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मनोरंजन

कोलकाता फिल्मोत्सव की फीकी शुरूआत

सोलहवां कोलकाता फिल्मोत्सव विवादों के बीच शुरू हुआ. बजट में कटौती की वजह से फिल्मोत्सव में कम फिल्में शामिल हुई जिससे इसकी चमक फीकी पड़ी. फिल्मोत्सव में रवींद्रनाथ टैगोर की कहानियों पर बनी फिल्मों को प्रमुखता मिली है.

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विवाद की वजह जाने माने फिल्मकार सत्यजित रे की ओर से कोई 35 साल पहले बनाई गई एक डॉक्यूमेंट्री सिक्किम है. फिल्मोत्सव के दौरान हर रोज इसका प्रदर्शन किया जाएगा. सरकार ने तीन दशक पहले इस पर पाबंदी लगा दी थी.

अब पहली बार गुरुवार को इस समारोह में यह डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएगी. इस बीच, सिक्किम के एक संगठन ने इस डॉक्यूमेंट्री का सर्वाधिकार अपने पास होने का दावा कर इस पर विवाद खड़ा कर दिया है. लेकिन कोलकाता में आयोजकों ने कहा है कि इसका प्रदर्शन हर दिन किया जाएगा.

Kolkata Filmfestival 2010

17 नवंबर तक चलने वाले इस फिल्मोत्सव में रवींद्रनाथ टैगोर की कहानियों पर बनी फिल्मों को प्रमुखता दी गई है. इसकी वजह यह है कि इस साल कविगुरू की 150वीं जयंती मनाई जा रही है. इस फिल्मोत्सव का उद्घाटन फिल्मकार रामानंद सेनगुप्ता ने किया. इस साल समारोह में 38 देशों की कुल 127 फिल्में दिखाई जाएंगी. समारोह की शुरूआत कोस्टारिका के फिल्मकार हल्दा हिडाल्गो के निर्देशन में बनी ऑफ लव एंड अदर डेमंस से हुई.

उधर सिक्किम के एक संगठन द आर्ट एंड कल्चर ट्रस्ट ऑफ सिक्किम ने सत्यजित रे की डॉक्यूमेंट्री पर अपना दावा जताते हुए इसका प्रदर्शन रोकने की मांग की है.

उसने कहा है कि इसके लिए वह अदालत का दरवाजा भी खटखटाने के लिए तैयार है. ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी उग्येन चोपेल ने कहा है कि हमारे पास उस फिल्म का कॉपीराइट है. पश्चिम बंगाल सरकार हमारी अनुमति के बिना उसका प्रदर्शन नहीं कर सकती.

राज्य सरकार ने इस बार इस महोत्सव का बजट घटा कर लगभग आधा कर दिया है. इसके चलते फिल्मों की तादाद भी कम हो गई है. मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य, जो इस फिल्मोत्सव के मुख्य संरक्षक भी हैं, कहते हैं कि फिल्मों की तादाद को गुणवत्ता का पैमाना नहीं बनाना चाहिए. इस समारोह पर सरकार 50 लाख रुपए खर्च करेगी.

पहले यह बजट एक करोड़ से ज्यादा का होता था. इस फिल्मोत्सव के मौके पर रवींद्रनाथ टैगोर और जापानी फिल्मकार अकिरा कुरोसावा के चित्रों की एक प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगही. कुरोसावा की आठ फिल्में इस समारोह में दिखाई जाएंगी.

रिपोर्ट: प्रभाकर, कोलकाता

संपादन: एस गौड़

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