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विज्ञान

कैसे बनी यूरोपीय नस्ल

पहले सोचा जाता था कि यूरोपीय प्राचीन मानव की दो बड़ी नस्लों से उत्पन्न हुए हैं. लेकिन अब इस सिद्धांत को बदला जा रहा है. अब तीन नस्लों की थ्योरी सामने आ रही है.

एक जेनेटिक विश्लेषण से पता चला है कि यूरोपीय मूल के लोग तीन बड़ी प्राचीन मानवीय नस्लों से आए हैं. अब तक माना जा रहा था कि यूरोपीय उन प्राचीन किसानों से आए हैं जो करीब 7,500 साल पहले मध्य पूर्व से यूरोप आकर बसे थे. वह यूरोप में शिकारी कबीलों के साथ मिल जुल के रहने लगे.

लेकिन एकडीएनए विश्लेषण से पता चला है कि किसानों के समूहों में यूरेशिया के लोग भी शामिल थे. नेचर पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट से पता चलता है कि पूर्वी यूरेशिया के लोग, जो रूस और उत्तरी एशिया में रहते थे, यूरोप आकर बसे. फिर इनके कुछ वंशज दक्षिण अमेरिका भी पहुंचे.

कुछ और शोधों में पता चला है कि उत्तरी यूरेशिया के लोग 15,000 साल पहले अलास्का पहुंचे. उस वक्त बेरिंग जलमार्ग और उत्तर अमेरिका में अलास्का के बीच एक बर्फ का पुल था.

नए शोध की प्रमुखता हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के डेविड राइश के साथ जर्मनी के ट्यूबिंगेन विश्वविद्यालय के योहानेस क्राउसे कर रहे हैं. वह कहते हैं कि यूरोप में इन तीन प्राचीन नस्लों के लोग हैं.

100 वैज्ञानिकों की टीम ने प्राचीन काल के बहुत सारे सबूतों का अध्ययन किया. स्वीडन, लक्जमबर्ग और जर्मनी में मिले नौ पुराने कंकालों से डीएनए निकाले गए. यह उन आठ शिकारियों के कंकाल थे जो 8,000 साल पहले धरती पर रहा करते थे. इनमें से एक 7,000 साल पहले धरती में घूमा करता था.

राइश बताते हैं, "शिकारी- संचयी समाज वाले काल और खेती वाले काल के बीच मनुष्य में एक बड़ा जेनेटिक बदलाव आया जो मध्यपूर्व से यूरोप आने का सबूत देता है." इन लोगों के जिनोम को फिर दुनिया भर के 2,300 लोगों के जीनों से मिलाया गया.

हार्वर्ड टीम में शामिल योसिफ लासारीदिस ने कहा, "प्राचीन यूरेशियाई धरोहर पूरे यूरोप में मानव धरोहर का सबसे छोटा अंश है, 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं. लेकिन हमने जिस भी यूरोपीय समूह का अध्ययन किया है, कॉकेसियन या मध्यपूर्व समूहों का भी, उनमें भी हमने यही पाया."

उत्तरी यूरोप में रह रहे लोगों में शिकारी संचयी जीन ज्यादा है. लिथुवानिया के लोगों में तो यह 50 प्रतिशत है जबकि दक्षिण यूरोप में खेती बाड़ी वाले ज्यादा जीन देखे गए हैं.

एमजी/एजेए (एएफपी)

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