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ब्लॉग

क्या छोटे राज्य हैं आर्थिक विकास की कुंजी

भारत में प्रांतों के पुनर्गठन का मामला समय समय पर उठता रहता है. यह क्षेत्रीय अस्मिता और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के साथ जुड़ा है. यूरोप में यह मुद्दा प्रशासनिक सुधारों और आर्थिक बेहतरी के साथ भी जुड़ा है.

ब्रसेल्स में हुए आतंकी हमलों के बाद बेल्जियम की संघात्मक व्यवस्था भी आलोचना के केंद्र में आई है जहां फ्लेमिश, फ्रेंच और जर्मन भाषाई इलाकों में बंटे देश में सूचनाओं के आदान प्रदान में कमियों की आलोचना हो रही है. राष्ट्रीयता की सीमा तोड़ते यूरोप में बेल्जियम को उत्तर राष्ट्रवादी देश माना जाता है, जहां सांस्कृतिक विविधताओं को ठोस सामाजिक सहमति के साथ जोड़ने की कोशिश होती रही है. बहुत से लोग यह भूल जाते हैं कि 1830 में बड़ी यूरोपीय सत्ताओं के झगड़े के बीच आजाद हुए बेल्जियम में स्थानीय स्वायत्तता और राज्य सत्ता के प्रति संदेह की गहरी जड़ें रही हैं, लेकिन हिंसक टकराव के नकारने और सहिष्णुता के आधार पर सहमति बनाने की कोशिशें उन पर हावी रही हैं. भाषाई विभिन्नता, सांस्कृतिक बहुलता और राष्ट्रीय अस्मिता की खोज के बीच लोग एक साथ राज्य के समेकन और भौगोलिक विभाजन के गवाह हैं.

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महेश झा

भूमंडलीकरण ने इस प्रक्रिया को और तेज कर दिया है. सिर्फ बेल्जियम में हीं नहीं, दूसरे यूरोपीय देशों में भी दूसरे देशों से आने वाले आप्रवासियों ने और अधिक सांस्कृतिक विविधता दी है. बहुसांस्कृतिकता इस बीच आर्थिक विकास का मोटर बन गया है. बाहर से आने वाले मजदूरों और प्रोफेशनल्स के बिना आज के पूंजीवादी विकास की कल्पना नहीं की जा सकती. यदि भाषा, धर्म या जाति राष्ट्रीयता का पैमाना हो तो विकसित अर्थव्यवस्था में राष्ट्रीय राज्यों का आधार खत्म होता जा रहा है. और इसके साथ हर इलाके में मौजूद संस्कृति को बचाने की चुनौती बढ़ती जा रही है. इस संस्कृति में सिर्फ भाषा और धर्म ही नहीं है, बल्कि खान-पान, आचार व्यवहार, काम करने का तरीका, पर्यावरण को सुरक्षित रखने की परंपरा और फिल्म, थियेटर और किताबों के जरिये सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने और मनोरंजन करने की व्यवस्था भी शामिल है.

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद लोकतांत्रिक जर्मनी में पारंपरिक इलाकों के मेल और आर्थिक जरूरतों के आधार पर राज्यों का गठन हुआ. आज सबसे बड़ा राज्य बवेरिया 70,000 वर्गकिलोमीटर का है तो सबसे छोटा राज्य ब्रेमेन सिर्फ 410 वर्ग किलोमीटर का. मर्सिडीज और पोर्शे जैसी कारों का राज्य बाडेन वुर्टेमबर्ग - बाडेनस वुर्टेमबर्ग और होहेनसोएलर्न - राज्यों को मिलाकर बना है. लेकिन दूसरी ओर 1996 में बर्लिन और ब्रांडेनबुर्ग को मिलाने की कोशिश विफल रही क्योंकि ब्रांडेनबुर्ग प्रांत के लोगों ने आर्थिक बोझ के डर से 'सिटी स्टेट' बर्लिन में मिलने से मना कर दिया.

जर्मनी में बड़े राज्यों के महत्व की पता उनकी आर्थिक क्षमता से भी चलता है. आंकड़ों को देखें तो प्रति व्यक्ति सकल उत्पादन के मामले में 'शहर राज्य' हैम्बर्ग सालाना 54 हजार यूरो के साथ सबसे आगे है जबकि सबसे बड़े क्षेत्रफल वाला बवेरिया 39 हजार यूरो के साथ तीसरे नंबर पर है. वहीं सबसे ज्यादा आबादी वाला नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया 624 अरब यूरो के साथ पहले नंबर पर है. जहां तक टैक्स से सबसे ज्यादा आमदनी का सवाल है तो बवेरिया सबसे ऊपर है और पिछले साल गरीब राज्यों की मदद के लिए 5.5 अरब का योगदान दिया है. कोई आश्चर्य नहीं कि बवेरिया और बाडेन वुर्टेमबुर्ग में ही लोगों की औसत मासिक आय सबसे ज्यादा है- राष्ट्रीय औसत आय से 8 प्रतिशत ज्यादा.

छोटे और बड़े राज्यों के अपने फायदे हैं. लेकिन राज्यों का गठन यदि नागरिकों को सुविधा प्रदान करने के अलावा प्रशासनिक खर्च कम रखने के सिद्धांत पर हो तो बड़े राज्य होना फायदेमंद हैं. राज्य के लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पंचायतों और जिला परिषदों को और लोकतांत्रिक और साथ ही आर्थिक और सामाजिक प्रशासन के लिए सक्षम भी बनाया जाना चाहिए ताकि वहां ज्यादा से ज्यादा उद्योग कायम हो सकें, रोजगार बन सकें और सरकार की झोली में ज्यादा कर आ सके. जर्मनी की सफलता के पीछे यही मंत्र है, खर्च कम कर उत्पादकता बढ़ाना. और वह सिर्फ उद्योग में ही नहीं बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया में भी.

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