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दुनिया

कोताही का नतीजा भुगतता यूरोप

अमेरिका के आगाह करने के बावजूद यूरोप के कुछ देशों ने संदिग्ध आतंकवादियों को नहीं दबोचा. ब्रसेल्स हमले के आरोपियों ने भी इसी अनदेखी का फायदा उठाया.

अमेरिका के दोस्त खासकर यूरोपीय देश अमेरिकी मदद को नजरअंदाज कर रहे हैं. अमेरिकी संघीय जांच एजेंसी एफबीआई के टेरेरिस्ट स्क्रीनिंग सेंटर के प्रमुख ने यह दावा किया है. निदेशक क्रिस्टोफर पिहोटा ने अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन से बातचीत में कहा, "यह चिंता की बात है कि हमारे साझेदार हमारे पूरे डाटा का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं."

पिहोटा के मुताबिक, "हम उन्हें टूल्स देते हैं. हम उनसे सहयोग करते हैं और मुझे चिंता इस वजह से होती है कि वे हवाई सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, बॉर्डर स्क्रीनिंग, वीजा और यात्रा के मामले में इन साधनों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं."

अमेरिका में संदिग्ध आतंकवादियों का एक केंद्रीय डाटाबेस है. वहीं यूरोपीय संघ में हर देश ने अपनी निगरानी सूची बना रखी है. पिहोटा के मुताबिक पेरिस और ब्रसेल्स में हमला करने वाले कुछ आतंकियों के बारे में अमेरिका के पास जानकारी मौजूद थी और यह सूचना यूरोपीय सहयोगियों को दी गई.

यूरोपीय देश बेल्जियम और फ्रांस इस वक्त आतंकवाद की चपेट में है. 2015 में दोनों देशों में बड़े आतंकी हमले हुए. बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स के एयरपोर्ट और मेट्रो स्टेशन को मार्च 2016 में निशाना बनाया गया. ब्रसेल्स एयरपोर्ट पर आत्मघाती धमाका करने वाला एक आतंकी इब्राहिम अल बकरावी पहले से ही अमेरिका की संदिग्ध आतंकवादी लिस्ट में था. वह नंबवर 2015 के पेरिस हमलों में भी शामिल था. ब्रसेल्स के मेट्रो स्टेशन में खुद को उड़ाने वाले बकरावी के छोटे भाई खालिद को भी पेरिस हमले के बाद एफबीआई ने संदिग्धों की सूची में डाला था. और इनसे जुड़ी सूचनाएं अमेरिका ने नीदरलैंड्स को दीं.

अल बकरावी को जून 2015 में तुर्की ने सीरियाई सीमा से गिरफ्तार किया. जुलाई में तुर्की ने उसे नीदरलैंड्स प्रत्यर्पित किया. अब आरोप लग रहे हैं कि यूरोपीय जांच एजेंसियों की ढिलाई के चलते अल बकरावी बाहर निकला.

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