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दुनिया

क्या आईएस से लड़ पाएंगे अरब देश

अरब लीग के विदेश मंत्रियों ने इस्लामिक स्टेट और अन्य चरमपंथी संगठनों के खिलाफ आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठाने और इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर उठाए जा रहे कदमों में अपना सहयोग देने का फैसला किया है.

काहिरा में अरब लीग के विदेश मंत्रियों ने इराक और अन्य जगहों पर इन चरमपंथी संगठनों की गतिविधियों से पैदा हुए खतरे पर विचार विर्मश के बाद यह फैसला लिया. अरब लीग प्रमुख ने सदस्य देशों से अपील की कि वह इस्लामिक स्टेट का सैन्य और राजनीतिक रूप से मुकाबला करें. हथियार उठाने की अपील ऐसे मौके पर आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा इन आतंकियों को रोकने के लिए अपनी योजना अमेरिकी सांसदों और जनता के सामने पेश करने वाले हैं. अरब लीग में 22 सदस्य हैं, यह ओबामा के अंतरराष्ट्रीय गठबंधन को तैयार करने के प्रयास को पूरे मध्य पूर्व में महत्वपूर्ण सहायता दे सकता है. इस्लामिक स्टेट ने इराक और सीरिया के बड़े इलाकों पर कब्जा कर लिया है. लोगों में खौफ और अपना राज कायम करने के लिए उसने सामूहिक हत्याओं और सिर कलम जैसी घटनाओं को अंजाम दिया है.

पहले से ही नाटो ने इन आतंकियों से मुकाबला करने की सहमति दे दी है. अरब लीग के प्रमुख नबील अल अरबी ने कहा कि अरब देशों को स्पष्ट और दृढ़ निर्णय के साथ कैंसर जैसे आतंकवादी समूहों से टक्कर की जरूरत है. अरब लीग में मिस्र, सऊदी अरब, जॉर्डन, लेबनान, कतर, संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं.

मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा कांग्रेस के नेताओं से मुलाकात करने वाले हैं उसके बाद वे युद्ध से थकी अमेरिकी जनता के सामने अपनी योजना पेश करेंगे. 11 सितंबर की पूर्व संध्या पर ओबामा अमेरिकी जनता के सामने जिहादियों से लड़ने की योजना के बारे में अधिक जानकारी दे सकते हैं.

एनबीसी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में ओबामा ने कहा, "मैं चाहता हूं कि अमेरिकी जनता खतरे के अंदाजे के बारे में समझे और कि हम उससे किस तरह से निपटना चाह रहे हैं. उन्हें विश्वास होना चाहिए कि हम इससे निपट पाएंगे."

रविवार को अमेरिका ने इराक के अनबर प्रांत में इस्लामिक स्टेट के जिहादियों पर हमला किया. इस इलाके में आतंकवादी लंबे समय से चुनौती दे रहे थे. अमेरिकी सेना का कहना है कि आईएस का कमांड पोस्ट, कई गाड़ियां जिनमें दो एंटीक्राफ्ट हथियार वाली गाड़ियां भी थीं, हमले में तबाह हो गईं.

यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अरब लीग आईएस के खिलाफ पश्चिमी अभियान के लिए किस तरह के कदम उठाएगा. और इस कदम के लिए आम सहमति तक पहुंच पाना अरब दुनिया के नेताओं के लिए जटिल हो सकता है.

लेकिन समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस द्वारा हासिल प्रस्ताव के मसौदे से पता चलता है कि उसमें क्षेत्र में कार्य कर रहे आतंकवादी समूहों की निंदा की गई है इसके साथ ही सदस्य देशों से आतंकवाद से लड़ने के लिए जानकारी और कानूनी विशेषज्ञता साझा करने को कहा गया है. प्रस्ताव में आतंकवादियों को फिरौती देने से बचने को भी कहा गया है. अल अरबी ने खुद माना है कि पूर्व में अरब लीग के सदस्य देश स्थानीय सशस्त्र समूहों से लड़ने में एक दूसरे की मदद नहीं कर पाए हैं. अक्सर ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि देशों के बीच मतभेद हैं और डर इस बात का होता है कि कहीं दूसरे के मामले में दखल देने का आरोप न लग जाए.

उन्होंने आईएस को इराक और उसके पड़ोसी देश के अस्तित्व के लिए खतरा बताया और कहा, "अरब दुनिया को हिलाने वाली चुनौतियों में से यह एक उदाहरण है और अफसोस है कि अरब दुनिया इसका सामना नहीं कर पा रही है."

एए/एएम (एपी, एएफपी)

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