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दुनिया

कैसे कहें कि 'हमले बंद करो'

पाकिस्तान में बीते पांच साल में हुए अमेरिकी ड्रोन हमलों में 2,160 चरमपंथी और 67 आम नागरिक मारे गए. इन सरकारी आंकड़ों के बाद खुद पाकिस्तान पर दबाव है कि वो किस आधार पर अमेरिका से ड्रोन हमले बंद करने के लिए कहे.

बुधवार को पाकिस्तान सरकार ने कहा कि अमेरिकी ड्रोन हमलों में मरने वालों में सिर्फ तीन फीसदी आम नागरिक हैं. ये जानकारी पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने अपनी संसद को दी. आंकड़ों के मुताबिक 2008 से अब तक हुए 317 ड्रोन हमलों में 2,160 चरमपंथी और 67 आम लोग मारे गए. रक्षा मंत्रालय ने ये भी कहा है कि 2012 में तो एक भी आम नागरिक ड्रोन हमलों में नहीं मारा गया.

वहीं ड्रोन हमलों में आम लोगों को मारे जाने की रिपोर्टों की जांच कर रही लंदन की एक संस्था ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म ने सरकार के इस दावे पर सवाल उठाया है. संस्था के मुताबिक 2012 में एक ड्रोन हमले में खेत में काम कर रही 68 साल की मामना बीबी की मौत हुई. ये हमला 24 अक्टूबर 2012 को उत्तरी वजीरिस्तान के कबायली इलाके में हुआ. मामना बीबी के पोते पोतियों ने ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म को बताया कि उनकी दादी पर मिसाइल से हमला हुआ.

छह जुलाई 2012 को भी एक ऐसे ही हमले की रिपोर्ट आई थी. रिपोर्ट के मुताबिक दिन भर के काम के बाद कुछ लोग एक टेंट में शाम का खाना खा रहे थे, तभी टेंट पर ड्रोन हमला हुआ. हमले में घायल हुए लोगों को बचाने की कोशिश करने वालों पर भी ड्रोन ने तुरंत अगला हमला किया. चश्मदीदों और परिवार वालों के मुताबिक हमले में 18 मजदूर मारे गए. मृतकों का आतंकवाद से कोई लेना देना नहीं था. पाकिस्तानी खुफिया विभाग ने मृतकों को संदिग्ध चरमपंथी करार दिया.

पाकिस्तान में अमेरिकी ड्रोन हमलों को लेकर काफी नाराजगी रहती है. बहुत से लोगों को लगता है कि अमेरिकी हमले देश की संप्रभुता पर आघात हैं और इनमें बड़ी संख्या में बेकसूर लोग मारे जा रहे हैं. पाकिस्तान की सरकार भी सार्वजनिक तौर पर हमलों की आलोचना करती है, हालांकि खबरों के मुताबिक वो खुद कई हमलों का गुप्त तरीके से समर्थन भी करती रही है.

Pakistan Proteste gegen Drohnenangriffe

पाकिस्तान में ड्रोन हमलों का विरोध

सरकारी आंकड़ों के सामने आने के बाद ये उलझन हो गई है कि ड्रोन हमलों में मारे जाने वाले आम नागरिकों के बारे में सही जानकारी को लेकर इतनी उलझन क्यों है. सरकारी आंकड़ों के आने के बाद यह भी साफ नहीं है कि पाकिस्तान ड्रोन हमलों का विरोध किस आधार पर कर सकता है. साफ है कि अगर इतनी ज्यादा संख्या में चरमपंथी मारे गए हैं तो हमले जायज ठहराये जा सकते हैं.

आम लोगों की मौत को लेकर जारी सरकारी आंकड़े और स्वतंत्र संगठनों के आंकड़ों में बड़ा फर्क है. ड्रोन हमलों की जांच कर रहे संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ से इस महीने पाकिस्तान सरकार ने कहा कि 2004 से अब तक के हमलों में कम से कम 400 आम नागरिक मारे गए हैं. ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म का दावा है कि 2008 से अब तक वहां ड्रोन हमलों में कम से कम 300 आम लोग मारे गए हैं. वॉशिंगटन की संस्था न्यू अमेरिका फाउंडेशन 185 लोगों की मौत का दावा करती है. ये अंदाजे मीडिया रिपोर्टों के आधार पर जुटाई गई जानकारी के आधार पर लगाए जाते हैं.

अमेरिका को लगता है कि उसकी खुफिया एजेंसी सीआईए के ड्रोन हमले पाकिस्तान में अल कायदा और तालिबान के खिलाफ कारगर हथियार साबित हो रहे हैं. हालांकि अमेरिकी अधिकारी ड्रोन हमलों के बारे में सार्वजनिक तौर पर बोलने से बचते हैं. वो दावा करते हैं कि स्वतंत्र संस्थान हमलों में मारे गए आम नागरिकों की संख्या बढ़ा चढ़ाकर पेश करते हैं.

ओएसजे/एमजे (एपी)

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