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मनोरंजन

कैसी हो स्पेन की नई 'मिस जिप्सी'

स्पेन की पहली "मिस जिप्सी" बनने का अरमान लेकर दूर दूर से युवा लड़कियां मैड्रिड में इकट्ठी हुई हैं. यह कोई आम ब्यूटी कांटेस्ट नहीं बल्कि सदियों से उपेक्षित बंजारों के अल्पसंख्यक समुदाय को बेहतरी का मौका देने की पहल है.

लड़कियों का ड्रेस कोड है फूलों वाली शॉल और छोटे टॉप, वहीं लड़कों ने काला वेस्टकोट पहन बालों को जेल से संवारा है. ऐसे दर्जनों किशोर इस साल पहली बार स्पेन में हो रहे "मिस्टर एंड मिस जिप्सी" मुकाबले में हिस्सा लेना चाहते हैं. स्पेन में फ्लैमेंको गीतों और डांस की जिप्सी पारंपरा की एक बड़ी रोमांटिक छवि रही है. यहां के "खितानोस" (gitanos) कहलाने वाले एक प्राचीन समुदाय की हालत खराब है. आंकड़े बताते हैं कि समाज में यह समुदाय काफी पिछड़ा हुआ और उपेक्षित रहा है. यह यूरोप में रोमा बंजारा समुदाय का हिस्सा हैं. इस ब्यूटी कांटेस्ट के माध्यम से इस समुदाय के कुछ लोगों को जीवन में कुछ बनने की राह सुझाई जा रही है. हिस्सा ले रहे युवाओं के परिवार वाले कहते हैं कि ऐसा कोई मौका उनकी पूरी पीढ़ी में किसी को नहीं मिला.

आत्मनिर्भरता के लिए

मैड्रिड के एक होटल में ऑडिशन के लिए जुटे प्रतियोगियों की तस्वीरें ली जा रही हैं और आगे बढ़ने पर आयोजक उनके नाम, पढ़ाई लिखाई, रुचियों और जीवन के लक्ष्य के बारे में बात करते हैं. आयोजक कहते हैं कि वे जिप्सी औरतों को "और ज्यादा आत्मनिर्भर" बनाना चाहते हैं. नॉर्दर्न फ्लैंमेंको असोसिएशन की मारिया खिमेनेज बताती हैं, "एक जिप्सी महिला के लिए हमेशा लक्ष्य होता है कि 14, 15 की उम्र में ही शादी हो जाए और जल्दी से बच्चे भी." खिमेनेज इसे बदलते हुए देखना चाहती हैं, "मैं चाहती हूं कि जिप्सी महिलाएं पढ़ें, लिखें और आत्मनिर्भर बनें. वे अपने पति पर निर्भर ना रहें कि वो उसे 10 यूरो दिया करे ताकि महिला अपना पेट भर सके."

सिर्फ खूबसूरत चेहरा नहीं

इस प्रतियोगिता के निर्णायक दल में फैशन और शो बिजनेस के ऐसे पांच लोग हैं जो जिप्सी समुदाय से नहीं आते. आयोजकों में से ही एक इवा खिमेनेज कहती हैं, "यह केवल खूबसूरती के बारे में नहीं है. यह पढ़ाई लिखाई और बुद्धिमत्ता के बारे में है." स्पेन के करीब आधे जिप्सी 16 साल की उम्र से पहले ही स्कूल छोड़ देते हैं. सात लाख के करीब आबादी वाले इस अल्पसंख्यक समुदाय में निरक्षरता की दर बहुत ऊंची है. इस साल 6 अक्टूबर को होने वाले "मिस्टर एंड मिस जिप्सी" के फाइनल मुकाबले में मजा तो होगा ही साथ ही प्रतियोगी और उनके परिवार वाले इसे जीवन बदल देने वाले मौके के तौर पर देख रहे हैं.

पारंपरिक रूप से बंजारों जैसा जीवन जीने वाले यहां के रोमा लोगों के पूर्वज सदियों पहले भारत से आए थे. उन्हें लंबे समय से भेदभाव का सामना करना पड़ा है. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाजी सेना ने यहूदियों और समलैंगिकों के साथ लाखों की तादाद में इन्हें भी मौत के घाट उतारा था. आज भी कई देशों में वहां के नागरिक रोमा लोगों पर छोटे मोटे अपराध करने का आरोप लगाते रहते हैं.

आरआर/एमजी(एएफपी)

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