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खेल

कॉमनवेल्थ में 50 अरब रुपये के घपले की शिकायत

बेनामी लेनदेन, ठेका देने में जान बूझ कर देरी, बढ़ा चढ़ा कर कीमतें और बिना जरूरत के उपकरणों की खरीदारी कर कॉमनवेल्थ आयोजकों ने 50 अरब रूपये का घपला किया. भारत की निगरानी संस्था सीवीसी के पास आई शिकायतों में ये बात कही है.

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भारतीय सतर्कता आयोग सीवीसी के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को ये जानकारी दी. नाम जाहिर न करने की शर्त पर इस अधिकारी ने बताया, "कुल मिला कर 40-50 अरब रूपये के घपले की शिकायत आई है, आयोग अलग अलग विभागों से मिलने वाली रिपोर्ट के इंतजार में है. सारे विभागों से रिपोर्ट आने के बाद ही घपले की रकम का सही सही ब्यौरा दिया जा सकेगा." सीवीसी अधिकारी ने ये भी बताया कि सभी मंत्रालयों तक शिकातयें भेज दी गई हैं और अब उनकी रिपोर्ट का इंतजार है.

Indien Commonwealth Games 2010

निशाने पर कलमाड़ी

3-14 अक्टूबर के बीच दिल्ली में हुआ 19वें कॉमनवेल्थ गेम्स अब तक के इतिहास में सबसे खर्चीला आयोजन था. शुरुआत में इस आयोजन का बजट 2 अरब डॉलर का था जो देखते ही देखते तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ गया. इतना ज्यादा खर्च और तैयारी में हुई देरी के लिए खेल आयोजन समिति की कड़ी निंदा हो रही है. आयोजन समिति के अध्यक्ष और सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के सदस्य सुरेश कलमाड़ी खास तौर से सबके निशाने पर हैं.

सीवीसी कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़ी खरीदारी और निर्माण की 22 परियोजनाओं की जांच कर रही है. इनमें राज्य सरकार की एजेंसियां भी शामिल हैं. यहां तक कि भारत का मौसम विभाग भी सीवीसी की जांच के दायरे में है जिसने कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए एक प्रोजेक्ट पूरा किया था. सीवीसी के साथ ही महालेखापरीक्षक और प्रधानमंत्री का नियुक्त किया एक स्वतंत्र पैनल भी इन गड़बड़ियों की जांच कर रहा है. खेल से जुड़े सभी पक्षों ने जांच का तो स्वागत किया है लेकिन एक दूसरे पर आरोप लगाने का खेल भी जारी है.

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने आयोजन समिति पर आरोप लगाते हुए कहा कि समिति के भीतर ही सारी गड़बड़ियां हैं. जवाब में सुरेश कलमाड़ी ने भी बयान दे दिया कि मुख्यमंत्री अपने विभागों में भ्रष्टाचार देखें.

इसी साल अगस्त में सीवीसी ने अपनी रिपोर्ट में निर्माण के कामों में गड़बड़ी की शिकायत की थी. सीवीसी ने निर्माण में घटिया सामान के इस्तेमाल और ठेके देने में गड़बडझाले का आरोप लगाया था.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः एमजी

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