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विज्ञान

क्या बिना पेट्रोल के भी चलती है गाड़ी

आप हाइवे पर हैं और अचानक डैशबोर्ड पर लगे मीटर पर ध्यान जाता है. लाल हिस्से में सुई दिखा रही है कि पेट्रोल खत्म हो गया है. मन में पहला सवाल उठता है कि ना जाने गाड़ी पंप तक पहुंच भी पाएगी या नहीं.

परेशान हो कर आनन फानन में आप नजदीकी पेट्रोल पंप ढूंढने लगते हैं और पेट्रोल भरवा कर ही जान में जान आती है. पर क्या आपने कभी सोचा है कि टंकी खाली होने के बाद भी गाड़ी कैसे चल रही है. क्या कारें बिना पेट्रोल के भी चल सकती हैं?

दरअसल कार कंपनियों का मीटर बनाने का अलग अलग तरीका होता है. अधिकतर कंपनियां इस बात का ध्यान रखती हैं कि मीटर की सुई भले ही 0 पर पहुंच जाए पर टंकी में रिजर्व में पेट्रोल बचा हो. कुछ दूसरी कंपनियां ऐसे मीटर भी लगाती हैं जो बता सके कि गाड़ी और कितने किलोमीटर चलने की हालत में है.

आप के लिए खुशखबरी यह है कि मीटर भले ही कुछ भी दिखाए, पर गाड़ी कम से कम 50 किलोमीटर तो चल ही जाएगी.

Benzinuhr im Auto

धोखा दे सकती है मीटर की सुई

लेकिन फिर भी कारों के जानकारों की सलाह है कि इसे हल्के में ना लें. कार वाकई 50 किलोमीटर चलेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है. क्योंकि कितना ईंधन खर्च होगा यह सड़क की हालत पर भी निर्भर करता है. अगर आपको बार बार ब्रेक लगानी पड़े तो ईंधन की खपत ज्यादा होती है.

इसके अलावा यह भी हो सकता है कि मीटर ही आपको गलत नतीजे दिखा रहा हो. अधिकतर ईंधन की टंकी के अंदर एक फ्लोटर लगा होता है. इसके ऊपर नीचे होने पर ही मीटर की सुई निर्भर करती है. लेकिन अगर सड़क ऊबड़ खाबड़ है तो हो सकता है कि फ्लोटर ऊपर रहे, जबकि असलियत में टंकी आधी से ज्यादा खाली हो. ऐसे में मीटर की मरम्मत कराने का ख्याल भी व्यर्थ है.

कारों के जानकार कहते हैं कि मीटर पर निर्भर मत रहिए और यह जिम्मेदारी अपने हाथ में लीजिए. गाड़ी के साथ मिले कागजों में देखिए कि टंकी में कितना पेट्रोल भरा जा सकता है. जब भी पेट्रोल भरवाएं तो ध्यान दें कि कितने किलोमीटर चलने के बाद टंकी खाली हुई है. इस तरह अपनी गाड़ी का औसत खुद ही बनाएं क्योंकि हर कार की परफॉर्मेंस अलग होती है.

एक बार आपको इसके बारे में पता चल जाए, तो फिर मीटर की लाल सुई कुछ भी दिखाती रहे, आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं.

आईबी/एमजे (डीपीए)

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