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विज्ञान

'क्यों डरें जीएम मक्के से'

जीन संवर्धित अनाज के बारे में लोगों को हमेशा कुछ आशंकाएं रही हैं. हाल ही में यूरोप में मक्के की एक प्रजाति को उगाने की अनुमति मिल गई लेकिन लोगों के मन में इस पर कई सवाल भी हैं.

हमेशा कहा जाता है कि सोच समझ कर ही कोई चीज मुंह में डालनी चाहिए. जीन संवर्धित अनाज तो लोगों की चिंता कारण है ही. अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संस्था ग्रीनपीस के एक जनमत संग्रह में पाया गया है कि जर्मनी के लोग मक्के की जीएम प्रजाति 1570 को उगाने को लेकर आशंकित हैं.

क्या जीएम मक्के से बीमारियां होती हैं?

इस धारणा का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. कृषि वैज्ञानिक फ्रीडहेल्म टाउबे बताते हैं कि उनके हिसाब से तो "ऐसे कोई वैज्ञानिक शोध नहीं हैं जिनमें सेहत के लिए किसी तरह के खतरे का जिक्र हो." इसके अलावा जर्मन फार्मर्स असोसिएशन द्वारा बड़े स्तर पर जीएम मक्का उगाने का मकसद इंसानों के लिए नहीं बल्कि डेयरी की गायों के चारे के लिए है. वैज्ञानिक 2008 में ही साबित कर चुके हैं कि इससे ना तो गाय बीमार होती है और ना ही उसके दूध पर कोई असर पड़ता है. इसके अलावा इस मक्के का इस्तेमाल बायोगैस प्लांट्स में ऊर्जा पैदा करने के लिए होगा.

क्या जीएम मक्के से जीव जंतु मरते हैं?

यह अनाज कीड़े मकोड़ों और कुछ दूसरे जानवरों के लिए खतरनाक हो सकता है. यूरोपीय फूड सेफ्टी अथॉरिटी ने मक्के की इस जीएम किस्म की विस्तृत जांच में पाया कि मक्के की यह प्रजाति अपने पराग कणों में बहुत ज्यादा मात्रा में कीटनाशक पैदा करता है. परीक्षण के दौरान देखा गया कि इसकी वजह से कॉर्न बोरर नामके कीट के साथ साथ, उससे जुड़ी तितली और पतंगा भी प्रभावित हुआ जिसका मक्के से सीधे कोई संबंध नहीं था. वुर्जबुर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मधुमक्खियों और उनके लार्वा पर भी शोध किया. मधुमक्खियों में जीएम मक्के का कोई बुरा असर नहीं दिखा लेकिन उनके शहद में अगर जीएम मक्के के पराग कण मिले हों तो वे कीड़े मकोड़ों के लिए बुरे हो सकते हैं.

क्या जीएम मक्के से प्रकृति नष्ट होती है?

इसका निश्चित जवाब अभी नहीं मिला है. सच तो यह है कि हर पौधा अपने पर्यावरण और मिट्टी पर असर डालता है और बिल्कुल उसी तरह जीएम मक्का भी डालेगा. मैक्सिको से जर्मनी पहुंचे कॉर्न या मक्के को तेज धूप वाले इलाकों में उगाया जाता है. यह अपने आप नहीं फैल सकता और ना ही इसे जर्मनी में पाए जाने वाले किसी स्थानीय पौधे के साथ क्रॉसब्रीड किया जा सकता है. मक्का जर्मनी की ठंड भी नहीं झेल पाता.

क्या जीएम मक्के से मक्के की दूसरी किस्में प्रदूषित होंगी?

कुछ हद तक ऐसा होने की आशंका है. जर्मनी में करीब 25 लाख हेक्टेयर जमीन पर मक्का उगाया जाएगा जो देश की कुल खेती लायक भूमि का पांचवा हिस्सा है. पूरे यूरोप में 500 से भी ज्यादा मक्के की किस्में और उनके हाइब्रिड उगाए जाते हैं. जीएम मक्के के पराग कण आसानी से हवा के साथ उड़ कर एक जगह से दूसरी जगह पहुंच सकते हैं जिससे इनका प्राकृतिक किस्मों के साथ संपर्क रोकना संभव नहीं होगा.

क्या जेनेटिक इंजीनियरिंग बुरी चीज है?

यह बात लोगों के नजरिए पर निर्भर करेगी. उपभोक्ताओं के मन में जीएम मक्के को लेकर उठ रहे सवालों के बारे में कील यूनिवर्सिटी के कृषि वैज्ञानिक फ्रीडहेल्म टाउबे का कहना है, "थोड़ा बहुत संशय रखना हमेशा सही होता है." टाउबे 'ग्रीन जेनेटिक इंजीनियरिंग' के नैतिक पहलुओं की जांच से भी जुड़े हैं. उनकी सलाह है कि जीएम अनाजों को लेकर होने वाली बहसों में तथ्यों पर आधारित बातों को ही महत्व देना चाहिए.

रिपोर्टः क्रिस्टॉफ हार्टमन/आरआर

संपादनः आभा मोंढे