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ताना बाना

क्या देश संभालने लौटेंगे चावेज

वेनेजुएला के राष्ट्रपति के फेफड़ों में इंफेक्शन हो गया है. कैंसर से जूझ रहे चावेज की हालत और बिगड़ने की खबरों के बीच सत्ता के गलियारे में अफवाहों का बाजार गर्म है लेकिन सरकार विपक्षियों और अमेरिका पर आरोप लगा रही है.

वेनेजुएला की सरकार ने विपक्षी नेताओं पर देश को अस्थिर करने के लिए मनोवैज्ञानिक जंग छेड़ने का आरोप लगया है. कैंसर से पीड़ित देश के राष्ट्रपति के फेफड़ों में इंफेक्शन है और उनकी हालत बिगड़ती जा रही है. उप राष्ट्रपति निकोलस मादुरो बीमार चावेज को देखने क्यूबा गए और लौटने के बाद ही सरकार ने अपने तेवर तीखे किए हैं. राष्ट्रपति चावेज की तीन हफ्ते पहले सर्जरी हुई है और उसके बाद से ही लगातार उनकी हालत बिगड़ती जा रही है.
सूचना मंत्री एर्नेस्टो विलेगास ने बताया कि इंफेक्शन के बाद फेफड़े पर्याप्त रूप से सांस नहीं ले रहे हैं और इस वजह से उनका इलाज बेहद संवेदनशील हो गया है. यह जानकारी देने के बाद विलेगास ने आरोप लगाया कि सरकार को अस्थिर करने और उनकी समाजवादी क्रांति को खत्म करने के लिए विरोधी राष्ट्रपति की सेहत को निशाना बना रहे हैं.


लोगों को संदेश
टीवी पर जारी एक संदेश में सूचना मंत्री ने देश के लोगों को सावधान किया, "वेनेजुएला के लोग देश भर की मीडिया में चल रहे राष्ट्र प्रमुख की सेहत को लेकर चलाए जा रहे मनोवैज्ञानिक जंग से चौकस हो जाएं जिसका अंतिम मकसद बोलिवेरियन रिपब्लिक ऑफ वेनेजुएला को अस्थिर करना है."
सूचना मंत्री का यह बयान लोगों की भारी मांग पर आया है जिसमें राष्ट्रपति के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी देने की गुजारिश की गई थी. लोग जानना चाहते थे कि राष्ट्रपति की सेहत 10 जनवरी को अगले छह साल के लिए देश की सत्ता संभालने के लायक है या नहीं. वेनेजुएला के संविधान के मुताबिक अगर कार्यकाल के चार साल के भीतर राष्ट्रपति सत्ता नहीं संभाल पाते या उनकी मौत हो जाती है तो उसके 30 दिन के भीतर दोबारा चुनाव कराना जरूरी है.
मादुरो और नेशनल एसेंबली के स्पीकर दियोसदादो काबेलो यह दोनों वेनेजुएला के सियासी हलके में दूसरे और तीसरे नंबर के नेता माने जाते हैं. इन लोगों ने साफ किया है कि राष्ट्रपति क्यूबा से लौट रहे हैं और सत्ता किसी और के हाथ में देने की कोई तैयारी नहीं हो रही है. मादुरो ने कहा है, "यहां केवल एक ही परिवर्तन है जो कम से कम छह साल पहले शुरू हुआ और जिसका हुक्म कमांडेंट ह्यूगो चावेज ने दिया." मादुरो का इशारा 2006 में चावेज के शुरू किए समाजवादी क्रांति से था.
नियंत्रण की कोशिश
मादुरो और काबेलो ने वेनेजुएला की सरकारी टीवी पर आकर अपनी बात कही. उन दोनों ने इसके जरिए सत्ता के लिए उनके बीच अंदरूनी लड़ाई के बारे में उठ रही अफवाहों को खारिज करने की कोशिश की. मादुरो ने कहा कि उन दोनों ने चावेज के सामने शपथ ली है कि अपने लोगों के साथ एकजुट रहेंगे. आपसी दरार की खबरों के बारे में काबेलो ने कहा कि विपक्ष को अभी "2000 सालों तक इंतजार करना होगा तब यह होगा, विपक्ष के साथ कोई समझौता संभव नहीं है."


दोनों नेताओं ने देश में चल रही गड़बड़ियों के पीछे अमेरिका को भी दोषी ठहराया है. मादुरो ने कहा, "हम जानते हैं कि अमेरिका वो जगह है जहां से इस तरह के छल कपट किए जा रहे हैं. वो समझते हैं कि उनका वक्त आ गया है और हम ऐसे पागलपन के दौर में आ गए हैं जब यहां और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जंग लड़ेंगे." यह कहते वक्त उनका इशारा अमेरिकी सरकार की तरफ था या अमेरिका में रह रहे प्रवासी वेनेजुएलावासियों की तरफ यह साफ नहीं हो सका.
चुनाव में चावेज को चुनौती देने वाले प्रमुख विपक्षी नेता हेनरिक कापरिले ने संकेत दिया है कि उन्हें अगले हफ्ते सरकार के नए कार्यकाल की शुरूआत में देरी को स्वीकार करना होगा. कापरिले मिरांडा राज्य के पूर्व गवर्नर है और अगले राष्ट्रपति चुनाव में जो कोई भी उतरेगा उसे सामने उनकी चुनौती होगी.
इस बीच अमेरिका में गुरुवार को विदेश मामलों की प्रवक्ता विक्टोरिया नूलैंड ने इन आरोपों से इनकार किया कि अमेरिकी अधिकारी वेनेजुएला का मामलों में दखल दे रहे हैं. अमेरिका ने यह जरूरी माना है कि उसके अधिकारी वेनेजुएला के सभी राजनीतिक दलों के संपर्क में हैं. नूलैंड ने कहा, "हम वेनेजुएलावासियों को यह संदेश दे रहे हैं कि हम चाहते हैं कि कोई भी बदलाव लोकतांत्रिक, संवैधानिक, खुला, पारदर्शी और वेनेजुएला के हिसाब से कानूनी होना चाहिए जिसका फैसला देशवासी ही करेंगे."
कैंसर की बीमारी से जूझते रहने के बावजूद बीते साल 7 अक्टूबर को चावेज ने दमदार विपक्षी उम्मीदवार को चित्त कर दिया. हालांकि उन्हें काफी समय से सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया. 23 दिन पहले उनका कैंसर से संबंधित एक लंबा और जटिल ऑपरेशन किया गया और अधिकारी मान रहे हैं कि उनका ठीक हो पाना बेहद मुश्किल है. क्यूबा के डॉक्टरों ने जून 2011 में चावेज के कैंसर का पता लगाया लेकिन वेनेजुएला सरकार ने यह कभी जाहिर नहीं होने दिया कि किस तरह की बीमारी से वह जूझ रहे हैं. अकसर उनकी बीमारी के बारे में छोटी छोटी जानकारी ही दी जाती है और वह भी अनौपचारिक तरीके से.
एनआर/एजेए (एएफपी)

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