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विज्ञान

कैंसर से बचा सकती है एस्पिरिन

अधिकतर लोग सिर दर्द होने पर बिना सोचे समझे एस्पिरिन ले लेते हैं. अब यह दवा दर्द के साथ साथ कैंसर का भी इलाज कर सकेगी. लेकिन हर किसी को फायदा नहीं मिल पाएगा.

एस्पिरिन का इस्तेमाल आमतौर पर दर्द और बुखार से निपटने के लिए किया जाता है. नए शोध में पता चला है कि एस्पिरिन से कोलन यानि मलाशय के कैंसर का खतरा आधा किया जा सकता है. पर ऐसा तभी हो सकता है अगर शरीर में एक खास तरह के जीन हों.

दरअसल एस्पिरिन शरीर में साइक्लोऑक्सिजनेस-2 नाम के एंजाइम का बनना रोक देती है जिससे मलाशय और आंत के कैंसर का खतरा कम हो जाता है. लेकिन टेस्ट के दौरान पाया गया कि कई मामलों में मरीजों को इसका फायदा नहीं पहुंचा. काफी समय से वैज्ञानिक इसका कारण जानने की कोशिश कर रहे थे कि एस्पिरिन का असर कुछ ही लोगों में क्यों दिखता है और बाकी में क्यों नहीं.

साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित हुई इस स्टडी के लिए वैज्ञानिकों ने उन लोगों के ऊतकों पर शोध किया गया जिनको एस्पिरिन खाने के बावजूद कोलन कैंसर हो गया था. वैज्ञानिकों ने पाया कि ऐसे लोगों में वह एक खास जीन नहीं था जिसके कारण एस्पिरिन कैंसर प्रतिरोधी भूमिका निभा पाता है. इस स्टडी के लिए वैज्ञानिकों ने कोलन कैंसर के 270 मरीजों के टिशू का अध्ययन किया.

केस वेस्टर्न रिजर्व स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ता और इस स्टडी के वरिष्ठ लेखक सैनफॉर्ड मार्कोवित्ज बताते हैं, "अगर आप उन लोगों को देखें जिनमें काफी मात्रा में 15-पीजीडीएच था और उन्होंने एस्पिरिन ली, उनमें कोलन कैंसर का खतरा आधा हो गया. इससे बहुत साफ साफ पता चलता है कि किसे एस्पिरिन से फायदा होगा और किसे नहीं." यह नतीजे बहुत सारे लोगों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं जो बिना जाने एस्पिरिन खाते हैं जिसके कारण उनके पेट में अल्सर और रक्त स्राव होने का खतरा बढ़ जाता है.

एस्पिरिन सबसे पहले बायर कंपनी ने बनाई थी और यह एक बहुत सस्ती और आसानी से मिलने वाली दवा है. अब वैज्ञानिक एक ऐसा टेस्ट विकसित करना चाहते हैं जिससे आसानी से पता चल सके कि किसे एस्पिरिन से फायदा होगा. अमेरिका में फेफड़ों के कैंसर के बाद कोलन कैंसर ही सबसे ज्यादा लोगों की जानें लेता है.

आरआर/आईबी (एएफपी)

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