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वर्ल्ड कप

'कॉमनवेल्थ खेलों के कुछ इवेंट्स खतरे में'

नई दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों के कुछ इवेंट्स खतरे में पड़ सकते हैं क्योंकि भारत ने अब तक कॉमनवेल्थ खेल संघ को इस बात के लिए संतुष्ट नहीं किया है कि खेलों के लिए बनाई गई जगह सुरक्षित हैं.

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कॉमनवेल्थ खेल संघ के मुखिया माइक हूपर ने कहा है कि आयोजकों ने चीजों को बहुत हल्के में लिया है और अब भी काफी काम होना बाकी है. हूपर ने कहा, "हमें आयोजन समिति ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि कॉमनवेल्थ विलेज या बाकी जगहों का ढांचा पूरी तरह सुरक्षित है. इस वजह से एक दो खेलों पर खतरा हो सकता है."

71 देशों के खिलाड़ी 16 सितंबर से भारत पहुंचने लगेंगे और उन्हें कॉमनवेल्थ विलेज में ठहराया जाना है. वे लोग स्टेडियम में अभ्यास भी करेंगे. हूपर ने कहा है कि अब वह वक्त के खिलाफ लड़ रहे हैं. उनके मुताबिक, "अगर आयोजन समिति सुरक्षा सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं करा पाती है तो काफी मुश्किल होगी. पिछले महीने सीवीसी की रिपोर्ट में कहा गया कि निर्माण कार्य में घटिया चीजों का इस्तेमाल हुआ. इससे हमारी चिंता बढ़ी है."

हूपर ने भारत सरकार पर भी गुस्सा निकाला. उन्होंने कहा कि सरकारी एजेंसियों ने उन्हें सुरक्षा सर्टिफिकेट देने के बारे में बहुत से वादे किए हैं, लेकिन अब तक एक भी वादा पूरा नहीं हुआ है. उन्होंने कहा, "अगर हमें भवन के पूरा हो जाने का सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा तो हम उस भवन को नहीं लेंगे. लोग 16 सितंबर से पहुंचने लगेंगे और अगर सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा, तो हम उन्हें वहां नहीं ठहराएंगे."

जुलाई महीने में केंद्रीय सतर्कता आयोग ने 15 जगहों की जांच के बाद कहा था कि इनके निर्माण में घटिया सामान का इस्तेमाल हुआ है और ऐसे सबूत मिले हैं कि रेग्युलेशन के लिए झूठे सर्टिफिकेट बनाए गए.

हूपर ने उम्मीद जताई कि आयोजन समिति के मुखिया सुरेश कलमाड़ी से हुई बातचीत के मुताबिक अगले हफ्ते तक सारे सर्टिफिकेट मिल जाएंगे. लेकिन उन्होंने कहा कि अगर बारिश की वजह से बिल्डिंग को कोई नुकसान पहुंचता है तो उसे दोबारा सुरक्षा सर्टिफिकेट लेना होगा. हालांकि उन्होंने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया कि खेलों की तारीखों में फेरबदल किया जाएगा. उन्होंने कहा, "तारीख बदलने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता. इस बारे में हायतौबा मचाने के बजाय हमें चीजों को सही करने पर ध्यान लगाना चाहिए."

उन्होंने कहा कि आखिर में खिलाड़ी इस बात का फैसला करेंगे कि खेल सफल रहे या नहीं.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ए कुमार

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