″कॉमिक्स में बहुत कुछ है″ | फीडबैक | DW | 30.01.2015
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फीडबैक

"कॉमिक्स में बहुत कुछ है"

डीडब्ल्यू हिंदी के कई पाठकों ने लिख भेजें है अपने संदेश और सुझाव. आइए देखें कुछ चुनिंदा प्रतिक्रियाएं...

मैं आपके बेहद पुराने पाठकों में से एक हूं. आपके द्वारा नियमित रूप से भेजे जाने वाली कार्यक्रम संबंधी मेल को नियमित रूप से देखता और पढ़ता हूं. रिपोर्टें बेहद ज्ञानवर्धक होती हैं. आपकी वेबसाइट भी देश विदेश के प्रमुख जानकारियों से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाती है. इस बार निवेदन कुछ नई सामग्रियों के लिए कर रहा हूं. खुशी होगी यदि हमेशा की तरह स्नेह को यूं ही बरकरार रखते हुए कुछ सामग्री भिजवाने की कृपा करें. बेहद खुशी होगी. एक बार फिर आपके तमाम सहयोगों के लिए आपको ढेरों धन्यवाद. राम कुमार नीरज

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हमारी 'ब्लैक होल की दुनिया' पर दी गई जानकारी मनोज कोटनाला को बेहद पसंद आई. उन्होंने फेसबुक पर लिखा, "यहीं आकर विज्ञान और धर्म एक जगह मिलते हैं. हर धर्म ग्रन्थ में इन चीजों का उल्लेख है लेकिन पहले इन्हीं चीजों को नकारा गया और अब इन्हीं को मान रहे हैं. यही तो दुनिया की विडम्बना है."

राकेश बाम्भनिया कोली ने कहा, "ब्लैक होल के प्वाइन्ट होराइजन पर गुरुत्वाकर्षण इतना बढ़ जाता है कि समय भी रुक जाता है. हमारी गैलेक्सी के केंद्र में भी एक मैसिव ब्लैक होल है."

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कॉमिक्स पढ़ना बच्चों को रचनात्मक बनाता है, इसी विषय पर अशोक कुमार सक्सेना लिखते हैं, "कॉमिक्सों में बहुत कुछ है. ढेर सारा ज्ञान छिपा हुआ है इनमें. बस महत्वपूर्ण बात यह है कि आप कौन सी कॉमिक्स पढ़ रहे हैं? मैं विदेशी कॉमिक्सों की बात कर रहा हूं. फैंटम, मैन्ड्रेक, गार्थ, स्पाइडर मैन, फ्लैशगार्डन, बैटमैन और भी कई अन्य. इतने साल बीत गये, इन सारे कॉमिक्सों के किरदार मुझे अभी भी याद हैं. बचपन से लेकर अभी तक मैं इनके साथ ही बड़ा हुआ हूं."

मनोज कोटनाला लिखते हैं "चाचा चौधरी और साबू का पात्र भी रोचक है. कार्टूनिस्ट प्राण ने भारत को यह पात्र दिए थे. उन्होंने गार्थ, फैंटम और मैन्ड्रेक जैसे विदेशी कार्टूनों को देश के हिसाब से नए कार्टून चरित्र दिए."

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'दुनिया का ताज' फोटो गैलरी को हमारी वेबसाइट पर देख कर बहुत से पाठकों ने अपने विचार लिख भेजे हैं:

- प्यार से प्यारा दुनिया में कुछ नहीं. एक पवित्र प्यार की सुन्दर निशानी और याद ताजमहल को मेरा सलाम. ताजमहल किसी मंदिर से कम नहीं है हम सब को गर्वान्वित होना चाहिए कि ताजमहल हमारे देश में है...सिद्धार्थ सति

- यह सब सही है इस पर पूरी डॉक्यूमेंट्री भी लिखी हुई है जिसमें इस के मंदिर होने की बात साफ है. ताज के 14 कमरे जो अब बंद है, उसमें अभी भी मंदिर है. पर इंदिरा गांधी ने बैन लगा दिया था इस डॉक्युमेंट्री पर, जिससे इंडिया में फिर इस बात को लेकर हिन्दू मुस्लिम की लड़ाई न हो जो अभी अयोध्या में हो रही है. फिर वो ताज पर भी होता और वैसे भी इस ताज की वजह से शाहजहां ने इंडिया की अर्थव्यवस्था बिगाड़ दी थी और मुमताज तो उसकी 14वीं बीवी थी जो अपनी 14वीं डिलीवरी में मरी थी...साक्षी राजपूत

- यह ताजमहल नहीं शिव जी का मंदिर तेजोमहल है...सृष्टि पांडे

- यह सारी मंदिर वंदिर वाली बात तो बकवास है. पर सच कहूं तो मुझे ताजमहल कुछ खास नहीं लगता. वह अच्छी तरह मेनटेन नहीं किया जाता, सारा वातावरण ही सुन्दर नहीं है और आगरा तो बहुत ही गंदा और बदसूरत शहर है...हेर फोरवेर्ट्स

- शाहजहां की बीबी मुमताज की मौत 14वें बच्चे को पैदा करते समय बुरहानपुर मध्यप्रदेश में सन् 1631 हुई और उसको वहीं ताप्ती नदी के किनारे दफनाया गया था, जगह का नाम है "अहुखाना'. तो फिर आगरा में मुमताज का मकबरा कैसे बन गया? अब या तो मध्यप्रदेश का मकबरा फर्जी है या फिर आगरा का?...अश्विनी सिंह

- बहुत दर्द दिया मजदूरों को शाहजहां ने. मैं ताजमहल से नफरत करता हूं... प्रीत ढिल्लों

- यह तो बताया नहीं की मजदूरों से कितने धक्के से काम करवाया था. एक प्यार के पीछे हजारों लोगों के प्यार को खत्म किया, क्या यह प्यार है?...अर्शदीप सिंह

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