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दुनिया

कैसे स्मार्ट बनेंगे ये 20 भारतीय शहर

अरबों रुपए खर्च कर पहले चरण में 20 भारतीय शहरों का कायाकल्प किया जाना है. इन शहरों में बिजली और पानी की अबाध सप्लाई, स्वच्छता और सार्वजनिक परिवहन की ऐसी व्यवस्था की जानी है, जिसकी तुलना यूरोपीय शहरों से हो सकेगी.

करीब 7.5 अरब डॉलर की लागत से भारत के चुनिंदा शहरों को नया कलेवर दिया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार ने पहले चरण में जिन 20 शहरों को चुना है, उनमें से 13 विश्व स्वास्थ्य संगठन की विश्व के सबसे प्रदूषित 20 शहरों की सूची में आते हैं. मोदी सरकार ने 2022 तक भारत में ऐसे 100 स्मार्ट शहर बनाने का लक्ष्य रखा है. स्मार्ट शहरों में बिजली, पानी, परिवहन और स्वच्छता जैसी आधारभूत सुविधाओं के अलावा इंटरनेट संपर्क और ई-गवर्नेंस भी स्थापित किया जाएगा. इस सारी प्रक्रिया में इन शहरों में निवेश बढ़ाने और लोगों के लिए लाखों नौकरियां पैदा करने की भी योजना है.

हालांकि शुरु होने के साथ ही विपक्ष इस योजना पर संदेह जताने लगा है. केंद्र सरकार को अब तक भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन करवाने में सफलता नहीं मिल पाई है. सरकार का मानना है कि इससे तमाम नई योजनाओं और निर्माण कार्य के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जाना आसान होता. इस अवरोध को दूर किए बिना अगले 5 साल में स्मार्ट शहरों में इतने बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे कर पाना कठिन होगा.

शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने जिन शहरों के नाम की घोषणा की, उनमें दक्षिण भारत का चेन्नई भी शामिल है. मेट्रो शहर होने के बावजूद पिछले साल की बाढ़ में चेन्नई में भारी तबाही होने के कारण इसे भी चुना गया है. इसके अलावा राजधानी दिल्ली के भी कुछ हिस्से इस योजना में शामिल हैं. दुनिया भर के पर्यटकों के लोकप्रिय ठिकाने राजस्थान के जयपुर, उदयपुर और पूर्वी भारत में भुवनेश्वर शहर में नए स्मार्ट प्रोजेक्ट चलाए जाएंगे. इस चरण में ट्रैफिक सिस्टम से लेकर कचरे के निपटारे तक की बेहतर व्यवस्था से इन 20 शहरों में रहने वाले करीब साढ़े तीन करोड़ लोगों के जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ने की उम्मीद है. वहीं इस चरण में उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से एक भी शहर के ना चुने जाने और मध्य प्रदेश जैसे बीजेपी प्रशासित राज्य से तीन शहरों के चुने जाने को लेकर विपक्षी दल आलोचना कर रहे हैं.

अगले पांच सालों में कुल 100 स्मार्ट शहरों के निर्माण का लक्ष्य पूरा करने में सरकार 15 अरब डॉलर की राशि लगाएगी. इन 100 शहरों में रहने वाले करीब 40 करोड़ शहरी लोगों के जीवन पर इसका सीधा असर पड़ने की उम्मीद है. गांव ही नहीं देश के कई शहरों में आज भी साफ पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं. कई शहरों में लाखों लोग झुग्गी झोपड़ियों का जाल बिछा है. इन पहले 20 शहरों का चुनाव करने के लिए स्मार्ट सिटी चैलेंज प्रतियोगिताएं कराई गई थीं. शहरी विकास मंत्री नायडू ने बताया कि दुनिया में ऐसा पहली बार हुआ है जब शहरों में निवेश का फैसला उनके बीच किसी प्रतियोगिता के माध्यम से किया गया. विकास की इस प्रतिस्पर्धा में कोई भी पीछे नहीं रहना चाहता.

आरआर/एमजे (रॉयटर्स,पीटीआई)

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