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विज्ञान

क्यों पत्नीव्रता होते हैं बंदर

स्तनपायी जीवों की कुछ ही प्रजातियां मोनोगैमस होती हैं यानी इनमें पुरुष एक मादा के साथ रहती हैं. अब वैज्ञानिकों की टीम ने इसके लिए कुछ कारण ढूंढे हैं.

इस सवाल का जवाब जब वैज्ञानिकों को मिला तो उसमें प्रेम या रोमांस जैसा कुछ नहीं था. हर प्रजाति के मोनोगैमस होने के कारण भी अलग अलग थे.

वैज्ञानिकों की एक टीम ने सिर्फ वानरों पर ध्यान दिया. इन शोधकर्ताओं ने पाया कि नर का एक ही मादा वानर के साथ रहना इसलिए विकसित हुआ ताकि पिता अपने बच्चों का दूसरे नर वानरों से बचाव कर सकें और दूसरे नर बंदर उसके बच्चों को मार न दे.

वहीं दूसरी टीम का कारण भी अलग था. उन्होंने करीब 2000 अलग अलग स्तनपायी जीवों के मोनोगैमस व्यवहार पर शोध किए. वे इस नतीजे पर पहुंचे कि स्तनपायी इसलिए एक मादा के साथ रहने वाले बने क्योंकि मादाएं बहुत अलग अलग जगहें चली जाती हैं, तो स्वाभाविक है कई नर एक मादा के प्रति आकर्षित हो सकते हैं. इसलिए अपनी पसंद की मादा को दूसरों से बचाने के लिए नर मादा के पास रहने लगे.

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता डीटर लुकास कहते हैं कि कुल मिला कर मामला मुहब्बत का नहीं है. "सही बात तो यह है कि इससे अच्छा वह कुछ और कर ही नहीं सकते."

शोधकर्ताओं के नतीजे अलग अलग इसलिए हैं क्योंकि उन्होंने अलग अलग प्रजातियों पर नजर रखी और शोध की प्रक्रिया भी अलग थी. लेकिन दोनों ही टीमों के नतीजों ने मोनोगैमी के पारंपरिक तर्क को खारिज किया कि एक जोड़े के साथ रहने से बच्चे के पालन पोषण के लिए नर और मादा दोनों रहते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह एक अतिरिक्त लाभ है.

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में एंथ्रोपोलॉजी के रिसर्चर क्रिस्टोफर "किट" ओपी कहते हैं, "रोमांस उसके (मोनोगैमी) के बाद आया." यह शोध साइंस और प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस (पीएनएएस) नाम की विज्ञान पत्रिकाओं में छा गए हैं. साइंस पत्रिका में छपे मैमल पेपर में इंसानों को शामिल नहीं किया गया था जबकि पीएनएएस में प्रकाशित प्राइमेट एनालिसिस में इंसानों को भी शामिल किया गया क्योंकि दुनिया के हर देश में पुरुष एकपत्नीवादी नहीं हैं.

शोधकर्ताओं ने जोर देकर कहा है कि वह इन नतीजों को इंसान के संदर्भ में नहीं ले सकते. उन्होंने यह भी माना कि उनके नतीजे मोनोगैमी के रोमांटिक आयडिया से भी बहुत दूर हैं.

स्तनपायी जीवों के सिर्फ नौ फीसदी ही सामाजिक रूप से जोड़े बनाते हैं. ओपी ने बताया कि बंदरों में 25 फीसदी प्रजातियां सामाजिक रूप से मोनोगैमस होती हैं. गिब्बन बंदर हमेशा एक ही मादा के साथ रहते हैं जबकि चिंपांजी अलग अलग मादाओं के साथ रहते हैं.

ओपी ने कुल बंदरों की 230 प्रजातियों के व्यवहार के आंकड़े इकट्ठा किए. उन्होंने क्रमिक विकास की फैमिली ट्री बनाई. करीब 10,000 कंप्यूटर मॉडलों और प्रॉबेबिलिटी के जरिए उन्होंने एक टाइमलाइन बनाई जिसमें दिखाई देता है कि कब किस तरह की आदतें इनमें विकसित हुईं.

उनके नतीजेः मोनोगैमी से जुड़े सामाजिक व्यवहार जब पैदा हुए तो उसके ठीक पहले दूसरे बंदरों ने बहुत बच्चों को मारा. बंदरों में इस कारण मोनोगैमी विकसित हुई हालांकि जोड़े बनने बाद में शुरू हुए.

क्यों- क्योंकि बंदर अपने बच्चों को बहुत साल दूध पिलाते हैं और दूसरे नर वानर इन बच्चों को आसानी से मार देते हैं, अगर पिता उसका ध्यान न रखे.

वहीं जीवविज्ञान के प्रोफेसर टिम क्लटन ब्रॉक, जिन्होंने लुकास के साथ ऑल मैमल स्टडी लिखा. उनके शोध में ऐसा कहीं पता नहीं चला कि बच्चों के मारे जाने के कारण मोनोगैमी शुरू हुई. क्लटन ब्रॉक और लुकास ने पता लगाया कि हर मामले में अकेली मादाएं अच्छा फल और खाना ढूंढने के लिए इधर उधर हो गई. इस कारण नर उन्हें दूसरे नरों से बचा नहीं सका. लुकास के मुताबिक, "नर एक से ज्यादा मादा की रक्षा नहीं कर सकते " इसलिए वे मोनोगैमस हो गए.

एएम/ (डीपीए,एएफपी)

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