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दुनिया

क्यों निगलते हैं लोग चाकू और चम्मच!

पिछले दिनों भारत में एक इंसान ने 40 चाकू निगल लिए थे. डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर चाकुओं को पेट से निकाला. ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं हेता. क्यों निगलते हैं लोग इस तरह की चीजें?

कोई जेल से छूटने के लिए चम्मच निगला है तो कोई रैली जीतने के लिए बैटरी. जर्मनी के बीलेफेल्ड शहर के एक डॉक्टर इस तरह की बहुत सारी चीजें मरीजों के पेट से निकाली हैं. इनके पीछे की एक-एक कहानी दिलचस्प है. बीलेफेल्ड के डॉक्टर जीगफ्रीड एर्न्स्ट मीडेरर का पाला चाकू निगले वाले से तो अभी तक नहीं पड़ा है लेकिन पांच मार्क के सिक्के से लेकर ब्लेड और चम्मच के टुकड़े वे पेट से निकाल चुके हैं.

74 वर्षीय डॉक्टर मीडेरर ऐसी बहुत सारी कहानियों के गवाह हैं. वह बताते हैं कि जैल में कैद मरीज ने चम्मचों के टुकड़े निगल लिए थे ताकि उसे जेल से छुटकारा मिल सके. उसने एक बड़े चम्मच के दो टुकड़े कर लिए थे ताकि वह आसानी से खाने की नली से अंदर जा सके. इसकी वजह से उसे दो हफ्ते के लिए अस्पताल भेजना पड़ा और वह दो हफ्ते तक नर्सों की सेवा का लाभ उठा पाया. जब कैदी का 20 बार ऑपरेशन किया जा चुका तो डॉ. मीडेरर ने एंडोस्कोपी के जरिये पेट के अंदर की चीजों को बाहर निकालने की पेशकश की और जेल से बाहर निकलने के उसके सपने पर पानी फेर दिया.

इस बीच रिटायर हो गए डॉ. मीडेरर ने मरीजों के पेट निकाली गई चीजों को बचाकर अपने संग्रह में जमाकर रखा है. जब वह एक प्लेट पर सजा कर रखी गई उन चीजों को दिखाते हैं तो वह पुरस्कारों की तरह दिखती हैं. यह संग्रह चिकित्सा शास्त्र के इतिहास का भी अभिन्न हिस्सा है.

Deutschland Internist sammelt Teile aus dem Körper

पांच मार्क का सिक्का

19वीं सदी में ही चिकित्साशास्त्रियों को ये विचार आया था लंबा पाइप पेट के अंदर डालकर देखा जाए. तब से वे लगातार शोध में लगे रहे जब तक कि 1958 में पहली बार एक एंडोस्कोप लोगों के सामने पेश किया गया. उसने डॉ. मीडेरर की पेट के अंदर निगली हुई चीजों को ऑपरेशन किए बगैर बाहर निकालने में मदद दी. बाद में उन्होंने बॉन के पॉलीक्लीनिक में एंडोस्कोपी के लिए डिसइंफेक्शन मशीन डेवलप करने में मदद दी. अब वह मशीन मीडेरर द्वारा पेट से निकाली गईं दूसरी चीजों के साथ बॉन के जर्मन म्यूजियम में प्रदर्शित है.

डॉ. मीडेरर ने जो चीजें पेट से निकालीं, उनमें पांच मार्क का एक सिक्का भी था जिसे एक लड़के ने भाई के साथ हुए झगड़े के बाद निगल लिया था. उनके पास भी कहने को कई कहानियां हैं. जैसे कि जब उन्होंने वह सिक्का बाहर निकाला तो लड़के के पिता ने उसे अपनी जेब में रख लिया. डॉ. मीडेरर को अपनी जेब से पांच मार्क देना पड़ा ताकि वे पेट से निकाले गए सिक्के को अपने संग्रह में रख सकें. इसी तरह एक बच्चे ने दूसरे बच्चे को हराने की मंशा से उसकी गाड़ी की बैटरी मुंह में छुपा ली और हाथापाई में उसे निगल गया. अक्सर छोटी मोटी चीजें तो अपने आप बाहर निकल जाती हैं लेकिन इस तरह के मामलों का अंत हमेशा अच्छा नहीं होता. इसलिए उनकी सलाह है जब भी बच्चा कुछ निगले तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं.

एमजे/वीके (डीपीए)

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