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ताना बाना

कॉमरेड डूच के मामले में फैसला सोमवार को

सोमवार को कंबोडिया का युद्ध अपराध प्राधिकरण कांग केक लेएव के मामले में फैसला सुनाएगी. कांग केक को दुनिया कॉमरेड डूच के नाम से जानती है और आरोप है कि इस शख्स ने एक एक कर 20,000 लोगों के कत्ल का आदेश दिया.

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कॉमरेड डूच की सुनवाई

कॉमरेड डूच खमेर रूज के शासन के वक्त कंबोडिया में सबसे बड़ी कत्लगाह बने एस 21 के मुखिया थे. खमेर रूज 1975 से 1979 के बीच कंबोडिया में रहे कम्युनिस्ट पार्टी के शासन को कहा जाता है. आरोप हैं कि उस दौरान लाखों लोगों की हत्या की गई.

एस 21 ऐसी कत्लगाहों में शामिल था. यहां ऐसे करीब 20,000 लोगों को लाया गया, जिन पर देशद्रोह का शक था. उनमें से एक दर्जन ही घर वापस लौट पाए. बताते हैं कि एस 21 में लाए गए लोगों को तब तक टॉर्चर किया जाता था, जब तक वे मान नहीं लेते कि उन्होंने देशद्रोह किया. उसके बाद उनकी हत्या कर दी जाती थी. इन लोगों के कत्ल का आदेश कॉमरेड डूच के दस्तखतों से ही जाता. और उस आदेश में लिखा होता – कुचल डालो.

Rote Khmer Kambodscha Flash-Galerie

77 गवाहियों के बाद पिछले साल नवंबर में डूच के मामले की सुनवाई पूरी हुई. इस सुनवाई के दौरान थिएरी सेंग भी मौजूद रहीं. वह कहती हैं, “यह सुनवाई तो एक टेस्ट रन थी. इससे लोगों को खमेर रूज के शासन की सच्चाइयां पता चलीं. डूच को खुद आकर बोलते हुए देखना भी काफी दिलचस्प अनुभव था. लेकिन असली सुनवाई तो दूसरे मामले से शुरू होगी.”

दूसरा मामला अगले साल शुरू हो सकता है. इसमें खमेर रूज के उन सीनियर नेताओं में मामलों की सुनवाई होगी, जो अभी जिंदा हैं.

डूच की सुनवाई के दौरान कुछ नाटकीय मोड़ भी आए. खासकर जब मामले की सुनवाई अपने आखिरी दौर में थी तो डूच अपने वकील पर ही गुस्सा गए और उन्होंने उसे निकाल दिया.

Folterzentrum der Roten Khmer in Phnom Penh

कइयों के खिलाफ सुनवाई

यह सुनवाई एक मिला जुला ट्रिब्यूनल कर रहा है. इसमें कंबोडिया के लोग भी हैं और संयुक्त राष्ट्र के भी. यानी इसके हर विभाग में दोनों जगहों के लोग शामिल हैं. कॉमरेड डूच के बचाव पैनल में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों वकील हैं.

डूच ने अपने अंतरराष्ट्रीय वकील फ्रैंकोएज रोक्स को हटा दिया. रोक्स चाहते थे कि डूच अपनी जिम्मेदारी मानें, माफी मांगें और रहम के लिए अपील करें. माना जा रहा था कि कम से कम सज़ा पाने का यही एक तरीका डूच के पास बचा है. नौ महीनों तक मामला इसी रणनीति से आगे बढ़ा, लेकिन आखिरी तीन दिनों में सब बदल गया. तब डूच के कंबोडियाई वकील ने अदालत में खड़े होकर कह दिया कि उनके मुवक्किल को आजाद कर दिया जाए क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में नहीं आते और वह तो बस आदेशों का पालन कर रहे थे.

रोक्स ने बाद में कहा कि कानूनी तौर पर यह बेवकूफी थी. लेकिन डूच को यही सही लगा. इस सारे ड्रामे के बाद लोग इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि डूच को क्या सज़ा मिलती है. अगर उन्हें 25 साल की कैद भी मिलती है तो 88 साल के डूच के लिए इसका मतलब होगा कि बाकी जिंदगी जेल में गुजरेगी.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ए जमाल

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