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ताना बाना

कोल इंडिया लाएगी देश का सबसे बड़ा आईपीओ

भारत की सार्वजनिक कंपनी कोल इंडिया ने देश का सबसे बड़ा आईपीओ लाने का एलान किया है. कंपनी को उम्मीद है कि शेयर बेच कर वह 3.5 अरब डॉलर जमा कर लेगी.

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आईपीओ यानी इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग के ज़रिए कंपनियां बाज़ार में अपने शेयर बेचती हैं और छोटे बड़े निवेशकों को कंपनी के मुनाफे में हिस्सा लेने का मौका देती हैं. कोल इंडिया के आईपीओ के बारे में एक्सेक्यूशन नोबेल निवेश बैंक के निदेशक प्रमोद गुब्बी ने कहा कि कोल इंडिया ने देश में कोयला उत्पादन पर कब्जा लिया है और उसके पास खनन के मामले में तीन दशकों से ज्यादा का तजुर्बा है. आईपीओ में शेयर के दाम भी अच्छे हैं.

इस साल मार्च में कंपनी का मुनाफा 96 अरब रुपए रहा जबकि कुल मिलाकर कंपनी ने 500 अरब से ज़्यादा रुपए कमाए. 2011 तक कंपनी का मुनाफा 14 प्रतिशत बढ़ सकता है. यानी हर ग्राहक के पास अपने निवेश के बारे में सुरक्षित महसूस करने के ठोस कारण हैं. पिछले हफ्ते बैंक ऑफ अमेरिका-मेरिल लिंच के काकू नखाटे ने कहा कि कंपनी के शेयर एक बहुत मज़बूत संपत्ति है और लोग इससे जुड़ना चाहते हैं.

भारत का केंद्रीय रिजर्व बैंक भी आईपीओ को ध्यान से देख रहा है. ऐसा मानना है कि आईपीओ खरीदने कई विदेशी कंपनियां आएंगी जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था में डॉलर की बढ़ोतरी होगी. भारतीय रुपया इस वक्त काफी ऊंचाई पर है और इस निवेश से रुपए को और मज़बूत किया जा सकेगा. हालांकि निर्यात संबंधित व्यापारी रुपए की बढ़ती कीमतों और उससे निर्यात में गिरावट को लेकर चिंतित हैं.

इससे पहले भारत का सबसे बड़ा आईपीओ 2008 में अनिल अंबानी के रिलायंस पावर ने किया था. कोल इंडिया दुनिया की सबसे बड़ी कोयला कंपनी है. भारत का 80 प्रतिशत कोल कोल इंडिया के खानों से आता है. आठ राज्यों के 471 खानों से कोयले का उत्पादन होता है. साथ ही कोल इंडिया के पास विश्व के सबसे ज्यादा कोयले के खान हैं. चीन की सरकारी शिन्हुआ एनर्जी और अमेरिकी निजी कंपनी पीबॉडी एनर्जी विश्व के कोयला उत्पादन में दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं.

कोल इंडिया आर्थिक तौर पर तो अच्छा कर रही है लेकिन पर्यावरण संबंधी मामलों को सुलझाना कंपनी के लिए अहम हो गया है. साथ ही भारत में ऊर्जा की मांग बढ़ गई है लेकिन माओवादी समस्या और आदिवासी इलाकों में खनन की अनुमति न मिलने से कंपनी को कोयले का उत्पादन बढ़ाने में परेशानियां आ रही हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/एमजी

संपादनः एन रंजन