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मंथन

कैसे करें ईमेल की सुरक्षा

इंटरनेट में आप जो भी करते हैं उस सब पर हैकरों की नजर बनी रहती है. आपने कब किसे ईमेल किया.. यह भी वे जानते हैं.

कई बार एंटी वायरस सॉफ्टवेयर और फायरवॉल के बावजूद इनबॉक्स स्पैम से भर जाता है. इनमें हैकरों के भेजे ऐसे सॉफ्टवेयर हो सकते हैं जो पासवर्ड आपका सारा डाटा जमा कर लें. आपकी निजी जानकारी का इस्तेमाल अपने फायदे में करें.

जर्मनी के दक्षिणी शहर फ्राइबर्ग में बेफीन सॉल्यूशंस का मुख्यालय है, जो इलेक्ट्रॉनिक मेल को सुरक्षित बनाना चाहती है. इसके प्रमुख योजेफ हिमेल्सबाख कहते हैं, "जर्मनी के ब्लैक फॉरेस्ट की एक मंझौली कंपनी, जिसका एक दफ्तर चीन में था और अपना एक डेवलपमेंट सेंटर. इस कंपनी ने पाया कि उसके ईमेल चीन की शाखा तक नहीं पहुंचते थे. जब दफ्तर के अंदर सारी तकनीकी जांच में कुछ पता नहीं चला तो माना गया कि मेल कहीं बाहर गायब हो रहे हैं." फिर शक हुआ जासूसी का. और इस इलाके में कंपनियों को सबसे बड़ा डर यही है. दक्षिणी जर्मनी में बहुत सी छोटे और मझौले स्तर की कंपनियां और रिसर्च सेंटर हैं, जो जासूसी और चोरी से सुरक्षा चाहती हैं. कंपनी में 15 लोग काम करते हैं. सुरक्षित डाटा ट्रांसफर का सॉफ्टवेयर उनका सबसे अहम प्रोडक्ट है. इसे बस एक साधारण ईमेल प्रोग्राम के साथ जोड़ दिया जाता है. ईमेल को सीधे रिसीवर को भेजने के बदले उसे एटैचमेंट के साथ एंक्रिप्ट कर एक सर्वर पर रख दिया जाता है. रिसीवर को कोड भेज दिया जाता है जिसकी मदद से वह मेल को डिकोड करके डाउनलोड कर सकता है. अनजाने लोग अभी भी इस मेल को पढ़ सकते हैं लेकिन एन्क्रिप्टिंग की वजह से खत का मजमून उन्हें समझ नहीं आएगा. सॉफ्टवेयर डेवलपर रेने हार्टविष कहते हैं, "आप देख सकते हैं, यह पढ़ने के लायक है. अल्फान्यूमेरिकल कैरेक्टर और आप देख सकते हैं कि इसे समझा नहीं जा सकता. यह एक टेक्स्ट हो सकता है, या कुछ और."

अभी भी बहुत सी कंपनियां अपना डाटा बिना एन्क्रिप्ट के भेजती हैं. हालांकि वे फायरबॉल या एंटी वायरस प्रोग्राम पर आईटी सुरक्षा के लिए बहुत सारा पैसा खर्च करती हैं. हिमेल्सबाख के मुताबिक, "मैं समझता हूं कि बहुत सारी ऐसी कंपनियां जिनके पास अच्छा उत्पाद है, जिनकी बाजार में अच्छी जगह है, जो विश्व बाजार में प्रोडक्ट बेचना चाहती हैं, वे गंभीरता से सोचने लगी हैं कि ईमेल भेजते हुए वे अपने डाटा की सुरक्षा कैसे करें."

अगर उनके मेल प्रतिद्वंद्वियों के हाथों पड़ जाए, तो भारी नुकसान हो सकता है.

रिपोर्टः अनवर जमाल अशरफ

संपादनः महेश झा

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