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दुनिया

कैसे कैसे शोध करते हैं युवा रिसर्चर

आंखों से व्हील चेयर का कंट्रोल, प्राकृतिक कच्चे माल से प्रिंटर इंक या पुराने मेटल में सोने की खोज? ये उन प्रविष्टियों में शामिल है जो इस साल युवा रिसर्चरों की राष्ट्रीय प्रतियोगिता यूगेंड फोर्श्ट में हिस्सा ले रहे हैं.

जर्मनी के लुडिविषहाफेन शहर में आज से युवा रिसर्चरों की प्रतियोगिता यूगेंड फोर्श्ट का फाइनल राउंड हो रहा है, जिसमें 195 लड़के और लड़कियां अपनी 113 शोध परियोजनाओं के साथ भाग ले रहे हैं. स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक होने वाली युवा रिसर्चरों की प्रतियोगिता का इस साल यह अंतिम दौर है. प्रतियोगिता के संचालकों ने देश में युवा वैज्ञानिकों की क्वालिटी की सराहना की है लेकिन साथ ही उन्हें और प्रोत्साहन देने की मांग की है. प्रतियोगिता की शुरुआत से पहले युवा रिसर्चर फाउंडेशन के प्रमुख स्वेन बाशियो ने कहा, "हम अपनी तुलना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कर सकते हैं." दो हफ्ते पहले हुए अंतरराष्ट्रीय साइंस और इंजीनियरिंग फेयर में जर्मनी के प्रतियोगियों ने 17 पुरस्कार जीते हैं.

उन्होंने कहा कि युवा रिसर्चरों को अपनी रुचि पर अमल के लिए और केंद्रों की जरूरत है. यदि जर्मनी में कोई खेल या संगीत में दिलचस्पी लेता है और सक्रिय रूप से उसमें हिस्सा लेना चाहता है तो देश भर में संगठनों की कमी नहीं जहां उन्हें भागीदारी का मौका मिलता है, उनकी प्रतिभा को बढ़ावा दिया जाता है. बाशियो का कहना है, "प्राकृतिक विज्ञान के क्षेत्र में भारी कमी है." उन्होंने कहा कि जर्मनी में इस समय युवाओं में वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने के 30 केंद्र हैं जिन्हें संगठन, नगर परिषद या उद्यम चलाते हैं.

आज से जूरी के सदस्य 113 इंट्रीज का आकलन शुरू कर रहे हैं. विजेताओं की घोषणा शनिवार को होगी जब जर्मनी के राष्ट्रपति योआखिम गाउक भी उपस्थित रहेंगे और विजेताओं को पुरस्कार देंगे. यूगेंड फोर्श्ट के विजेताओं को इनाम में पुरस्कार राशि के अलावा ट्रिप और शोध संस्थानों में इंटर्नशिप का मौका भी दिया जाता है.

अमेरिका के पिट्सबर्ग में हुआ अंतरराष्ट्रीय साइंस और इंजीनियरिंग फेयर हाई स्कूल में पढ़ने वाले रिसर्चरों के काम को सम्मानित करता है. इस साल प्रतियोगिता में 70 देशों के 1700 युवाओं ने हिस्सा लिया था. जर्मनी के आर्ने हेंजेल को रसायन में पहला पुरस्कार मिला जबकि निकलास फाउथ ने एमहेडेड सिस्टम्स में पहला पुरस्कार पाया. विजेताओं में भारत के नौ किशोर शामिल हैं.

समुद्र को तेलनिकासी दुर्घटनाओं से बचाने के लिए एक सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए भारतीय मूल के 18 वर्षीय करण जेराठ को 50,000 डॉलर का युवा वैज्ञानिक पुरस्कार मिला. जेराठ को भारत अमेरिका साइंस फोरम की तरफ से एक सप्ताह की भारत यात्रा के लिए चुने गए पांच युवा वैज्ञानिकों में भी शामिल किया गया है. कोलकाता के 18 वर्षीय ओंकार सिंह गुजराल को इमेज प्रोसेसिंग अलगोरिद्म इंट्री के लिए पुरस्कृत किया गया. दूसरे भारतीय विजेता दिल्ली, कोझीकोडे, मंगलोर और पानीपत के थे.

एमजे/एसएफ (डीपीए)

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