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दुनिया

कैमरन का ऐतिहासिक दौरा

श्रीलंका ने कॉमनवेल्थ सम्मेलन की मेजबानी से जंग के बाद देश की "सुधरती तस्वीर" दिखाने की सोची लेकिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने उत्तरी हिस्से का दौरा कर तस्वीर का रुख पलट दिया है.

एशिया की सबसे खूनी जातीय संघर्ष के खत्म होने के चार साल बाद श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे दुनिया के सभी महादेशों के दर्जनों बड़े नेताओं की मेजबानी कर रहे हैं. श्रीलंका में 1976 के गुट निरपेक्ष सम्मेलन के बाद पहली बार इतना बड़ा सम्मेलन हो रहा है और इसके जरिए सिंहली राष्ट्रवादी नेता तमिल विद्रोहियों पर विजय के बाद हुए विकास को दिखाना चाहते हैं.

सम्मेलन का आगाज करते हुए राष्ट्रपति राजपक्षे ने कहा कि कॉमनवेल्थ अगर अपने सदस्यों के लिए प्रासंगिक बने रहना चाहता है, तो इसे सजा सुनाने या न्याय करने वाला संगठन नहीं बनना चाहिए, "संघ को अपने लोगों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और सजा सुनाने या न्याय करने वाला नहीं बनना चाहिए." राजपक्षे इस संगठन के अध्यक्ष बन रहे हैं लेकिन मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों ने उनकी तैयारियों पर ग्रहण लगा दिया है. सम्मेलन का उद्घाटन होने के कुछ ही देर बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन जाफना के दौरे पर निकल गए.

Prince Charles Mahinda Rajapaksa Sri Lanka 14.11.2013

प्रिंस चार्ल्स और महिंदा राजपक्षे

ब्रिटिश प्रधानमंत्री सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ ही युद्ध प्रभावित श्रीलंका के उत्तरी हिस्से में जा कर तमिल पीड़ितों की बात भी सुनना चाहते हैं. 1948 में ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद डेविड कैमरन पहले बड़े ब्रिटिश नेता हैं जो जाफना का दौरा कर रहे हैं. कैमरन ने कन्नगी कैंप का दौरा किया जहां करीब 500 लोग अभी भी पुनर्वास के इंतजार में हैं. इनकी जमीन सेना ने 23 साल पहले ले ली थी. कैमरन मिट्टी और टिन से बने छोटे घरों के पास की गलियों से गुजरे. उन्होंने साथ चल रहे सरकारी अधिकारी से पूछा, "जंग खत्म हो चुकी है, इन लोगों के पुनर्वास में इतनी देरी क्यों हो रही है?" अधिकारी ने जवाब दिया कि पुनर्वास का काम चल रहा है. इससे पहले वो प्रदर्शन कर रहे 100 से कुछ ज्यादा लोग से भी मिले जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं. ये वो लोग हैं जिनके अपने युद्ध के दौरान या उसके बाद लापता हो गए. कैमरन से मिल कर अपना हाल सुनाने के लिए कई लोग 100 किलोमीटर दूर से भी आए हैं. इनमें 48 साल की थार्सन भी हैं, जिनके बेटे को गिरफ्तार किया गया लेकिन बाद में उसका कोई पता नहीं चला.

David Cameron in Sri Lanka

राहत शिविर में कैमरन

श्रीलंका के बहुत से लोग राजपक्षे को देश का हीरो मानते हैं जिन्होंने चार दशक से चले आ रहे गृह युद्ध को खत्म किया. लेकिन राष्ट्रपति और उनकी सेना पर आरोप है कि इस संघर्ष को खत्म करने के लिए उन्होंने युद्ध के आखिरी दौर में 40,000 से ज्यादा आम नागरिकों को मार दिया. राजपक्षे इन आरोपों से इनकार करते हैं और अंतरराष्ट्रीय जांच को जारी रखने से मना करते हैं. इस कारण कनाडा, मॉरिशस और भारत के राष्ट्राध्यक्ष कोलंबो के कॉमनवेल्थ सम्मेलन में नहीं आए. भारत की तरफ से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को जाना था लेकिन उनकी जगह विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद गए हैं. जो नेता आए हैं उनकी जुबान भी कठोर रहने की बात कही जा रही है. राष्ट्रपति राजपक्षे के लिए इस सम्मेलन के नतीजे उनकी सोच से अलग भी रह सकते हैं. 53 देशों के संघ में भारत समेत कुछ और देश उनके खिलाफ बोल सकते हैं. कैमरन ने तरीका भी दिखा दिया है.

एनआर/एजेए (डीपीए, एएफपी)

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