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दुनिया

क्या सचमुच लड़कों से कम स्मार्ट होती हैं लड़कियां

साइंस पत्रिका ने मनोवैज्ञानिकों के हवाले से लिखा है कि समाज में लड़कियों और लड़कों की काबिलियत पर किए जाने वाले अंतर ने बच्चों के दिमाग में भी जगह बना ली है.

छह साल की उम्र वाली अमेरिकी लड़कियों को लगता है कि लड़के उनसे अधिक स्मार्ट हैं. साइंस पत्रिका ने अमेरिकी मनोवैज्ञानिकों के हवाले से लिखा है कि समाज में लड़कियों और लड़कों की काबिलियत पर किए जाने वाले अंतर ने बच्चों के दिमाग में भी जगह बना ली है. नतीजतन अब बच्चे इस अंतर को स्वीकार करने लगे हैं.

इलिनॉय यूनिवर्सिटी की लिन बियान और उनकी टीम ने चार से सात साल की उम्र वाले करीब 200 बच्चों को एक कहानी सुनाई. यह कहानी एक बहुत स्मार्ट इंसान से जुड़ी हुई थी लेकिन इसके लिंग पर कोई चर्चा नहीं की गई थी. जब बच्चों से इसके मुख्य किरदार के बारे में पूछा गया तो पांच साल की उम्र तक के बच्चों ने इस पर कोई खास राय जाहिर नहीं की, लेकिन छह साल और इससे बड़ी उम्र की लड़कियों की राय में यह इंसान कोई मर्द ही रहा होगा.

लिन कहती हैं कि यह हमारे लिए काफी उदास कर देने वाला तथ्य था, इससे साफ है कि इतनी छोटी उम्र के ये बच्चे इस तरह की सामाजिक धारणाओं से ग्रसित हैं. उन्होंने डीडब्ल्यू से बातचीत में कहा कि यह धारणा अमेरिकी समाज में बहुत अधिक प्रचलित है जो अब बच्चों को प्रभावित कर रही है.

दिलचस्प बात यह भी है कि लड़कियां अपने अच्छे ग्रेड के लिए अपनी काबिलियत को नहीं बल्कि मेहनत को श्रेय देती हैं. हालांकि वे ये तो मानती हैं कि अच्छे ग्रेड लड़कियों को ही मिलेंगे लेकिन इसके बाद भी उनका मानना है कि लड़के ज्यादा स्मार्ट होते हैं. शोधकर्ताओं ने जब लड़कियों को स्मार्ट गेम और मेहनत वाले गेम में से एक गेम चुनने को कहा तब भी लड़कियों ने मेहनत वाले गेम को चुना.

इस शोध में टीम ने पाया कि लड़िकयों को अपनी ही क्षमताओं पर भरोसा नहीं होता और जिंदगी में उनके द्वारा चुने गए पेशे पर भी यह सोच हावी रहती है. शोधकर्ताओं के मुताबिक करियर से जुड़े विषयों में भी यह सोच इतनी अधिक नजर आती है कि लड़कियां गणित और भौतिकी जैसे विषयों से दूरी बरतती हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि अब यह सोच अन्य विषयों में भी दिखने लगी है.

शोधकर्ताओं का सुझाव है कि टीवी पर आने वाले ड्रामा, कॉमेडी और कार्टून शो में महिला किरदारों को इन पेशे से जुड़ा हुआ दिखाया जाना चाहिए ताकि बच्चों की इस सोच को रोका जा सके. बियान कहती हैं कि हमें मेहनत और कोशिशों को ज्यादा अहमियत देनी चाहिए और किसी को स्मार्ट कहने से बचना चाहिए.

ब्रिगिटे ओस्टराथ/एए

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