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दुनिया

कौन बनेंगे जर्मन राष्ट्रपति

चुनाव के पहले दौर में सत्तारूढ़ मोर्चे के क्रिस्टियान वुल्फ़ को अपने सदस्यों से 44 कम यानी 600 मत मिले. एसपीडी और ग्रीन के योआखिम गाउक को 499 मत मिले, जो उनकी ताकत से 39 अधिक है. वामपंथी योखिमसेन को 126 मत मिले हैं.

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गाउक, योखिमसेन और वुल्फ़

भारत की तरह जर्मनी में भी राष्ट्रपति के पास कार्यकारी सत्ता नहीं होती है, वे औपचारिक राष्ट्रध्यक्ष होते हैं. उनकी सत्ता नैतिक सत्ता होती है. लेकिन राष्ट्रपति के चुनाव के नतीजे से स्पष्ट हो जाता है कि देश की संघीय व प्रादेशिक विधायिकाओं में किस दल की कितनी ताकत है और देश में किस खेमे का राजनीतिक बर्चस्व है. इस लिहाज से कल, बुधवार को होने वाला राष्ट्रपति का चुनाव काफ़ी महत्वपूर्ण हो गया है.

राष्ट्रपति के चुनाव के लिए विशेष रूप से गठित संघीय सभा उनका चुनाव करती है. इसमें 1244 सदस्य होते हैं - राष्ट्रीय संसद बुंडेसटाग के 622 सदस्य, तथा आबादी के हिसाब से प्रतिनिधित्व के आधार पर प्रादेशिक विधायिकाओं द्वारा चुने गए बाक़ी 622 सदस्य. पहले या दूसरे दौर में जीत के लिए 623 सदस्यों का समर्थन ज़रूरी है, जबकि तीसरे दौर में सबसे अधिक मत पाने वाले को चुन लिया जाता है.

संघीय सभा में सत्तारूढ़ मोर्चे के 644 सदस्य हैं, लेकिन एफ़डीपी के कुछ सदस्यों ने कहा है कि वे विपक्ष के योआखिम गाउक का समर्थन करेंगे. एसपीडी और ग्रीन दल के पास 462 सदस्य हैं. इसके अलावा श्लेसविग होलश्टाइन प्रदेश के स्थानीय दल एसएसडब्लू के एक व बवेरिया के स्वतंत्र मतदाता समूह के दस सदस्य गाउक का समर्थन कर रहे हैं. वामपंथी पार्टी की ओर से लुक योखिमसेन उम्मीदवार हैं. संघीय सभा में वामपंथियों के 124 मत हैं. पार्टी के कुछ सदस्यों ने कहा है कि वे तीसरे दौर में गाउक का समर्थन करेंगे, लेकिन पार्टी नेतृत्व उनके ख़िलाफ़ है. जर्मनी में सांसदों के लिए ह्विप जारी नहीं किया जा सकता.

राष्ट्रपति पद के दोनो मुख्य उम्मीदवार जर्मनी में इस समय की राजनीतिक संस्कृति की दो अलग-अलग धाराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. 70 वर्षीय योआखिम गाउक पूर्वी जर्मनी में पादरी थे और नागरिक अधिकार संघर्षकर्ता के रूप में वे दलीय राजनीति से ऊपर उठकर समाज की अंतरात्मा के प्रतिनिधित्व की कोशिश करते रहे हैं. देश के एकीकरण के बाद पूर्वी जर्मन गुप्तचर संस्था के दस्तावेज़ों के रखरखाव व शोधकर्ताओं और पीड़ितों के लिए उन्हें मुहैया कराने की ख़ातिर जो दफ़्तर बनाया गया है, योआखिम गाउक उसके पहले प्रधान थे. इस दफ़्तर का नाम ही गाउक दफ़्तर हो चुका था. वे दो टुक तरीके से अपनी बात कहते हैं व एक साहसी, उदारवादी सार्वजनिक व्यक्तित्व के रूप में पार्टियों की सीमाओं से परे लोकप्रिय हैं.

दूसरी ओर, 51 वर्षीय क्रिस्टियान वुल्फ़ पेशेवर राजनीतिज्ञ हैं और नई पीढ़ी की उन्मुक्तता के प्रतीक हैं. वे लोअर सैक्सनी प्रांत के सफल मुख्यमंत्री हैं. महिलाओं व आप्रवासियों को राजनीति में प्रोत्साहन देने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. इन दोनों में से जिस किसी भी उम्मीदवार की जीत हो, वह राष्ट्रपति पद की गरिमा के अनुरूप ही होगा.

रिपोर्टः उज्ज्वल भट्टाचार्य

संपादनः राम यादव

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