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जर्मन चुनाव

कॉमनवेल्थ गेम्स का बैटन भारत पहुंचा

भारत में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में सिर्फ 100 दिन बचे हैं और इसका ऐतिहासिक क्वीन्स बैटन रिले वाघा के रास्ते भारत पहुंच चुका है. अब यह देश के अलग अलग हिस्सों में ले जाया जाएगा.

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शेरा है कॉमनवेल्थ गेम्स का मैस्कट

भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी ने अमृतसर के पास वाघा सीमा पर पाकिस्तानी ओलंपिक एसोसिएशन के प्रेसीडेंट लेफ्टिनेंट जनरल सैयद आरिफ हसन से यह बैटन लिया. इस मौके पर कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन के प्रमुख माइक फनल भी मौजूद थे.

क्वीन्स रिले बैटन को ब्रिटेन की महारानी क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय ने पिछले साल अक्तूबर में लंदन में भारतीय राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की मौजूदगी में लांच किया था. इसके बाद अलग अलग देशों में घूमता हुआ यह बैटन भारत पहुंच चुका है. बैटन ने 71 देशों में 1,90,000 किलोमीटर की दूरी तय की. भारत में 3 से 14 अक्तूबर के बीच कॉमनवेल्थ गेम्स होने हैं.

Baustelle in Indien Flash-Galerie

कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियां अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं. लेकिन कमेटी का दावा है कि सब वक्त पर हो जाएगा.

सुरेश कलमाडी ने कहा, "यह भारत और पाकिस्तान के लिए एक बड़ा दिन है. पाकिस्तान की मदद से ही भारत को इन खेलों की मेजबानी मिली. यह दिखाता है कि अगर हम खेलों पर ज्यादा ध्यान दें तो हमारे रिश्ते पाकिस्तान के साथ बेहतर हो सकते हैं."

कलमाडी ने एक बार फिर कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियां बिलकुल ठीक हैं. उन्होंने कहा, "मैं श्री फेनेल और श्री हूपर का शुक्रगुजार हूं, जो हमें समर्थन दे रहे हैं. अभी खेलों में 100 दिन बचे हैं. मैं आपको बताना चाहता हूं कि हर चीज तय जगह पर है, बुनियादी ढांचा भी ठीक है. सब कुछ ठीक है."

पाकिस्तान ओलंपिक एसोसिएशन के प्रेसीडेंट ने कहा कि खेलों से भारत और पाकिस्तान की तल्खियां दूर हो सकती हैं. लेफ्टिनेंट जनरल हसन ने कहा, "यह हमारे लिए ऐतिहासिक मौका है. इससे पहले की दूरियां मिट सकती हैं."

इस मौके पर पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और कुछ और गणमान्य लोग मौजूद थे.

रिपोर्टः पीटीआई/ए जमाल

संपादनः प्रिया एसेलबॉर्न

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