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विज्ञान

क्या हो स्क्रीन का सही साइज

स्मार्टफोन, कंप्यूटर, टेबलेट या फिर टीवी, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को खरीदते समय लोगों का ध्यान स्क्रीन के साइज पर होता है. लेकिन क्या स्क्रीन के मामले में यह मानना सही है कि जितना बड़ा, उतना बेहतर.

किसी भी स्क्रीन वाले गैजेट की इंच माप से पता चलता है कि उसके दो सबसे दूर वाले कोनों के बीच की दूरी कितनी है. हमें आमतौर पर लगता है कि स्क्रीन जितनी बड़ी हो उतने ही नजारे बेहतर होंगे. असल में इंच में बराबर माप का होने के बावजूद, स्क्रीन के आकार अलग हो सकते हैं. तस्वीर, वीडियो या कोई वेबसाइट स्क्रीन पर कितनी अच्छी दिखेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि डिवाइस का 'ऐस्पेक्ट रेशियो' कैसा है. उदाहरण के लिए, एप्पल के आईपैड में 4:3 फॉरमेट इस्तेमाल होता है, जो कि वेबसाइट पर सर्फिंग के लिए शानदार है. जबकि ज्यादातर एंड्रॉयड उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले 16:9 फॉरमेट वीडियो देखने के लिए बेहतरीन हैं. यही कारण है कि 16:9 फॉरमेट का इस्तेमाल टेलिविजन स्क्रीन में आदर्श माना जाता है.

कितने दूर, कितने पास

पहले कहा जाता था कि टीवी देखते समय उससे दूरी स्क्रीन की साइज की तीन से छह गुना होनी चाहिए. बिटकॉम नाम की जर्मन टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री असोसिएशन के टिम हॉफमन बताते हैं, "आजकल डिस्प्ले का रिजॉल्यूशन इतना ऊंचा होता है कि दो से तीन गुना दूरी काफी है."

इसी तरह कंप्यूटर की स्क्रीन से दूरी कम से कम 40 सेंटीमीटर होनी चाहिए. इसके अलावा स्क्रीन पर देखते हुए पलकें झपकाना बहुत जरूरी है. वरना आंखों के सूखने और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत हो सकती है.

कितनी बड़ी हो स्मार्टफोन की स्क्रीन

जब स्मार्टफोन या नोटबुक चुनना होता है तो ज्यादातर लोगों का झुकाव अपने आप बड़ी स्क्रीन साइज वाली डिवाइस की तरफ हो जाता है. असल में निर्णय इस आधार पर लेना चाहिए कि आपका इस्तेमाल कैसा होने वाला है. हॉफमन बताते हैं, "अगर आप अपने फोन पर इंटरनेट का काफी इस्तेमाल करते हैं तो डिस्प्ले कम से कम 4 इंच का होना चाहिए.

साइज के अलावा इन गैजेट्स में जिस दूसरी सबसे बड़ी चीज का ध्यान रखना चाहिए वो है, रिजॉल्यूशन. रिजॉल्यूसन को पिक्सेल काउंट में नापा जाता है. जर्मनी के एक इंडस्ट्री न्यूजलेटर, इलेक्ट्रॉनिक प्राक्सिस के प्रयोग में पाया गया है कि पिक्सेल काउंट का संबंध तस्वीर की गुणवत्ता से होता है. जबकि ई-बुक के मामले में स्क्रीन का रिजॉल्यूशन कम होना ज्यादा फायदेमंद है क्योंकि इससे आंखों पर जोर कम पड़ता है. इसके अलावा स्क्रीन पर लिखावट या फॉन्ट साइज किसी भी हाल में 2 मिलीमीटर से कम नहीं होनी चाहिए.

आरआर/आईबी (डीपीए)

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