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मनोरंजन

कोई न माने फिर भी राजा

यूं तो ब्रिटेन की एलिज़ाबेथ द्वितीय ऑस्ट्रेलिया की भी सम्राज्ञी हैं, लेकिन वहां इसके अलावा भी बहुतेरे सम्राट और प्रिंस हैं. ज़ाहिर है कि वे सिर्फ़ कहने भर को सम्राट हैं. उनके झंडे हैं, लेकिन साम्राज्य नहीं.

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गद्दी को ख़तरा?

पानी बरस रहा है. सम्राट जार्ज द्वितीय को यह बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा है. वे बाहर की ओर देखते हैं, अपने फ्लैट की बालकनी से, भुनभुनाते हुए कुछ ऐसा कह बैठते हैं, जो किसी राजा को नहीं कहना चाहिए. लेकिन क्या फ़र्क पड़ता है, यह उनका अपना साम्राज्य है.

सम्राट जॉर्ज का अपना साम्राज्य है, अटलांटियम. नीले, पीले और नारंगी रंग का उसका झंडा है, उसका अपना तमगा है, जिसे सम्राट अपने सीने पर टांगते हैं. यहां तक कि उनकी एक राजधानी है, ऑरोरा, एक बंजर देहाती ज़मीन, जहां सम्राट जार्ज और उनके चंद मातहत मूर्ति और स्मारक बनाते हैं.

उनकी उम्र है 43, आई डी कार्ड के मुताबिक नाम है जॉर्ज क्रुइकशांक. वे कहते हैं, " जब मैं 15 साल का था, तो पिताजी ने मुझसे कहा कि अगर तुम्हें दुनिया के रिवाज पसंद न हो, फिर उसे बदलने के लिए कुछ करो. शायद वे कहना चाहते थे कि किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल हो जाओ. लेकिन मैंने दूसरा ही रास्ता चुना, दो चचेरे भाइयों के साथ अटलांटियम बनाना शुरू कर दिया.

और इस साम्राज्य का ध्येय है कि विश्वव्यापी राज्य बनाना, जिसकी न सीमाएं हों, और न ही नागरिकों की कोई नस्ल.

एक अनोखा मामला? कतई नहीं, आस्ट्रेलिया में कम से कम 30 ऐसे राज्य और साम्राज्य हैं. कोई कवियों का, कोई कलाकारों का, और कम से कम एक समलैंगिक लोगों का. सबके अपने-अपने नियम हैं, अलग-अलग आकार है, कहीं अपनी मुद्रा है तो कहीं नहीं. इनकी वजह से ऑस्ट्रेलिया को अजीबोगरीब साम्राज्यों का एक संयुक्त राष्ट्र कहा जा सकता है.

मैककुआरी विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका जूडी लैट्टास का कहना है कि यह ऑस्ट्रेलिया के समाज में छिपे विद्रोह की भावना की अभिव्यक्ति है. वे कहती हैं कि यह आज की दुनिया में विरोध जताने के तरीकों में से एक है. इनसे पता चलता है कि साम्राज्य और राष्ट्र कैसे बनते हैं. उनकी राय में ऑस्ट्रेलिया में सत्ता को दुत्कारने की एक लंबी परंपरा है.

इस साल लैट्टास की पहल पर अप्रैल के महीने में पहली बार इन माइक्रो राष्ट्रों का एक शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया. सिडनी के बाहर एक द्वीप में एक छोटे से हॉल में यह सम्मेलन हुआ और लगभग 50 लोगों ने इसमें भाग लिया.

ऑस्ट्रेलिया के अलावा ब्रिटेन, यूरोप के दूसरे देशों, और अमेरिका में भी ऐसे खुद बन गए सम्राट और उनके साम्राज्य हैं. लेकिन उनकी संख्या ऑस्ट्रेलिया के मुक़ाबले काफ़ी कम हैं. वाई साम्राज्य के प्रिंस पॉल कहते हैं कि अपनी प्रभुसत्ता बहुत प्यारी है. वे कहते हैं, " अपने आपको हम ज़रूरत से ज़्यादा तो नहीं समझते हैं, लेकिन कहीं मन के अंदर नाइंसाफ़ी से चिढ़ है. "

रिपोर्ट: एजेंसियां/उज्ज्वल भट्टाचार्य

संपादन: आभा एम