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विज्ञान

कौन चलाएगा इंटरनेट

इंटरनेट में वेबसाइटों के एड्रेस का संचालन करता है अमेरिकी टेलिकॉम दफ्तर एनटीआईए. लेकिन अब अमेरिका इस जिम्मेदारी को और नहीं संभालना चाहता. तो भविष्य में इंटरनेट कौन संभालेगा...

अंतरराष्ट्रीय समुदाय चाहता है कि अमेरिका इंटरनेट पर निगरानी रखने और उसके संचालन की जिम्मेदारी किसी और को सौंप दे. अब तक अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय के टेलिकॉम विभाग एनटीआईए ने इंटरनेट डोमेन बांटने की जिम्मेदारी संभाली है. इंटरनेट डोमेन या एड्रेस संचालन का मतलब है सुनिश्चित करना कि ईमेल सही जगह पर यानी सही आईपी अड्रेस पर पहुंचे या फेसबुक या ट्विटर पर लोग आपस में बात कर सकें.

अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट नाम और अंक नियुक्ति कॉर्पोरेशन आईकैन की सिंगापुर में हो रही बैठक में देश अब विचार कर रहे हैं कि एनटीआईए की जगह कौन ले सकता है. 2003 में जेनेवा और 2005 में ट्यूनिस में होने वाली आईकैन बैठकों में सदस्य देशों ने सोचा था कि इंटरनेट संचालन की जिम्मेदारी अमेरिका के बजाय किसी और के हाथों में होनी चाहिए, लेकिन इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए. अमेरिकी सरकार इंटरनेट निगरानी को अपने हाथों से जाने नहीं देना चाहती थी.

हैरान करने वाला फैसला

15 मार्च 2014 को अमेरिकी सरकार ने एलान किया कि वह डोमेन पर अपना नियंत्रण खत्म कर रही है. अमेरिकी खुफिया एजेंसी एनएसए की करतूतों के बाद माना जा रहा है कि ओबामा प्रशासन इस कदम के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक संदेश देना चाहते थे.

एनटीआईए के प्रमुख लॉरेंस स्ट्रिकलिंग ने इस बारे में एलान करते हुए कहा, "भविष्य में इंटरनेट एड्रेस संचालन के मैनेजमेंट के लिए आईकैन को दूसरा मॉडल तैयार करना होगा और यह काम 2015 तक करना जरूरी है."

एड्रेस प्रबंधन के बिना इंटरनेट नहीं

अंतरराष्ट्रीय टेलिकॉम संघ आईटीयू कई सालों से कह रहा है कि इंटरनेट की जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र के द्वारा बनाये गए किसी संगठन को सौंपी जानी चाहिए. आईटीयू खुद संयुक्त राष्ट्र की एक अहम एजेंसी है लेकिन इस हफ्ते सिंगापुर में हो रही आईकैन बैठक में पता चला है कि आईटीयू को शायद ही इंटरनेट की जिम्मेदारी मिलेगी. इंटरनेट कार्यकर्ता पॉल फेलिंगर का कहना है कि अमेरिकी सरकार नहीं चाहती कि इंटरनेट का प्रबंधन कोई ऐसा संघ करे जो कई देशों में काम करता हो.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि अब सिंगापुर में कोशिश कर रहे हैं कि वह एक व्यापक संघ बनाए जो इंटरनेट संचालित कर सके. एक तरीका है कि अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट संचालन फोरम, जो हर साल आयोजित होता है, उसे एक तरह की अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट संसद बना दी जाए. आईकैन इस संसद पर नजर रखेगा.

अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट संसद

इस तरह के मंच की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र से ही हो सकती है. 2005 में विश्व सूचना सम्मेलन के दौरान संयुक्त राष्ट्र ने इस तरह के मंच का सुझाव दिया था लेकिन क्या यह सचमुच काम करेगा, इंटरनेट विशेषज्ञों को इस बात पर शक है. उन्हें लगता है कि 2015 में होने वाले विश्व संचार शिखर सम्मेलन में कई देश इसका विरोध कर सकते हैं.

रूस और चीन के साथ साथ तुर्की और कई विकासशील चाहते हैं कि इंटरनेट को राष्ट्रीय सरकारों के नियंत्रण में लाया जाए. कुछ चाहते हैं कि आईपी एड्रेस के लिए भी नियम लागू किए जाएं. ऐसा अगर हो जाता है तो हर देश या यूरोपीय संघ अपने प्रशासित क्षेत्र में इंटरनेट के लिए एड्रेस मैनेजमेंट सिस्टम बना सकता है.

अगर ऐसा हो जाए तो सरकारें तय कर सकती हैं कि क्या उनके नागरिक ट्विटर पर जा सकते हैं और अगर हां, तो क्या ट्विटर ही दिखेगा या कोई दूसरी सरकारी वेबसाइट. विशेषज्ञों को डर है कि इससे अभिव्यक्ति और सूचना की जानकारी पर असर पड़ेगा.

निगरानी करना आसान

इंटरनेट कार्यकर्ता फेलिंगर कहते हैं कि अगर ऐसा हुआ तो, "हमें तो यह भी नहीं पता चलेगा कि अगर हम ट्विटर पर जाना चाहें तो क्या हमें असली ट्विटर वेबसाइट ही दिखेगी." लेकिन लगभग सारे देश चाहते हैं कि उन्हें इंटरनेट पर और नियंत्रण करने का अधिकार मिले. कार्यकर्ता फेलिंगर कहते हैं कि अगर इंटरनेट को वैश्विक प्रणाली बनाकर रखना है तो कुछ ऐसे नियम बनाने होंगे ताकि राष्ट्र इंटरनेट पर अपना अधिकार भी रखें लेकिन साथ ही उसकी वैश्विकता को आंच नहीं आए.

आईकैन की सिंगापुर बैठक में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों से लेकर वाणिज्य दूत, तकनीकी विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता इंटरनेट के भविष्य पर बहस कर रहे हैं. लेकिन इंटरनेट के संचालन पर किसका नियंत्रण होगा, इसका जवाब मिलने में अभी वक्त लगेगा.

रिपोर्टः पेटर वेल्शेरिंग/एमजी

संपादनः आभा मोंढे

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