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मनोरंजन

क्या बड़ी समस्या में गिरफ्तार हॉलीवुड?

ऑस्कर में नस्लवाद के आरोपों के बीच पिछले दिनों हॉलीवुड कलाकारों और फैंस से आलोचना के बाद एकैडेमी ने जरूरी परिवर्तनों का वादा किया. लेकिन आलोचकों की मानें तो परिवर्तन नाकाफी हैं.

2016 की नामांकन सूचि पर वॉशिंगटन की हॉवर्ड यूनिवर्सिटी के कम्यूनिकेशंस प्रोफेसर फ्रेडेरिक केंड्रिक का कहना है, "यह हद है!" 88वें एकैडेमी पुरस्कारों की दौड़ की सूचि से अश्वेत कलाकारों के नाम नदारद हैं. केंड्रिक ने कहा, "नस्ल और संस्कृति को लेकर अमेरिका में काफी सारी समस्याएं हैं." ऐसे विचार पिछले 6 हफ्तों में कई बड़ी हस्तियों और फैंस ने व्यक्त किए हैं, जब से नामांकन का एलान हुआ है.

सोशल मीडिया पर इस बारे में विरोध #OscarsSoWhite के साथ ट्रेंड करने लगा. इसे संपादक और पब्लिक स्पीकर एप्रिल रीन ने जनवरी में नामांकन का एलान होते ही पहली बार इस्तेमाल किया. सोशल मीडिया मंचों पर नजर डालें तो मालूम होता है कि लोगों का गुस्सा ठंडा नहीं हुआ है. विरोधी आवाजों में प्रमुख हैं निर्देशक स्पाइक ली और अभिनेत्री जाडा पिंकेट स्मिथ. न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी अपनी रिपोर्ट में इन आरोपों को स्थान दिया है कि हॉलीवुड में नस्लवाद की समस्या है.

राष्ट्रपति ओबामा ने एक बयान में कहा कि अश्वेत कलाकारों के साथ भेदभाव कहीं बड़ी समस्या तो नहीं. उन्होंने पूछा, "क्या हम वह सबकुछ कर रहे हैं जिससे सुनिश्चित हो सके कि हर किसी को बराबर अवसर मिले?" अमेरिका में अश्वेत वर्ग की एक बड़ी संख्या का जवाब है, नहीं. अश्वेत व्यक्ति के राष्ट्रपति चुने जाने के बावजूद भी बहुत कुछ बदला नजर नहीं आ रहा है.

एक वर्ग का मानना है कि इसमें हॉलीवुड का बहुत बड़ा हाथ है. लेखक अर्ल ओफरी हचिंसन ने डीडब्ल्यू को बताया कि वे हॉलीवुड को, "'एक विषम और गहरी जड़ों वाले वृक्ष" की तरह देखते हैं जो "श्वेत लड़कों की पार्टी" है. उनका जीवन में एक ही काम है, सुख भोगना. हचिंसन ने कहा हॉलीवुड में बार बार देखा गया है कि श्वेत कलाकार को जगह मिल ही जाती है.

हॉवर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र जानना चाहते थे कि श्वेत और अश्वेत कलाकारों के पात्रों के बीच इतना अंतर कैसे रह जाता है. इस प्रोजेक्ट के जरिए वे सच्चाई बाहर लाना चाहते हैं और जानना चाहते हैं कि हॉलीवुड और एकैडेमी पुरस्कारों पर लगने वाले नस्लभेद के आरोप कितने सही हैं.

दो बार ऑस्कर जीत चुके डेंजेल वॉशिंग्टन को अपवाद के तौर पर देखा जा रहा है. हॉवर्ड में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत करने वाले केंड्रिक ने कहा, "जब हॉलीवुड की शुरुआत हुई थी, अश्वेत कलाकारों की परिकल्पना नहीं की गई थी." उन्होंने मूक फिल्म "बर्थ ऑफ अ नेशन" का उदाहरण देते हुए कहा कि 1915 में बनी इस फिल्म में अश्वेत पात्रों को बुरे तौर पर दिखाया गया था और श्वेत पात्रों का महिमामंडन किया गया था.

कई अमेरिकी मानते हैं कि उनका देश अब उस दौर में आ गया है जहां नस्लभेद का कोई मतलब नहीं. लेकिन केंड्रिक मानते हैं वे भ्रम में जी रहे हैं. "हॉलीवुड के समीकरण" कुछ और ही दिखाते हैं. आलोचकों की मानें तो पिछला साल अश्वेत कलाकारों के लिए अहम साल होना चाहिए था. कई अच्छी फिल्मों में अश्वेत कलाकार मुख्य भूमिकाओं में थे. 'फोकस' में विल स्मिथ और 'क्रीड' में मिशैल जॉर्डन. बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी के बावजूद इन दोनों ही फिल्मों को नामांकन नहीं मिला.

गेरो श्लीस/एसएफ

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