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मनोरंजन

कोलकाता फिल्मोत्सव का बदलता स्वरूप

कोलकाता फिल्मोत्सव का स्वरूप बदल रहा है. पहले यह एक क्षेत्रीय उत्सव की तर्ज पर ही आयोजित किया जाता था, लेकिन अब यह राष्ट्रीय स्वरूप लेता जा रहा है. इस साल इसके नाम में अंतरराष्ट्रीय शब्द भी जुड़ गया है.

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने रविवार की शाम एक भव्य समारोह में कोलकाता फिल्मोत्सव का उद्घाटन किया. रंगारंग उद्घाटन समारोह में अमिताभ के अलावा पश्चिम बंगाल के ब्रांड अंबेसर शाहरुख खान, जया भादुड़ी और कमल हासन के अलावा बांग्ला फिल्मोद्योग के कई जाने-माने नाम मौजूद थे. हालांकि मृणाल सेन समेत बंगाल के वामपंथी रुझान वाले कई फिल्मकार इससे दूर रहे. ममता बनर्जी ने दो साल पहले सत्ता संभालने के बाद इस उत्सव का उद्घाटन स्थल पारंपरिक नंदन सांस्कृतिक परिसर की बजाय नेताजी इंडोर स्टेडियम कर दिया था. लगातार तीसरे साल भी वहीं इस समारोह का उद्घाटन किया गया.

भावुक अमिताभ

उद्घाटन समारोह के दौरान अमिताभ कोलकाता में बिताए अपने पुराने दिनों को याद कर भावुक हो गए. उन्होंने कोलकाता में कुछ साल तक नौकरी की थी. उनकी फिल्म याराना के एक शूटिंग भी इसी स्टेडियम में ही हुई थी. इस मौके पर अमिताभ ने कहा, कोलकाता से मेरा काफी पुराना व गहरा नाता है. बांग्ला साहित्य कई दशकों से बांग्ला भाषा और भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया है. भाषण के बीच-बीच में उन्होंने बांग्ला बोलकर स्टेडियम में मौजूद लोगों की खूब तालियां बटोरीं. मूक सिनेमा से आज के दौर की फिल्मों तक में बंगाल के योगदान का जिक्र करते हुए अमिताभ बच्चन ने कहा, "उत्कृष्ट फिल्म निर्माण में बंगाल का अहम योगदान है. बांग्ला भाषा के लेखकों, निर्देशकों और कवियों के विचार से भारतीय सिनेमा समृद्ध हुआ है."

अमिताभ ने विमल रॉय से लेकर सत्यजीत रे, ऋत्विक घटक, बासु चटर्जी, मृणाल सेन, ऋषिकेश मुखर्जी, तपन सिन्हा और ऋतुपर्णो घोष तक के योगदान का विस्तार से उल्लेख किया. अमिताभ ने कम उम्र में ही फिल्मकार ऋतुपर्णो घोष के निधन पर दुख जताते हुए भारतीय सिनेमा में उनके योगदान की सराहना की. उन्होंने कहा कि बंगाल सहित पूरे देश में नये फिल्मकार और निर्देशक उभर रहे हैं जिनके नये विचार और सोच से भारतीय सिनेमा समृद्ध होगा. उन्होंने कहा कि बांग्ला साहित्यिक कृति पर देवदास पर बांग्ला व हिंदी में कई बार फिल्में बनी और सफल रही. उन्होंने बांग्ला में अपने भाषण की शुरूआत करते हुए कहा, "अनेक पुरोनो दिने कोथा मोने पोड़े जाए. अपनादेर जमाई, अपनादेर मेय व आमार बोउ जया के निए एसेच्छी. बड़ोदेर आर्शिवाद व छोटेदेर भालोभासा पावा जोन्ने (पुराने दिनों की कई बातें याद आती हैं. मैं आपकी बेटी और अपनी पत्नी जया को लेकर आपका आशीर्वाद लेने यहां आया हूं)."

ब्रांड अंबेसडर शाहरूख खान ने कहा कि उनको बंगाल से लगाव है और अगली बार वह जया बच्चन से बांग्ला बढ़िया बांग्ला सीख कर आएंगे . दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुरस्टार कमल हासन ने कहा कि कोलकाता दिल से लोगों को अपनी ओर खींचता है. बांग्ला सिनेमा का यह आकर्षण है. यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि सत्तर के दशक में कमल हासन ने एक बांग्ला फिल्म कविता में काम किया था. इस मौके पर उन्होंने इसका जिक्र करते हुए कहा कि बांग्ला गीत उनका पहला प्यार है. कमल ने उस फिल्म के एक गीत की कुछ पंक्तियां भी गुनगुनाईं. उन्होंने कहा कि उस फिल्म में काम करते समय तो वह बांग्ला नहीं सीख सके थे. लेकिन बंगालियों के बारे में उनको काफी-कुछ जानने को मिला था. उन्होंने कहा कि, मैं आपके बीच का ही एक व्यक्ति हूं और बांग्ला गीत और कविता के प्रति मेरे दिल में बेहद लगाव है."

63 देशों की 189 फिल्में

हफ्ते भर चलने वाले फिल्मोत्सव के दौरान 63 देशों की कुल 189 फिल्में दिखाई जाएंगी. इसकी शुरूआत दिवंगत फिल्मकार ऋतुपर्णो घोष की फिल्म सनग्लास से हुई. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि अगले साल से इस उत्सव में प्रतियोगिता भी होगी. इसके लिए देश-विदेश की फिल्मों को न्योता भेजा जाएगा. इस साल पहली बार इस फिल्मोत्व के नाम में अंतरराष्ट्रीय शब्द जोड़ा गया है. इसलिए फिल्मोत्सव के लोगो में सत्यजीत रे, ऋत्विक और ऋतुपर्णो के साथ स्पीलबर्ग और कुरोसावा की तस्वीरे भी लगीं हैं. उद्घाटन समारोह में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के लिए एक दीर्घा बनाई गई थी. लेकिन वहां इक्का-दुक्का लोग ही नजर आ रहे थे. मंच पर भी किसी विदेशी फिल्मकार को नहीं बुलाया गया था. साफ है कि महज क्षेत्रीयता का तमगा उतार फेंकने के मकसद से ही फिल्मोत्सव के साथ अंतरराष्ट्रीय शब्द जोड़ा गया है.

रिपोर्टः प्रभाकर, कोलकाता

संपादनः एन रंजन

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