. इसके बाद और भी कई झटके महसूस हुए. एक की तीव्रता 6 से अधिक थी और अन्य तीन झटकों की 5 से ज्यादा.

क्या इन झटकों का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता?

नेपाल में 80 साल पहले भीषण भूकंप आया था. भूवैज्ञानिकों की दृष्टि से यहां एक बड़े भूकंप की आशंका लंबे समय से थी. लेकिन यह भूकंप आज आएगा या कल या फिर अगले साल, वैज्ञानिक यह बताने की स्थिति में नहीं थे. भूकंप की ही तरह, उसके बाद आने वाले झटकों का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता. ना ही इसका समय निर्धारित किया जा सकता है और ना जगह. बस, एक भीषण भूकंप के बाद भीषण झटकों का आना तय है. नेपाल और भारत की धरती कब जा कर शांत होगी, कहना मुश्किल है. हो सकता है कि आने वाले सालों में इस तरह के और झटकों का सामना करना पड़े.

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