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मनोरंजन

कैसी है रामू की नई फिल्म रक्त चरित्र

राम गोपाल वर्मा माने हुए निर्देशक हैं. लेकिन हाल के दिनों उनकी जितनी फिल्में आईं, औंधे मुंह गिरीं. कुछ लोग कहते हैं कि रामू अब अति कर देते हैं जो लोगों पसंद नहीं आती. उन्हें शायद इस बात की परवाह नहीं. नई फिल्म भी अति ही.

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मुख्य भूमिका में हैं विवेक ओबेरॉय

इस शुक्रवार राम गोपाल वर्मा की नई फिल्म रक्त चरित्र रिलीज हुई है. इस फिल्म को हिंसा से भरपूर एक ऐसी फिल्म कहा जा रहा है जिसे देखने के लिए खुद को तैयार कर पाना बड़ा मुश्किल होगा. फिल्म समीक्षक चंद्रमोहन शर्मा कहते हैं कि एक्शन फिल्मों को पसंद करने वाले लोगों को भी इस फिल्म को देखने के लिए हिम्मत जुटानी होगी. फिल्म देखने के बाद शर्मा ने बताया, "इस फिल्म में मारकाट के सीन अति पार कर गए हैं. सेंसर ने इस फिल्म को ए सर्टिफिकेट देकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्ति पा ली लेकिन मुझे लगता है कि हिंसा कितनी दिखाई जानी चाहिए, अब इस पर बहस करने का वक्त आ गया है."

Indien Film Regisseur Ram Gopal Verm Bollywood

निर्देशक राम गोपाल वर्मा

भारत के अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी समीक्षा में लिखा है कि फिल्म में इतना खून दिखाया गया है जितना पिछले काफी समय से पर्दे पर नहीं देखा गया. हालांकि रामू के पास इसकी वजह भी है. अखबार लिखता है, "बेशक कहानी इस खून खराबे की मांग करती है. एक दलित नेता की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है और फिर उसके बेटे बदला लेने की ठान लेते हैं."

टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस फिल्म की तुलना हॉलीवुड निर्देशक क्वेंटिन टारंटीनो की फिल्म किल बिल से की है. अखबार कहता है कि रक्त चरित्र में हिंसा का मंजर कुछ वैसा ही है जैसा किल बिल में दिखा और फिर दोनों की कहानी का आधार भी एक ही है, बदला. अपनी समीक्षा में फिल्म को तीन स्टार देने वाले टाइम्स ऑफ इंडिया ने हालांकि इस हिंसा को जरूरत से कहीं ज्यादा बताया है.

एक अन्य अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने फिल्म को दो ही स्टार दिए हैं. अपनी समीक्षा में अखबार ने फिल्म की काफी खिंचाई की है. फिल्म समीक्षक मयंक शेखर लिखते हैं, "फिल्मकार कहते हैं कि यह एक सच्ची कहानी पर आधारित फिल्म है. शायद टॉम एंड जैरी भी कुछ मायनों में सच्चा ही है. यह फिल्म सिर्फ वयस्कों के लिए है, उन वयस्कों के लिए जो अपनी भड़ास निकालना चाहते हैं या फिर अपनी हिंसक फंतासियों को पूरा होते देखना चाहते हैं."

यह फिल्म पांच घंटे की बनाई गई है. इसे दो पार्ट में रिलीज किया जा रहा है. दूसरा पार्ट नवंबर में रिलीज होना है. रामू की फूंक 1 और 2, आग- राम गोपाल वर्मा के शोले, अज्ञात, कॉन्ट्रैक्ट और डार्लिंग जैसी फिल्मों को बकवास बताया गया. ऐसी फिल्मों का बोझ उन पर बढ़ता जा रहा है. वह सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले निर्देशकों में रहे हैं. लेकिन अब लोग कहने लगे हैं कि उन्हें अपनी फिल्मों का चरित्र बदलना होगा. रक्त चरित्र ऐसा कर पाएगी क्या?

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः एन रंजन

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