1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

क्या मद्रास हाईकोर्ट के सवाल से उठेगा जयललिता की मौत से पर्दा

तमिलनाडु की भूतपूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की मौत की वजहों पर आशंकाएं जताई जाती रही है. अब एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने पूछा है कि आखिर क्यों जांच के लिए जयललिता के शव को कब्र से नहीं निकाला जाए.

ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) की प्रमुख और पांच बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रह चुकीं जयललिता की मौत पर रहस्य बना हुआ है. 5 दिसंबर को उनके निधन के बाद से ही राज्य में राजनीतिक अफरातफरी तो मची ही है, साथ ही कई लोगों ने उनकी मौत के पीछे किसी साजिश की आशंका भी जताई है. इसी मांग से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ के जज जस्टिस एस वैद्यनाथन और जस्टिस पार्थीबन ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार, राज्य सरकार और अपोलो अस्पताल प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री के शवोत्खनन का आदेश हम क्यों ना दें?

एआईएडीएमके नेता जयललिता को बुखार और शरीर में पानी की कमी की शिकायत पर 22 सितंबर को चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अस्पताल के अनुसार यहीं 4 दिसंबर को उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद 5 दिसंबर को उनका निधन हो गया. 75 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनकी सेहत से जुड़ी जानकारी पर सख्त गोपनीयता बरतने के कारण भी कई लोग नाराज हैं और उनकी मौत के कारण की जांच करवाना चाहते हैं. इन लोगों में उनकी पार्टी के ही सदस्य पीए जोसेफ भी हैं जिन्होंने जयललिता की मौत के रहस्य से जुड़ी यह जनहित याचिका मद्रास हाईकोर्ट में दायर की है.

इसके अलावा एआईएडीएमके से निष्काषित सांसद शशिकला पुष्पा ने भी उनकी मौत की जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. उन्होंने जयललिता की सबसे करीबी सहयोगी और विश्वासपात्र मानी जाने वाली शशिकला नटराजन और उनके परिवार पर शक जताया है. इन दोनों याचिकाओं में जयललिता के अस्पताल में भर्ती होने से लेकर निधन तक के समय की सीबीआई या न्यायिक जांच की मांग की गई है. इस बीच पार्टी की आम सभा ने शशिकला नटराजन को जयललिता की जगह पार्टी का नया महासचिव चुनन लिया हैय

जयललिता को 6 दिसंबर को चेन्नई के मरीना बीच पर स्थित एमजीआर मेमोरियल में दफनाया गया. मद्रास हाइकोर्ट की बेंच ने भी इस पर गौर किया कि जयलिलता की मौत के बाद किसी रेवेन्यु डिवीजन ऑफिसर ने शव को नहीं देखा और किसी तरह के मेडिकल रिकॉर्ड भी नहीं तैयार किए गए. बेंच ने इस मामले की तुलना 1980 के दशक के आखिर में तत्कालीन मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन के चेन्नई और अमेरिका में चल रहे इलाज से की. उन्होंने कहा, "जब एमजीआर का इलाज चल रहा था, तब तो सरकार ने मुख्यमंत्री का वीडियो जारी किया था."

याचिका पर अगली सुनवाई 9 जनवरी के लिए तय हुई है. याचिकाकर्ता जोसेफ ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के तीन रिटायर्ड जजों वाली एक समिति का गठन हो, जो जयललिता के इलाज की प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच करे.

आरपी/एमजे (पीटीआई)

DW.COM

संबंधित सामग्री