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वर्ल्ड कप

कॉमनवेल्थ गेम्स: सेना करे मुफ्त काम!

नित नई कहानियों की कॉमनवेल्थ की किताब में अब एक नया किस्सा जुड़ गया है. आयोजन समिति की चाहती है कि कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए सेना मुफ्त में अपनी सेवाएं उपलब्ध कराए. सेना को 11 करोड़ रुपये का भुगतान लटका.

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कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए मंत्रियों के समूह के अध्यक्ष और शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी ने रक्षा मंत्री एके एंटनी को एक खत लिखा है. इस पत्र में उन्होंने गुजारिश की है कि एंटनी सुनिश्चित करें कि खेलों के दौरान सेना की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं के लिए सेना आयोजन समिति से पैसा न वसूले. रेड्डी के इस खत से रक्षा मंत्रालय हैरान है क्योंकि आयोजन समिति के साथ उसका समझौता हुआ था जिसके तहत सैन्य अधिकारियों को मासिक भत्ते दिया जाना तय हुआ.

Indische Armee bei einer Übung

सुरक्षा भी चोखी चाहिए और पैसे भी नहीं देना....

यह भत्ता उन अधिकारियों की मिलना है जिनकी खेलों के दौरान ड्यूटी लगेगी. सेना की ओर से कई अधिकारियों और सैनिकों को कॉमनवेल्थ खेलों से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंप भी दी गई हैं और इसका खर्च सेना ही उठा रही है. अब इन सेवाओं का भुगतान न किए जाने का अनुरोध हो रहा है. इसके अलावा सेना समारोह में हिस्सा लेने वाले कलाकारों के रहने की सुविधा उपलब्ध भी करा रही है. कुल मिलाकर खर्च करीब 11 करोड़ रुपये बैठता है.

मीडिया में रेड्डी के खत के हवाले से कहा गया है कि वह सेना की ओर से पैसा मांगे जाने से खुश नहीं है. रेड्डी ने कथित रूप से कहा है कि सेना ने हर बड़े खेल आयोजन के लिए मदद की है लेकिन अब वह चाहती है कि आयोजन समिति उसके अधिकारियों को भुगतान करे और इस बात का सामने आना दुखदायी है.

Das Maskottchen der Commonwealth Games 2010

एक और कहानी

एंटनी को लिखे खत में रेड्डी ने अनुरोध किया है कि खेल आयोजन में जिन सैन्य अधिकारियों की ड्यूटी लगी है उनके भत्ते के लिए सेना को मांग नहीं करनी चाहिए. उदघाटन समारोह में हिस्सा लेने वाले कलाकार भी सेना की ओर से उपलब्ध कराई गई जगहों पर रूकेंगे. रेड्डी का आग्रह है कि इन सुविधाओं के लिए भी सेना को पैसा नहीं वसूलना चाहिए.

वहीं जयपाल रेड्डी ने यह तो माना है कि उन्होंने एके एंटनी को खत लिखा है लेकिन उन्हें यह याद नहीं है कि इस खत में किस बात का जिक्र है. "मैंने रक्षा मंत्री को खत लिखकर कुछ बातों के लिए पैसा न वसूलने के लिए कहा है. लेकिन मुझे अच्छी तरह याद नहीं है कि वो क्या बातें हैं." उधर सुरेश कलमाड़ी का कहना है कि सेना से मदद के लिए कहा गया और मदद का आश्वासन मिला है. इस सहयोग से वह खुश हैं.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: आभा एम

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