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ताना बाना

कोरियाई तनाव के बीच चीनी पीएम का दौरा

उत्तर और दक्षिण कोरिया जहां तलवार भांजने और शब्दबांण चलाने में व्यस्त हैं, तो इस नाज़ुक मौके़ पर चीन के प्रधानमंत्री वेन चियापाओ तीन दिनों की यात्रा पर दक्षिण कोरिया में हैं. चीन को उत्तर कोरिया सरपरस्त समझा जाता है.

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सौल पहुंचने पर चियापाओ का शानदार स्वागत

सारे संसार के कान खड़े हैं कि चीनी प्रधानमंत्री क्या कहते हैं. चीन इसी साल 26 मार्च को दक्षिण कोरियाई पनडुब्बी को डुबा दिए जाने वाले प्रकरण और उसमें उत्तर कोरिया की किसी भूमिका के बारे में कुछ कहने से अब तक बचता रहा है.

चीनी प्रधानमंत्री वेन चियापाओ शुक्रवार को सौल में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली म्युंग-बाक से जब मिले, तो स्वाभाविक है ली ने सबसे पहले उन के सामने अपना पक्ष रखा. राष्ट्रपति ली के प्रवक्ता ने बाद में पत्रकारों को बताया कि अपने जवाब में चीनी प्रधानमंत्री ने कहा, "चीन ऐसे हर कार्य का विरोध करता है और उसकी निंदा करता है, जिससे कोरिया प्रायद्वीप की शांति और स्थिरता भंग होती है." प्रवक्ता के अनुसार, चीनी प्रधानमंत्री का कहना था कि जिस किसी ने भी दक्षिण कोरियाई पनडुब्बी को डुबाया हो, चीन उसका बचाव नहीं करेगा.

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने चीनी प्रधानमंत्री को कहते उद्धृत किया, "चीन सरकार इस मामले की अंतरराष्ट्रीय जांच के परिणामों का बारीक़ी से अध्ययन करेगी और संबंद्ध देशों की प्रतिक्रिया पर भी गंभीरता से ध्यान देगी. इस के बाद ही वह इस मामले पर कोई वस्तुपरक और उचित निर्णय लेगी. चीन किसी का बचाव नहीं करेगा."

दूसरे शब्दों में, चीनी प्रधानमंत्री ने साफ़ साफ़ कुछ नहीं कहा. फ़िलहाल उन्होंने बात को टालने और समय निकालने की ही कोशिश की है. इसका भी कोई भरोसा नहीं है कि पनडुब्बी प्रकरण की अंतरराष्ट्रीय जांच रिपोर्ट का चीन भी वही अर्थ निकालेगा, जो दक्षिण कोरिया और उसके मित्र अमेरिका जैसे देश निकाल रहे हैं. वही अर्थ निकालना होता, तो चीन पहले ही यह काम कर लेता, अब तक टालमटोल न करता.

दूसरी तरफ़, चीन दक्षिण कोरिया के साथ एक दूरगामी साझेदारी बनाने का भी इच्छुक है, इसलिए वह दक्षिण कोरिया को पूरी तरह निराश भी नहीं करना चाहेगा. अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन हाल ही में दो दिनों तक पेइचिंग में थीं. उन के साथ चल रहे एक अमेरिकी राजनयिक को यह कहते भी बताया गया कि चीन धीरे धीरे दक्षिण कोरिया के निकट आना चाहता है और हो सकता है कि चीनी प्रधानमंत्री की वर्तमान सौल यात्रा इसकी शुरुआत बने.

इस कूटनीतिक गहमागहमी के बीच दक्षिण कोरिया के दस युद्धपोतों ने शुक्रवार को पीत सागर में शत्रु पक्ष की पनडुब्बियों को डुबो देने के युद्धकौशल का अभ्यास किया. इसको ज़रूरी बताते हुए दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री ने एक जापानी चैनल से कहा, " कोई नहीं जानता कि उत्तर कोरिया कब क्या कर बैठेगा. इसलिए हमें हर चीज़ के लिए तैयार रहना होगा."

दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया साथ व्यापार कम कर देने और सीमा के पार रहने वालों के लिए प्रचारात्मक रेडियो और टेलीविज़न प्रसारण फिर से शुरू करने की घोषणा की है. अमेरिका और जापान की मदद से वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने और उत्तर कोरिया के विरुद्ध नए प्रतिबंध लगवाने की भी कोशिश कर रहा है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ राम यादव

संपादनः ए कुमार